Read here the best Hindi Love Poems and Stories
Tag: प्रेम
प्रेम
'Prem', Hindi Kavita by Deepak Jaiswal
पृथ्वी किसी शेषनाग के
फन पर नहीं टिकी
न ही लगाती है परिक्रमा
किसी तारे की
प्रेम ही वह धुरी है
जिसके भीतर साँस...
चाँद की मानिन्द चाँद
'Chand Ki Manind Chand', Hindi Kavita by Rahul Boyal
समय के शरीर पर लुढ़कती साँझ में
मुलायम ख़्वाहिशों सी चहलक़दमी करते हुए
लिए हाथ में प्याला चाय...
प्रेम विकृति नहीं
'Prem Vikriti Nahi', a poem by Ruchi
जब मैंने कहा मुझे प्रेम करना पसन्द है
तो किसी ने बदचलन समझा,
किसी को आसानी से उपलब्ध समझ में...
प्रेम अप्रेम
'Prem Aprem', a poem by Rupam Mishra
ठिठक जाती हूँ! देखकर उस दरीचे को
जिसे कभी अनजाने में खोल बैठी थी
ध्यान से देखा तो उस पर...
सर्दियाँ
'Sardiyaan', Hindi Kavita by Rakhi Singh
कवि ने कहा है-
'दुनिया को
हाँथ की तरह गर्म और सुन्दर होना चाहिए।'
मेरा उनसे क्षमा माँगने का मन है
अभी कल ही...
प्रेम का अपवर्तनांक
'Prem Ka Apavartnaank', a poem by Mukesh Kumar Sinha
नज़रें सीधी रेखा में कर रही थीं गमन
कुछ ऐसा जैसे घोड़े की नज़रों को रखा जाता हो...
प्रेमसिक्त अक्टूबर
'Premsikt October', a poem by Mukesh Kumar Sinha
कुछ दिनों पहले ही तो
हमने मँगवाया था
ख़ुशियों भरा सितम्बर
पर, इस सितम्बर की गर्मी को धता बताकर
अब आने...
परिभाषा पीड़ की
तुम्हारी व्यस्तताओं का मैं हुआ अभ्यस्त
रह गया हूँ केवल एक सरन्ध्र हृदय का स्वामी
जिससे रित रही हैं प्रतिपल तुम्हारे लौटने की आशाएँ
और भर रही...
प्रेम के वंशज
'Prem Ke Vanshaj', Hindi Kavita by Manjula Bist
अब तलक
प्रेम को तमाम प्रेमिल कविताओं ने नहीं,
बल्कि प्रेम को उस एक कविता ने बचाया है
जो या...
बातों का प्रेम
अनेक स्तर थे प्रेम के
और उतने ही रूप
मैंने समय के साथ यह जाना कि
पति, परमेश्वर नहीं होता
वह एक साथी होता है
सबसे प्यारा, सबसे महत्त्वपूर्ण...
इधर दो दिन लगातार
इधर दो दिन लगातार तुमसे मिलने के बाद
लगा
कि हमारे अचानक-बँधे सम्बन्धों में
मीठी नरम घास उगने लगी है।
यह लगने लगा
कि
इसकी ठण्डी हरियाली ही थी
वह—
जिसके लिए...
पात्रता
'Paatrata', Hindi Kavita by Rupam Mishra
प्रतिदिन उदास मन से विदा दे आती हूँ
उस अरीति से चलकर आए प्रेम को!
कि जाओ जहाँ तुम्हें तुम्हारा प्रतिदान मिले!
पर...









