Tag: माँ

mangalesh dabral

माँ की तस्वीर

घर में माँ की कोई तस्वीर नहीं जब भी तस्वीर खिंचवाने का मौक़ा आता है माँ घर में खोयी हुई किसी चीज़ को ढूँढ रही होती है या...
Chandrakant Devtale

माँ पर नहीं लिख सकता कविता

माँ के लिए सम्भव नहीं होगी मुझसे कविता अमर चिऊँटियों का एक दस्ता मेरे मस्तिष्क में रेंगता रहता है माँ वहाँ हर रोज़ चुटकी-दो-चुटकी आटा डाल देती...
Chandrakant Devtale

माँ जब खाना परोसती थी

वे दिन बहुत दूर हो गए हैं जब माँ के बिना परसे पेट भरता ही नहीं था, वे दिन अथाह कुएँ में छूटकर गिरी पीतल की चमकदार...
Rajesh Joshi

माँ कहती है

हम हर रात पैर धोकर सोते हैं करवट होकर। छाती पर हाथ बाँधकर चित्त हम कभी नहीं सोते। सोने से पहले माँ टुइयाँ के तकिये के नीचे सरौता रख देती है बिना नागा। माँ कहती...
Naveen Sagar

माँ

वह दरवाज़े पर है उस पार से बहुत बड़ी दुनिया पार कर के दस्‍तक जब दरवाज़े पर होगी तब के लिए वह रात-भर दरवाज़े पर है। वह एक भूली हुई...
Padma Sachdev

माँ

बुलाने के लिए कई नाम हैं जिसे पुकारो बोलता भी है पर एक नाम ऐसा है जिसे पुकारो तो सब चौकन्ने हो जाते हैं सभी सोचते हैं ये...
Ishrat Afreen

अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो

मिरी बिटिया तुझे भी मैंने जन्मा था उसी दुःख से कि जिस दुःख से तिरे भाई को जन्मा तुझे भी मैंने अपने तन से वाबस्ता रखा उतनी ही मुद्दत तक कि...
Vijay Rahi

शहर से गुज़रते हुए प्रेम, कविता पढ़ना, बेबसी

शहर से गुज़रते हुए प्रेम मैं जब-जब शहर से गुज़रता हूँ सोचता हूँ किसने बसाए होंगे शहर? शायद गाँवों से भागे प्रेमियों ने शहर बसाए होंगे ये वो अभागे थे, जो फिर लौटना...

माँ : छह कविताएँ

1 उसने बुना था पृथ्वी को तरह-तरह की ऋतुओं से मेरे लिए मखमली हरी घास बिछायी थी इन्द्रधनुष खिलाए थे उसे मालूम था मुझे सींचने वाले बहुत लोग नहीं हैं इसलिए उसने...
Habib Jalib

माँ

'Maa' - Habib Jalib बच्चों पे चली गोली माँ देख के ये बोली- ये दिल के मेरे टुकड़े यूँ रोएँ मेरे होते मैं दूर खड़ी देखूँ ये मुझसे नहीं होगा मैं दूर खड़ी...
Nirmal Gupt

माँ को याद करते हुए

'Maa Ko Yaad Karte Hue', a poem by Nirmal Gupt उस रात अँधेरा बहुत घना था मौसम ज़रा गुनगुना माँ ने अपने सर्द हाथों में थाम मेरे हाथ...
Vivek Chaturvedi

विवेक चतुर्वेदी की कविताएँ

Poems: Vivek Chaturvedi उस दिन भी... नहीं रहेंगे हम एक दिन धरती पर उस दिन भी खिले हमारे हिस्से की धूप और गुनगुना जाए देहरी पर चिड़िया आए उस दिन भी और हाथ...

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Sara Shagufta

क़र्ज़

मेरा बाप नंगा था मैंने अपने कपड़े उतार उसे दे दिए ज़मीन भी नंगी थी मैंने उसे अपने मकान से दाग़ दिया शर्म भी नंगी थी, मैंने उसे अपनी...
Girdhar Rathi

स्वगत

'Swagat' | a poem by Girdhar Rathi वही— जिसे भींच रहे हो मुट्ठी में लेकिन जो टूट-बिखर जाता है बार-बार— जीवन है। कभी रेत और कभी बर्फ़ कभी आँच और...
Saadat Hasan Manto

वह लड़की

सवा चार बज चुके थे लेकिन धूप में वही तमाज़त थी जो दोपहर को बारह बजे के क़रीब थी। उसने बालकनी में आकर बाहर...
Earth Woman

प्रेम का अबेकस (दूसरा भाग)

1 प्रेम से क्रोध तक आग से आश्रय तक विश्वास करने के विपरीत क्या है? उसके लायक़ भी कुछ नही जैसे चाँदी की एक शानदार सुई चमकती है सफ़ेद परिधि में प्रेम...

