Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

समीकरण

प्रेम में पड़ी लड़की नहीं देखना चाहती जीवन में किसी तरह की विषमता। ज़िन्दगी को जीना चाहती है कविताओं के समीकरण से। भागती है दूर गणित से, नहीं भाता उसे घटाव,...

जंगली बूटी

अंगूरी, मेरे पड़ोसियों के पड़ोसियों के पड़ोसियों के घर, उनके बड़े ही पुराने नौकर की बिल्कुल नयी बीवी है। एक तो नयी इस बात...
Harivansh Rai Bachchan

क्षण भर को क्यों प्यार किया था?

क्षण भर को क्यों प्यार किया था? अर्द्ध रात्रि में सहसा उठकर पलक सम्पुटों में मदिरा भर तुमने क्यों मेरे चरणों में अपना तन-मन वार दिया था? क्षण भर...
Harsh Bhardwaj

हर्ष भारद्वाज की कविताएँ

बातें समय की रेखाओं में नहीं उलझती जो घर लौटती भी है तो देर रात की सी चुप-चुप और मेरे दिल के फ़र्श पर छप जाती है मिट्टी और ओस में...
Nida Fazli

एक लड़की

काव्य-संकलन: 'शहर से गाँव' लिप्यंतरण: आमिर विद्यार्थी वह फूल-फूल बदन साँवली-सी एक लड़की जो रोज़ मेरी गली से गुज़र के जाती है सुना है वह किसी लड़के से प्यार करती है बहार...
Gaurav Bharti

गौरव भारती की कविताएँ

कील एक साल तीन सौ पैंसठ दिन पूरे आठ हज़ार सात सौ साठ घण्टे एक कील के सहारे दीवार पर टंगे हुए हैं मेरे साथियों आओ, मुझे तपाओ आग की भट्ठी में...
Jaan Nisar Akhtar

तजज़िया

मैं तुझे चाहता नहीं लेकिन फिर भी जब पास तू नहीं होती ख़ुद को कितना उदास पाता हूँ गुम-से अपने हवास पाता हूँ जाने क्या धुन समायी रहती है इक...
Amit Tiwary

कुछ प्रेम कविताएँ

1 तुम्हारे साथ रहकर मेरे युद्ध रुद्ध हुए हैं, मेरा तमस छँटता रहा है, मैं अब मानता हूँ कि वक्षों के टकराव में होना चाहिए केवल आलिंगन का उद्देश्य, मैं शान्ति को देख...

तुम आयीं

तुम आयीं जैसे छीमियों में धीरे-धीरे आता है रस, जैसे चलते-चलते एड़ी में काँटा जाए धँस तुम दिखीं जैसे कोई बच्चा सुन रहा हो कहानी, तुम हँसी जैसे तट पर बजता हो पानी तुम...
Prabhat

‘जीवन के दिन’ से कविताएँ

कविता संग्रह: 'जीवन के दिन' - प्रभात चयन व प्रस्तुति: अमर दलपुरा याद मैं ज़मीन पर लेटा हुआ हूँ पर बबूल का पेड़ नहीं है यहाँ मुझे उसकी याद...
Tribe, Village, Adivasi, Labour, Tribal, Poor

गोबिन्द प्रसाद की कविताएँ

आने वाला दृश्य आदमी, पेड़ और कव्वे— यह हमारी सदी का एक पुराना दृश्य रहा है इसमें जो कुछ छूट गया है मसलन पुरानी इमारतें, खण्डहरनुमा बुर्जियाँ और किसी...
Gorakh Pandey

सात सुरों में पुकारता है प्यार

माँ, मैं जोगी के साथ जाऊँगी जोगी शिरीष तले मुझे मिला सिर्फ़ एक बाँसुरी थी उसके हाथ में आँखों में आकाश का सपना पैरों में धूल और घाव गाँव-गाँव वन-वन भटकता...
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