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Tag: प्रेम
वही तो नहीं रहने देगा
कविता संग्रह 'कहीं नहीं वहीं' से
प्रेम वही तो नहीं रहने देगा
उसके शरीर की लय को,
उसके लावण्य की आभा को
उसके नेत्रों के क्षितिज ताकते एकान्त...
कितनी कम जगहें हैं प्रेम के लिए
कितना तो सहज होता है
मौसम का यूँ ही मीठा हो जाना
शेफालियों का अनायास झर जाना
बारिशों का सोंधा हो जाना
भर जाना आकाश का सम्भावनाओं से
और...
प्रेम की डाक
ईश्वर के हरकारे
चल पड़े हैं
प्रेम की डाक लेकर
वसंत ऋतु में
उनके पास सभ्यता के
प्रथम प्रेम की स्मृतियों की
अनन्त कहानियाँ हैं
रोशनी के आलोक में जब
शहर स्थिर...
रुत
1
इधर उत्तरायण हुए सूर्य का मन
माघ जल के छींटों से तृप्त हुआ
और उधर गुलाबी सर्दी की तान ने
नायक जनवरी को फ़रवरी के प्रेम में...
प्रेम-पथ हो न सूना
प्रेम-पथ हो न सूना कभी, इसलिए
जिस जगह मैं थकूँ, उस जगह तुम चलो।
क़ब्र-सी मौन धरती पड़ी पाँव पर
शीश पर है कफ़न-सा घिरा आसमाँ,
मौत की...
प्रेम मेरे लिए
मैं नहीं मानता उसे प्रेम
जिसमें एक व्यक्ति को नसीब हो रसातल
दूसरे को मिले उन्मुक्त आकाश,
इसे नहीं कहा जा सकता इंसाफ़।
'दोनों में बराबर बँटें दुःख'
यह...
प्रेम करती स्त्री
प्रेम करती स्त्री देखती है
एक सपना रोज़
जागने पर सोचती है क्या था वह
निकालने बैठती है अर्थ
दिखती हैं उसे आमफ़हम चीज़ें
कोई रेतीली जगह
लगातार बहता नल
उसका...
प्यार करो
प्यार करो
अपने से
मुझसे नहीं
सभी से प्यार करो।
वह जो आँखों से दूर
उपेक्षित पड़ा हुआ,
वह जो मिट्टी की
सौ पर्तों में गड़ा हुआ।
वह जिसकी साँसें
अभी आश्रित जीती...
कविताएँ: फ़रवरी 2021
तुम्हारे साथ थोड़ा और मनुष्य हुआ मैं
तुम्हारे साथ
तुम्हारा शहर
अपना-सा लगा
तुम्हारे साथ
मैंने जाना—
कि शहर को जानना हो तो
शहर में बहती नदी को जानना चाहिए
नदी की...
फ़रवरी: वसन्त और प्रेम की कुछ कविताएँ
छोटा पीला फूल
जिन छोटे-छोटे फूलों का
हम नाम नहीं जानते
अवसाद के क्षणों में
घास, झाड़ी या पत्तियों में से
उँगली बढ़ा
वही हमें थाम लेते हैं
घास में उगे
उस पीले...
स्वप्न-प्रसंग
तुमने कहा था एक बार
गहरे स्वप्न में मिलोगी तुम
कितने गहरे उतरूँ स्वप्न में
कि तुम मिलो?
एक बार मैं डूबा स्वप्न में इतना गहरा
कि फिर उभरा...
आख़िरी बार मिलो
आख़िरी बार मिलो ऐसे कि जलते हुए दिल
राख हो जाएँ कोई और तक़ाज़ा न करें
चाक-ए-वादा न सिले, ज़ख़्म-ए-तमन्ना न खिले
साँस हमवार रहे, शमा की लौ...











