फिर छिड़ी रात बात फूलों की
फिर छिड़ी रात बात फूलों की
रात है या बरात फूलों की
फूल के हार, फूल के गजरे
शाम फूलों की, रात फूलों की
आप का साथ, साथ...
मेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आएँगे
मेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आएँगे
इस बूढ़े पीपल की छाया में सुस्ताने आएँगे
हौले-हौले पाँव हिलाओ, जल सोया है छेड़ो मत
हम सब अपने-अपने दीपक...
अभी किसी के न मेरे कहे से गुज़रेगा
अभी किसी के न मेरे कहे से गुज़रेगा
वो ख़ुद ही एक दिन इस दाएरे से गुज़रेगा
भरी रहे अभी आँखों में उसके नाम की नींद
वो...
पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है
पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है
रात ख़ैरात की, सदक़े की सहर होती है
साँस भरने को तो जीना नहीं कहते या रब
दिल ही...
बुलंदी से उतारे जा चुके हैं
बुलंदी से उतारे जा चुके हैं
ज़मीं पर ला के मारे जा चुके हैं
दिखाए बीच दरिया कौन रस्ता
फ़लक ख़ाली है, तारे जा चुके हैं
मआनी क्या...
आबाद रहेंगे वीराने, शादाब रहेंगी ज़ंजीरें
आबाद रहेंगे वीराने, शादाब रहेंगी ज़ंजीरें
जब तक दीवाने ज़िंदा हैं, फूलेंगी-फलेंगी ज़ंजीरें
आज़ादी का दरवाज़ा भी ख़ुद ही खोलेंगी ज़ंजीरें
टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगी जब हद से...
चुपके-चुपके रात-दिन आँसू बहाना याद है
चुपके-चुपके रात-दिन आँसू बहाना याद है
हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है
बा-हज़ाराँ इज़्तिराब ओ सद-हज़ाराँ इश्तियाक़
तुझसे वो पहले-पहल दिल का लगाना याद...
जगमगाती रौशनी के पार क्या था देखते
जगमगाती रौशनी के पार क्या था देखते
धूल का तूफ़ाँ अंधेरे बो रहा था देखते
सब्ज़ टहनी पर मगन थी फ़ाख़्ता गाती हुई
एक शकरा पास ही...
तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था
तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था
न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था
वो क़त्ल करके मुझे हर किसी से पूछते हैं
ये...
मोहब्बत आप अपनी तर्जुमाँ है
मोहब्बत आप अपनी तर्जुमाँ है
यही ख़ुद चश्म ओ दिल, लफ़्ज़ ओ बयाँ है
निगाहों में बहार-ए-जावेदाँ है
जहाँ मैं हूँ, वहीं अब आशियाँ है
मोहब्बत दोनों जानिब...
हंगामा है क्यूँ बरपा
हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है
डाका तो नहीं डाला, चोरी तो नहीं की है
ना-तजरबा-कारी से वाइज़ की ये हैं बातें
इस...
दिल में उतरेगी तो पूछेगी जुनूँ कितना है
दिल में उतरेगी तो पूछेगी जुनूँ कितना है
नोक-ए-ख़ंजर ही बताएगी कि ख़ूँ कितना है
आँधियाँ आईं तो सब लोगों को मालूम हुआ
परचम-ए-ख़्वाब ज़माने में निगूँ...

















