Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Locked Door

ख़ाली मुलाक़ात

'Khali Mulaqat', a poem by Rag Ranjan हम एक अनजान रास्ते पर ख़ूब चले हम चलते-चलते सहसा रुके और एक-दूसरे से पूछा- हम भाग रहे हैं कहीं से या...
Shweta Rai

दूरियाँ

'Dooriyan', poems by Shweta Rai 1 आगे बढ़ जाने से ज़्यादा दुरूह होता है पीछे मुड़कर न देखना ज़रा-सी शिथिल होती देह में उग आता है बीमार मन जो जानता...

प्रेम अगर

यह कविता यहाँ सुनें: https://youtu.be/beJ4eGER7JI प्रेम अगर दिखायी देता तो वो किसी फूल की तरह दिखता जिसमें होता मधु या बनता जिससे इत्र किसी पंछी की तरह दिखता जिसे सरहदों से...
Flower Rose behind a curtain, Love

प्रेम शृंखला

'Prem Shrinkhla', a poem by Ruchi मेरे पहले प्रेमी ने मुझे ख़त देते हुए कहा, "मैंने यह ख़त अपने ख़ून से लिखा है", रूह काँप गयी मेरी, कोई रुझान न...
Vishnu Khare

परस्पर

साथ का आख़िर यह भी कैसा मक़ाम कि आलिंगन और चुम्बन तक से अटपटा लगने लगे ऐसे और बाक़ी शब्द भी अतिशयोक्ति मालूम हों इसलिए उन्हें एकांत किसी...
Middle Age Love, Couple walking holding hands on railway tracks

गूँगे का गुड़

'Goonge Ka Gud', a poem by Niki Pushkar पकी देह में कच्चा मन रहता है, संकोच, लिहाज़, मर्यादा सब के सब योग्यता की परीक्षा पर प्रतिपल तत्पर बैठे होते हैं, वाणी बन्दी...
Couple, Rebel, Sensual, Love, Two hands, Red

प्रेम में

'Prem Mein', a poem by Vikrant Mishra प्रेम में होते हुए मैं और तुम, एक आयत के भीतर उसकी चारों भुजाओं को छूता एक वृत्त खींचने की कोशिश करते...
Shweta Rai

धरती के सबसे प्यारे भूखण्ड हो तुम

'Dharti Ke Sabse Pyare Bhookhand Ho Tum', prose in Hindi by Shweta Rai आजकल मन की यात्रा पर हूँ। इस आयोजन के पीछे प्रयोजन यह...
Pallavi Vinod

मेरी कल्पनाओं की तितलियाँ

'Meri Kalpnaaon Ki Titliyaan', a poem by Pallavi Vinod. मेरी कल्पनाओं की तितलियाँ जिन्हें तुम्हारा साथ एक सुंदर उपवन सा आकृष्ट करता है वो बैठना चाहती हैं तुम्हारे...
Rahul Boyal

वास्तु, स्वप्न और प्रेम

'Vastu, Swapn Aur Prem', Hindi Kavita by Rahul Boyal अपने घर का दरवाज़ा पूरब की ओर खुलता है मुझे सूरज इसी दरवाज़े पर मिलता है रोज़ जब...
Rakhi Singh

अव्यक्त अभिव्यक्ति

'Avyakt Abhivyakti', Hindi Kavita by Rakhi Singh कुछ प्रेयसियाँ अपने संकोच और अहम के केंचुल से निकलना नहीं चाहतीं और ये भी चाहती हैं कि प्रेयस उस खोल...
Flowers, Rose, Love

प्रेम

'Prem', a poem by Anjana Tandon प्रेम अकेलेपन की उपज नहीं किसी आकर्षण का दस्तावेज़ भी नहीं, जैसे उबाऊ दुपहरी में टूटे आइने का टुकड़ा ले आहते में सूरज पकड़ता बच्चा, पुलक इस...
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