Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Doodhnath Singh

सारे काम निपटाकर तुम्हें याद करने बैठा

सारे काम निपटाकर तुम्हें याद करने बैठा। फ़ुर्सत ही नहीं देते लोग तुम्हारे चेहरे पर नज़र टिकायी नहीं कि कोई आ गया 'क्या कर रहे हैं?' 'कुछ भी तो...
Rose, Love, Flower

स्मृतियों की धूप

'Smritiyon Ki Dhoop', a poem by Mridula Singh ऑटो के पीछे हिलते हुए पोस्टर की तरह तुम्हारा प्रेम समय की दहलीज़ पर डगमगाता-सा है तुम्हें पता है कि इससे विलग करती...

तुमसे उद्भव मेरा

'Tumse Udbhav Mera', a poem by Santwana Shrikant मैंने तुमसे प्रेम किया बैचैन हुई, नींद त्यागी, तुम्हें जो पसन्द था, उसे पसन्द किया, आख़िर में मेरे पास कुछ नहीं बचा मेरा। और तुम...
Agyeya

औपन्यासिक

'Aupanyaasik', a poem by Agyeya मैंने कहा : अपनी मनःस्थिति मैं बता नहीं सकता। पर अगर अपने को उपन्यास का चरित्र बताता, तो इस समय अपने को एक...
Gaurav Bharti

गौरव भारती की कविताएँ

Poems: Gaurav Bharti गुमशुदगी से ठीक पहले शहर मुझे दीमक सा खाए जा रहा है मैं लगातार ख़ुद को बचाने की नाकाम कोशिश में जुटा हूँ गणित ने ज़िन्दगी के...
Harivansh Rai Bachchan

रात आधी खींचकर मेरी हथेली

रात आधी, खींचकर मेरी हथेली, एक उँगली से लिखा था 'प्यार' तुमने। फ़ासला था कुछ हमारे बिस्तरों में और चारों ओर दुनिया सो रही थी, तारिकाएँ ही...
Poonam Sonchhatra

मीठी पीड़ा

'Meethi Peeda', a poem by Poonam Sonchhatra मैं प्रेम में थी या प्रेम मुझमें था... अमावस की काली रात में भी झर-झर झरती रही शरद पूनम की शुभ्र चाँदनी मैंने...
Dushyant Kumar

प्रेरणा के नाम

तुम्हें याद होगा प्रिय जब तुमने आँख का इशारा किया था तब मैंने हवाओं की बागडोर मोड़ी थीं, ख़ाक में मिलाया था पहाड़ों को, शीश पर बनाया था एक...
Aaradhna Joshi

आराधना जोशी की कविताएँ

Poems: Aaradhana Joshi वो दोस्त है उसका दिन के उजाले अब उसे नहीं भाते वो प्रतीक्षा करती है सूरज के डूबने का दिनभर मन कुमलाया सा रहता है ईश्वर...
Rahul Boyal

जीतता तो प्रेम ही है

'Jeetata Toh Prem Hi Hai', a poem by Rahul Boyal तुम्हें विस्मृत कर देने के मेरे सब प्रयास और केवल स्वयं के ही रह जाने का...
Poonam Sonchhatra

कशमकश

क्षितिज पर डूबते तारे-सा है हमारा प्रेम मैंने मुस्कुराहटों की एक गुल्लक बनायी थी और तुमसे मिलने के ठीक पहले ही उसे तोड़ा था तुम्हें नहीं मालूम, लेकिन उधार...

आमद

'Aamad', a poem by Niki Pushkar इतने बेखटके आने का प्रयोजन...? कोई सम्बोधन, एक पुकार तो लगाते इतनी चुप आमद पर कोई कैसे सतर्क होता मुझे ज़रा भी भान न...
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