सुभाष चन्द्र बोस का उनके बड़े भाई शरत चन्द्र बोस को...
यह पत्र सुभाष चन्द्र बोस ने अपने बड़े भाई शरत चन्द्र बोस को तब लिखा था जब सुभाष केवल 15 साल के थे और उनके भाई शरत वकालत पढ़ने के लिए इंग्लैंड जाने की तयारी कर रहे थे।
यह पत्र पढ़िए और जानिए कि "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा!" जैसा नारा देने वाला राजनेता भी जीवन के उसी पड़ाव से होकर आया था जहाँ बालकपन की हठ भी है, कविताओं से प्रेम भी, प्रकृति-आकर्षण भी और अपनों के प्रति आदरपूर्ण स्नेह भी!
जानवर कब पैदा हुए
"वे अपने को उसी तरह का बना लेते हैं जैसे उनके आसपास की चीजें हों। उनका रंग इसलिए बदल जाता है कि वे अपने को दुश्मनों से बचा सकें, क्योंकि अगर उनका रंग आस-पास की चीजों से मिल जाए तो वे आसानी से दिखाई न देंगे। सर्द मुल्कों में उनकी खाल पर बाल निकल आते हैं जिससे वे गर्म रह सकें। इसीलिए चीते का रंग पीला और धारीदार होता है, उस धूप की तरह, जो दरख्तों से हो कर जंगल में आती है। वह घने जंगल में मुश्किल से दिखाई देता है।"
जानदार चीजें कैसे पैदा हुईं
"तुम पूछोगी कि जमीन पर जानदार चीजों का आना कब शुरू हुआ और पहले कौन-कौन सी चीजें आईं। यह बड़े मजे का सवाल है, पर इसका जवाब देना आसान नहीं है। पहले यह देखो कि जान है क्या चीज। शायद तुम कहोगी कि आदमी और जानवर जानदार हैं। लेकिन दरख्तों और झाड़ियों, फूलों और तरकारियों को क्या कहोगी? यह मानना पड़ेगा कि वे सब भी जानदार हैं। वे पैदा होते हैं, पानी पीते हैं, हवा में साँस लेते हैं और मर जाते हैं। दरख्त और जानवर में खास फर्क यह है कि जानवर चलता-फिरता है, और दरख्त हिल नहीं सकते।"
जमीन कैसे बनी
अनुवाद: प्रेमचंद
तुम जानती हो कि जमीन सूरज के चारों तरफ घूमती है और चाँद जमीन के चारों तरफ घूमता है। शायद तुम्हें यह भी...
बनाम लार्ड कर्जन
"यह मूर्तियां किस प्रकार के स्मृतिचिह्न हैं? इस दरिद्र देश के बहुत-से धन की एक ढेरी है, जो किसी काम नहीं आ सकती। एक बार जाकर देखने से ही विदित होता है कि वह कुछ विशेष पक्षियों के कुछ देर विश्राम लेने के अड्डे से बढ़कर कुछ नहीं है। 'शो' और ड्यूटी का मुकाबिला कीजिये। 'शो' को 'शो' ही समझिये। 'शो' ड्यूटी नहीं है!"
1903 में लिखा गया यह चिट्ठा उस समय के शासकों में से एक लार्ड कर्जन पर बालमुकुन्द गुप्त का एक व्यंग्यपूर्ण प्रहार था, जिसमें उन्होंने जनता के हितों के कार्यों की जगह नुमाइशी कामों को प्राथमिकता देने पर कर्जन को आड़े हाथों लिया था.. क्या यह चिट्ठा आज भी प्रासंगिक है? आपको क्या लगता है?
शुरू का इतिहास कैसे लिखा गया
संसार को जानना और उसके रहस्यों को खंगालना एक बालक मन के लिए वह खेल है जो वास्तव में उनकी समझ को विकसित करने का एक माध्यम भी बनता है। इसी माध्यम के महत्त्व को पहचानते हुए जवाहरलाल नेहरू ने अपनी बेटी को कुछ पत्र लिखे जिनमें उन्होंने संसार के प्राचीनतम रूप और उस रूप में मानवों के दखल के बारे में बातें की हैं! ये पत्र बच्चों से एक बुनियादी स्तर पर जाकर बातें करते हैं, जिसे हमारी शिक्षा प्रणाली कहीं भूल चुकी है.. पढ़िए और अपने आसपास के बच्चों को पढ़ाइये!
संसार पुस्तक है
एक बच्चे का इस संसार से परिचय कैसे कराना चाहिए, इसे लेकर माता-पिता में शायद हमेशा एक संशय रहता है.. अपने तरीकों को लेकर हम निश्चित नहीं हो पाते. लेकिन जवाहरलाल नेहरू का इंदिरा के नाम यह पत्र एक रास्ता ज़रूर दिखाता है, जिसका अनुसरण माता-पिता और अध्यापक दोनों कर सकते हैं..
गाँधीजी के पत्र नेहरू के नाम – 4 जनवरी, 1928
4 जनवरी, 1928
प्रिय जवाहरलाल,
मेरा ख्याल है, तुम्हें मुझसे इतना अधिक प्रेम है कि मैं जो कुछ लिखने जा रहा हूँ उसका तुम बुरा नहीं...
गाँधीजी के पत्र नेहरू के नाम – 30 सितम्बर, 1925
30 सितम्बर, 1925
प्रिय जवाहर,
हम विचित्र समय में रह रहे हैं। शीतला सहाय अपना बचाव कर सकते हैं। आगे की घटनाओं से मुझे परिचित रखना।...
गाँधीजी के पत्र नेहरू के नाम – 25 अप्रैल, 1925
25 अप्रैल, 1925
प्रिय जवाहरलाल,
मैं तीथल में हैं। यह जगह कुछ-कुछ जुहु जैसी है। यहाँ मैं बंगाल की अग्नि-परीक्षा के लिए तैयार होने को चार...
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का पत्र – जयप्रकाश नारायण को
मान्यवर जयप्रकाशजी!
प्रणाम।
मानवीय गुणों पर जोर देते हुए आपने अभी हाल में जो बयान दिया है उसकी कतरन मैंने पास रख ली है और उसे...
शिक्षक को पत्र
'शिक्षक को पत्र' - अब्राहम लिंकन
सम्माननीय सर...
मैं जानता हूँ कि इस दुनिया में सारे लोग अच्छे और सच्चे नहीं हैं। यह बात मेरे...














