Read here the best Hindi Love Poems and Stories
Tag: प्रेम
फूलवाली
फूल सी हो फूलवाली!
किस सुमन की साँस तुमने
आज अनजाने चुरा ली!
जब प्रभा की रेख दिनकर ने
गगन के बीच खींची,
तब तुम्हीं ने भर मधुर मुस्कान
कलियाँ सरस...
तुम्हारे साथ रहकर
'Tumhare Sath Rehkar', a poem by Sarveshwar Dayal Saxena
तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है
कि दिशाएँ पास आ गयी हैं,
हर रास्ता छोटा हो...
अपमान
'Apmaan', a story by Kamla Chaudhary
"भैया, क्या खुर्जा जा रहे हो?"
"हूँ, दशहरे की छुट्टियाँ मौसी ही के पास व्यतीत करूंगा। उन्हें मुझसे बहुत शिकायत...
ज़बानों का बोसा
ज़बानों के रस में ये कैसी महक है
ये बोसा कि जिससे मोहब्बत की सहबा की उड़ती है ख़ुश्बू
ये बद-मस्त ख़ुश्बू जो गहरा ग़ुनूदा नशा...
स्पर्श
'Sparsh', poems by Shweta Rai
1
पूस की तिमिर नीरव निशा में,
जलते दीये से मिलती ऊष्मा जैसा था तुम्हारा स्पर्श
जिसकी गर्माहट
आज भी घेरे हुए है मुझे
मौसम...
शबाना कलीम अव्वल की नज़्में
Poems by Shabana Kaleem Awwal
बाप
उदास शाम को बाँहों में भरकर
बुज़ुर्ग बाप के चेहरे को हाथों में भर लूँ
चूम लू उनको बेसाख़्ता
उन रोशनियों के एवज़...
स्वांग
'Swang', a poem by Nidhi Agarwal
पुरुष एक कहता है-
"तुम कितनी सुंदर हो!"
वे मुस्कुराती हैं
और कहती हैं-
"तुम्हारी आँखों जितनी!"
पुरुष दो कहता है-
"तुम से ही जीवन...
पूर्व प्रेमिका और बेंच पर दोनों नाम
'Poorv Premika Aur Bench Par Dono Naam', a poem by Usha Dashora
अनुप्रास अलंकार की
कहानी थी वो
एक ही वर्ण की काव्यमयी आवृत्ति
बार-बार हो जैसे
सेब को...
छज्जे पर टँगा प्रेम
'Chhajje Par Tanga Prem', a poem by Poonam Sonchhatra
टाँग रक्खे हैं
बहुत से सुख-दुःख हमने छज्जे पर
कुछ बातें केवल इसलिए होती हैं
कि उन्हें छज्जे पर...
सशर्त प्रेम
'Sashart Prem', Hindi Kavita by Rakhi Singh
मेरे प्रेम में पड़ने की जितनी उत्सुकता है तुम में
मुझे शंका है
मेरी स्वीकार्यता के उपरांत
तुम उतने प्रसन्न रह...
तुमसे प्रेम करते हुए
'Tumse Prem Karte Hue', a poem by Rupam Mishra
प्रेम में नहीं बनना था मुझे कभी भी
तुम्हारी पहली और आख़िरी प्रेमिका!
मैंने तुमसे प्रेम करते हुए
तुम्हारी सारी...
सयानों को सुलभ ही नहीं प्रेम
Poems: Nidhi Agarwal
मैं तुम और वो
मैं तुम्हारे प्रेम में थी
तुम मेरे प्रेम में,
और एक 'वह' भी
तुम्हारे प्रेम में थी।
आह, मैं मिली तुमसे
जब सीख चुकी...











