Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Couple sitting under a tree

सबसे ख़ुश दो लोग

लड़का और लड़की की अपने-अपने घरों में इतनी भी नहीं चलती थी कि पर्दों का रंग चुनने तक में उनकी राय ली जाती उनकी जेबों की हालत ऐसी थी कि आधी-आधी...
Prayag Shukla

तुम मत घटाना

तुम घटाना मत अपना प्रेम, तब भी नहीं जब लोग करने लगें उसका हिसाब। ठगा हुआ पाओ अपने को अकेला एक दिन, तब भी नहीं। मत घटाना अपना प्रेम। बन्द कर देगी तुमसे बोलना नहीं तो धरती यह,...
Amrita Pritam

बातें

आ साजन, आज बातें कर लें तेरे दिल के बाग़ों में हरी चाय की पत्ती-जैसी जो बात जब भी उगी, तूने वही बात तोड़ ली हर इक...
Shamser Bahadur Singh

प्रेम

द्रव्य नहीं कुछ मेरे पास फिर भी मैं करता हूँ प्यार रूप नहीं कुछ मेरे पास फिर भी मैं करता हूँ प्यार सांसारिक व्यवहार न ज्ञान फिर भी मैं करता...
Markandeya

ग़रीबों की बस्ती

यह है कलकत्ता का बहूबाज़ार, जिसके एक ओर सरकारी अफ़सरों तथा महाजनों के विशाल भवन हैं और दूसरी ओर पीछे उसी अटपट सड़क के...
Rajendra Yadav

छोटे-छोटे ताजमहल

वह बात न मीरा ने उठायी, न ख़ुद उसने। मिलने से पहले ज़रूर लगा था कि कोई बहुत ही ज़रूरी बात है जिस पर...
Couple, Silhouette

जल स्त्रोत

मुझे उम्मीद है तुम्हारी हथेलियों में हमेशा मौजूद होगी थोड़ी-सी नमी, मैं जिनमें डुबा सकूँ अपनी उच्चाकाँक्षाओं के बड़े-बड़े जहाज़ तुम अपने आँचल में समेट लाओ कोई नदी, मैं एक लम्बे दिन के बाद तुम्हारी गोद...
Alok Dhanwa

मुलाक़ातें

अचानक तुम आ जाओ इतनी रेलें चलती हैं भारत में कभी कहीं से भी आ सकती हो मेरे पास कुछ दिन रहना इस घर में जो उतना ही तुम्हारा भी है तुम्हें...
Gaurav Bharti

घोंसला, भाषा

घोंसला मुझे नहीं पता मेरे पास कितना वक़्त शेष है उम्र का कितना हिस्सा जी चुका कितना रह गया है बाक़ी मैं नहीं जानता आजकल बहुत कम सोता हूँ बहुत कुछ...
Shrikant Verma

एक और ढंग

भागकर अकेलेपन से अपने तुम में मैं गया। सुविधा के कई वर्ष तुमने व्यतीत किए। कैसे? कुछ स्मरण नहीं। मैं और तुम! अपनी दिनचर्या के पृष्ठ पर अंकित थे एक संयुक्ताक्षर! क्या कहूँ! लिपि...
Kishwar Naheed

सोने से पहले एक ख़याल

मुझे नवम्बर की धूप की तरह मत चाहो कि इसमें डूबो तो तमाज़त में नहा जाओ और इससे अलग हो तो ठण्डक को पोर-पोर में उतरता देखो मुझे...
Agyeya

अन्धेरे अकेले घर में

अन्धेरे अकेले घर में अन्धेरी अकेली रात। तुम्हीं से लुक-छिपकर आज न जाने कितने दिन बाद तुमसे मेरी मुलाक़ात। और इस अकेले सन्नाटे में उठती है रह-रहकर एक टीस-सी अकस्मात् कि कहने...
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