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Tag: प्रेम
सबसे ख़ुश दो लोग
लड़का और लड़की की
अपने-अपने घरों में
इतनी भी नहीं चलती थी
कि पर्दों का रंग चुनने तक में
उनकी राय ली जाती
उनकी जेबों की हालत ऐसी थी
कि आधी-आधी...
तुम मत घटाना
तुम घटाना मत
अपना प्रेम,
तब भी नहीं
जब लोग करने लगें
उसका हिसाब।
ठगा हुआ पाओ
अपने को
अकेला
एक दिन,
तब भी नहीं।
मत घटाना
अपना प्रेम।
बन्द कर देगी तुमसे बोलना
नहीं तो
धरती यह,...
बातें
आ साजन, आज बातें कर लें
तेरे दिल के बाग़ों में हरी चाय की पत्ती-जैसी
जो बात जब भी उगी, तूने वही बात तोड़ ली
हर इक...
प्रेम
द्रव्य नहीं कुछ मेरे पास
फिर भी मैं करता हूँ प्यार
रूप नहीं कुछ मेरे पास
फिर भी मैं करता हूँ प्यार
सांसारिक व्यवहार न ज्ञान
फिर भी मैं करता...
ग़रीबों की बस्ती
यह है कलकत्ता का बहूबाज़ार, जिसके एक ओर सरकारी अफ़सरों तथा महाजनों के विशाल भवन हैं और दूसरी ओर पीछे उसी अटपट सड़क के...
छोटे-छोटे ताजमहल
वह बात न मीरा ने उठायी, न ख़ुद उसने। मिलने से पहले ज़रूर लगा था कि कोई बहुत ही ज़रूरी बात है जिस पर...
जल स्त्रोत
मुझे उम्मीद है
तुम्हारी हथेलियों में हमेशा
मौजूद होगी थोड़ी-सी नमी,
मैं जिनमें डुबा सकूँ
अपनी उच्चाकाँक्षाओं के
बड़े-बड़े जहाज़
तुम अपने आँचल में
समेट लाओ कोई नदी,
मैं एक लम्बे दिन के बाद
तुम्हारी गोद...
मुलाक़ातें
अचानक तुम आ जाओ
इतनी रेलें चलती हैं
भारत में
कभी
कहीं से भी आ सकती हो
मेरे पास
कुछ दिन रहना इस घर में
जो उतना ही तुम्हारा भी है
तुम्हें...
घोंसला, भाषा
घोंसला
मुझे नहीं पता
मेरे पास कितना वक़्त शेष है
उम्र का कितना हिस्सा जी चुका
कितना रह गया है बाक़ी
मैं नहीं जानता
आजकल बहुत कम सोता हूँ
बहुत कुछ...
एक और ढंग
भागकर अकेलेपन से अपने
तुम में मैं गया।
सुविधा के कई वर्ष
तुमने व्यतीत किए।
कैसे?
कुछ स्मरण नहीं।
मैं और तुम! अपनी दिनचर्या के
पृष्ठ पर
अंकित थे
एक संयुक्ताक्षर!
क्या कहूँ! लिपि...
सोने से पहले एक ख़याल
मुझे नवम्बर की धूप की तरह मत चाहो
कि इसमें डूबो तो तमाज़त में नहा जाओ
और इससे अलग हो तो
ठण्डक को पोर-पोर में उतरता देखो
मुझे...
अन्धेरे अकेले घर में
अन्धेरे अकेले घर में
अन्धेरी अकेली रात।
तुम्हीं से लुक-छिपकर
आज न जाने कितने दिन बाद
तुमसे मेरी मुलाक़ात।
और इस अकेले सन्नाटे में
उठती है रह-रहकर
एक टीस-सी अकस्मात्
कि कहने...











