कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन, कहीं आसमाँ नहीं मिलता तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो जहाँ उमीद हो इसकी, वहाँ नहीं...

मोहब्बत में ये क्या मक़ाम आ रहे हैं

मोहब्बत में ये क्या मक़ाम आ रहे हैं कि मंज़िल पे हैं और चले जा रहे हैं ये कह-कहके हम दिल को बहला रहे हैं वो अब...

बाढ़ की सम्भावनाएँ सामने हैं

बाढ़ की सम्भावनाएँ सामने हैं, और नदियों के किनारे घर बने हैं। चीड़-वन में आँधियों की बात मत कर, इन दरख़्तों के बहुत नाज़ुक तने हैं। इस तरह...

मैं हूँ, रात का एक बजा है

मैं हूँ, रात का एक बजा है ख़ाली रस्ता बोल रहा है आज तो यूँ ख़ामोश है दुनिया जैसे कुछ होने वाला है कैसी अँधेरी रात है देखो अपने...

इधर देख लेना, उधर देख लेना

इधर देख लेना, उधर देख लेना कन-अँखियों से उसको मगर देख लेना फ़क़त नब्ज़ से हाल ज़ाहिर न होगा मिरा दिल भी ऐ चारागर देख लेना कभी ज़िक्र-ए-दीदार...

काम करेगी उसकी धार

काम करेगी उसकी धार बाक़ी लोहा है बेकार कैसे बच सकता था मैं पीछे ठग थे, आगे यार बोरी-भर मेहनत पीसूँ निकले इक मुट्ठी-भर सार भूखे को पकवान लगें चटनी, रोटी,...

कोई फूल धूप की पत्तियों में

कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ वो ग़ज़ल का लहजा नया-नया, न कहा हुआ, न सुना हुआ जिसे ले गई है...

अब के हम बिछड़े तो शायद

'Ab Ke Hum Bichde To Shayad', a ghazal by Ahmad Faraz अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल...

उछाला जा रहा है

'Uchhala Ja Raha Hai', by Chandrasen Virat खींचकर मतलब निकाला जा रहा है व्यर्थ ही प्रकरण उछाला जा रहा है मूल मुद्दों से हटाकर ध्यान सबका बहस में...

तेरी ख़ुश्बू का पता करती है

'Teri Khushboo Ka Pata Karti Hai' | Parveen Shakir तेरी ख़ुश्बू का पता करती है मुझ पे एहसान हवा करती है चूमकर फूल को आहिस्ता से मोजज़ा बाद-ए-सबा करती...

मर्द होनी चाहिए, ख़ातून होना चाहिए

'Mard Honi Chahiye' a ghazal by Anwar Masood मर्द होनी चाहिए, ख़ातून होना चाहिए अब ग्रामर का यही क़ानून होना चाहिए रात को बच्चे पढ़ाई की अज़िय्यत से...

आलोक मिश्रा की ग़ज़लें

1 तो क्या हुआ जो तमाशाई हो गया हूँ मैं तिरे ही हक़ में तो सब झूठ बोलता हूँ मैं नहीं ये दुःख तो किसी और के सबब है...
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