चट्टान को तोड़ो, वह सुन्दर हो जाएगी

चट्टान को तोड़ो वह सुन्दर हो जाएगी उसे तोड़ो वह और, और सुन्दर होती जाएगी अब उसे उठा लो रख लो कन्धे पर ले जाओ शहर या क़स्बे में डाल दो...
Faiz Ahmad Faiz

इन्तिसाब

आज के नाम और आज के ग़म के नाम आज का ग़म कि है ज़िन्दगी के भरे गुलसिताँ से ख़फ़ा ज़र्द पत्तों का बन ज़र्द पत्तों का बन जो मिरा...
Gopal Singh Nepali

प्रार्थना बनी रहीं

रोटियाँ ग़रीब की, प्रार्थना बनी रहीं! एक ही तो प्रश्न है रोटियों की पीर का पर उसे भी आसरा आँसुओं के नीर का राज है ग़रीब का,...
Mahadevi Verma

जाग तुझको दूर जाना

चिर सजग आँखें उनींदी, आज कैसा व्यस्त बाना! जाग तुझको दूर जाना! अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कम्प हो ले या प्रलय के आँसुओं में मौन...
Zafar Iqbal

अभी किसी के न मेरे कहे से गुज़रेगा

अभी किसी के न मेरे कहे से गुज़रेगा वो ख़ुद ही एक दिन इस दाएरे से गुज़रेगा भरी रहे अभी आँखों में उसके नाम की नींद वो...
Vinod Kumar Shukla

बोलने में कम से कम बोलूँ

बोलने में कम से कम बोलूँ कभी बोलूँ, अधिकतम न बोलूँ इतना कम कि किसी दिन एक बात बार-बार बोलूँ जैसे कोयल की बार-बार की कूक फिर चुप। मेरे अधिकतम...
Krishan Chander

दो फ़र्लांग लम्बी सड़क

Do Farlaang Lambi Sadak, a story by Krishan Chander कचहरियों से लेकर लॉ कॉलेज तक बस यही कोई दो फ़र्लांग लम्बी सड़क होगी। हर रोज़...
Ishrat Afreen

टारगेट किलिंग

चूड़ी वाले के यहाँ मैं अभी स्टूल पर बैठी ही थी साथ की दुकान के आगे इक स्कूटर रुका गोली चली सब ने फ़क़ चेहरों के साथ मुड़के देखा एक लम्हे...
Sandeep Nirbhay

जिस दिशा में मेरा भोला गाँव है

क्या बारिश के दिनों धोरों पर गड्डमड्ड होते हैं बच्चे क्या औरतों के ओढ़नों से झाँकता है गाँव क्या बुज़ुर्गों की आँखों में बचा है काजल क्या स्लेट...
Abraham Lincoln, Mary Owens

अब्राहिम लिंकन का पत्र मेरी ऑवेंस के नाम

यह पत्र लिंकन ने राष्ट्रपति बनने से बहुत पूर्व अपनी युवावस्था में लिखा था। स्प्रिंग-फ़ील्ड, 7 मई, 1837 मित्र मेरी, प्रस्तुत पत्र से पहले मैंने दो चिट्ठियाँ लिखनी आरम्भ...
Malkhan Singh

मैं आदमी नहीं हूँ

1 मैं आदमी नहीं हूँ स्साब जानवर हूँ दोपाया जानवर जिसे बात-बात पर मनुपुत्र—माँ चो, बहन चो, कमीन क़ौम कहता है। पूरा दिन बैल की तरह जोतता है मुट्ठी-भर सत्तू मजूरी में देता है। मुँह...
Mahatma Gandhi - Dr Bhimrao Ambedkar

मेरे समकालीन: डॉ० भीमराव अम्बेडकर

डॉ० अम्बेडकर के प्रति और अछूतों का उद्धार करने की उनकी इच्छा के प्रति मेरा सद्भाव और उनकी होशियारी के प्रति आदर होने के...
Sunshine Painting Horizon

एक उमड़ता सैलाब

हममें ही डूबा है वह क्षितिज जहाँ से उदित होता है सबका आकाश फेंकता ऊषाएँ ऋतुएँ, वर्ष, संवत्सर उछालता व्यर्थ है प्रतीक्षा उन अश्वों के टापों की जो दो गहरे लम्बे सन्नाटों के...
Rajkamal Chaudhary

अनायास

फिर भी कभी चला जाऊँगा उसी दरवाज़े तक अनायास जैसे, उस अँधियारे गलियारे में कोई अब तक रहता हो। फिर भी, दीवार की कील पर अटका...
Rajkamal Chaudhary

नींद में भटकता हुआ आदमी

नींद की एकान्त सड़कों पर भागते हुए आवारा सपने सेकेण्ड शो से लौटती हुई बीमार टैक्सियाँ भोथरी छुरी जैसी चीख़ें बेहोश औरत की ठहरी हुई आँखों की...
bhisham sahni

फ़ैसला

उन दिनों हीरालाल और मैं अक्सर शाम को घूमने जाया करते थे। शहर की गलियाँ लाँघकर हम शहर के बाहर खेतों की ओर निकल...
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