क्या हुआ होगा उन भाषाओं का
जिन्हें बोलने वाले लोग
करते गए पलायन
और अपने नए ठिकाने पर
बोलने लगे नई स्थानीय भाषा
छोड़ते गए अपनी माँ-बोली को
पिछड़ेपन की निशानी समझकर

छोड़ते रहने की इस पुनरावृत्ति ने
लील लिया कितनी ही ज़िंदा भाषाओं को

सम्भव है
उन्हीं में से कुछ भाषाओं में लिखी गई हों
सबसे सुंदर कविताएँ
और साहित्य की अनसुनी विधाओं में रचनाएँ,
दोपहर की नींद से उठकर
बोले गए हो दाम्पत्य के सबसे प्रेमिल शब्द

सम्भव है
हम लिख रहे हों कहीं कमतर
भौतिक शास्त्र के किसी वितरण के ग्राफ़ की चोटी
गई हो कट, उस भाषा के खो जाने से
और हम रचनात्मक सपाट पर चल रहे हों
या चढ़ रहे हों छोटी-मोटी चोटियाँ
जबकि किसी शिलालेख पर उकेरी लकीरें
तामीर हों कवित्व के उपेक्षित शिखर की

विलुप्त हो गई भाषाओं में से
शायद बच गई हो कोई एकाध
गुप्त भाषा
जिसका इस्तेमाल करते हों सैनिक
कोडेड संदेश भेजने के लिए

युद्ध पर जाने से पहले प्रेयसी को
उसी भाषा का गीत सुनाता हो सैनिक
बिना समझाए उसका मतलब
(सेना की गोपनीयता की शर्त के चलते)
जिसे वह समझती हो
कुछ रहस्यमय अगड़म-बगड़म
और सहानुभूति रखती हो
उसके झक्कीपन से

फिर भी‌ अम्लान-पुष्प* वाली कहानी की तरह
विलुप्त भाषा के गीत रहते हों उसके साथ

इस तरह सेना के दायरे से बाहर
प्रेमिकाओं के मन में
हिलोरें मारती हो
एक खो गई भाषा
रूमानी अगड़म-बगड़म बनकर।

*अम्लान पुष्प मेरे बचपन में पढ़ी ‘राजस्थान पत्रिका’ में प्रकाशित एक चित्रकथा थी। इस कहानी में युवतियाँ पति के बाहर जाने पर एक फूल को साथ रखती हैं जो अम्लान रहकर इस बात का प्रमाण देता है कि उनका पति जीवित और उनके प्रति वफ़ादार है।
देवेश पथ सारिया की कविता 'सबसे ख़ुश दो लोग'

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देवेश पथ सारिया
प्राथमिक तौर पर कवि। गद्य लेखन में भी सक्रियता।पुस्तकें: 1. 'नूह की नाव' : प्रथम कविता संग्रह साहित्य अकादमी दिल्ली से शीघ्र प्रकाश्य। 2. 'हक़ीक़त के बीच दरार' (2021): वरिष्ठ ताइवानी कवि ली मिन-युंग के कविता संग्रह का मेरे द्वारा किया गया हिंदी अनुवाद) । 3. ताइवान प्रवास के अनुभवों पर आधारित गद्य की पुस्तक शीघ्र प्रकाश्य।अन्य भाषाओं में प्रकाशन: मेरी कविताओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, मंदारिन चायनीज़, रूसी, स्पेनिश, पंजाबी, बांग्ला और राजस्थानी भाषा-बोलियों में हो चुका है। मेरी रचनाओं के ये अनुवाद लिबर्टी टाइम्स, लिटरेरी ताइवान, ली पोएट्री, यूनाइटेड डेली न्यूज़, बाँग्ला कोबिता, प्रतिमान और कथेसर पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन: हंस, नया ज्ञानोदय, वागर्थ, कथादेश, कथाक्रम, परिकथा, पाखी, अकार, आजकल, बनास जन, मधुमती, अहा! ज़िन्दगी, कादंबिनी, समयांतर, समावर्तन, बया, उद्भावना, जनपथ, नया पथ, कथा, साखी, आधारशिला, दोआबा, बहुमत, परिंदे, प्रगतिशील वसुधा, शुक्रवार साहित्यिक वार्षिकी, कविता बिहान, साहित्य अमृत, शिवना साहित्यिकी, गाँव के लोग, कृति ओर, ककसाड़, अक्षर पर्व, निकट, मंतव्य, गगनांचल, मुक्तांचल, उदिता, उम्मीद, विश्वगाथा, रेतपथ, अनुगूँज, प्राची, कला समय, प्रेरणा अंशु, पुष्पगंधा आदि ।वेब प्रकाशन: सदानीरा, जानकीपुल, पोषम पा, लल्लनटॉप, हिन्दीनेस्ट, हिंदवी, कविता कोश, इंद्रधनुष, अनुनाद, बिजूका, पहली बार, समकालीन जनमत, मीमांसा, शब्दांकन, अविसद, कारवां, हमारा मोर्चा, साहित्यिकी, द साहित्यग्राम, लिटरेचर पॉइंट, अथाई, हिन्दीनामा।समाचार पत्रों में प्रकाशन: राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, प्रभात ख़बर, दि सन्डे पोस्ट।सम्मान: प्रभाकर प्रकाशन, दिल्ली द्वारा आयोजित लघुकथा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान (2021) ।संप्रति: ताइवान में पोस्ट डाॅक्टरल शोधार्थी। मूल रूप से राजस्थान के राजगढ़ (अलवर) से संबंध।

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