Read here the best Hindi Love Poems and Stories
Tag: प्रेम
मुरदों का गाँव
'Murdon Ka Gaon', a story by Dharamveer Bharti
उस गाँव के बारे में अजीब अफवाहें फैली थीं। लोग कहते थे कि वहाँ दिन में भी...
तुमने क्यों कहा था, मैं सुन्दर हूँ
"अच्छा, हमारा एक फ़ोटो बना दीजिये।" — माया ने सकुचाते हुए कह डाला।
निगम को बहुत अच्छा लगा। "वाह, ज़रूर" — उसने आश्वासन दिया।
माया से...
मैं चाहती हूँ
'Main Chahti Hoon', a poem by Harshita Panchariya
मैं चाहती हूँ तुम
मुझे ऐसे चूमो
जैसे चूमती है हवा
फूलों को
और बिखेर देती है
अपनी गंध।
मैं चाहती हूँ तुम
मुझे...
तुम्हारी आँखें
'Tumhari Aankhein', Hindi Kavita by Harshita Panchariya
1
मैं कुछ गहरा पढ़ना चाहती थी
और मैंने पढ़ ली
तुम्हारी आँखें।
2
तुम्हारी आँखें
संसार की सबसे
सुंदर भाषा बोलती हैं
पर
उसका कोई अनुवादक...
न्यूटन का तीसरा नियम
'Newton Ka Teesra Niyam', a poem by Anamika Anu
तुम मेरे लिए शरीर मात्र थे
क्योंकि मुझे भी तुमने यही महसूस कराया।
मैं तुम्हारे लिए आसक्ति थी,
तो...
आत्ममुग्ध
'Aatmmugdh', a poem by Rakhi Singh
फूल जो सबसे सुन्दर हो
मैं उसे नहीं तोड़ती
अपनी लिखी सबसे निकटतम चिट्ठी
कभी नहीं डाली डाक में
अब तक की अपनी सबसे प्रिय कविता
नहीं...
मैं तुझे फिर मिलूँगी
'Main Tujhe Phir Milungi', a poem by Amrita Pritam
मैं तुझे फिर मिलूँगी
कहाँ कैसे पता नहीं
शायद तेरी कल्पनाओं
की प्रेरणा बन
तेरे केनवास पर उतरुँगी
या तेरे केनवास पर
एक...
कुछ घनिष्ठ सम्बन्ध
'Kuchh Ghanishth Sambandh', poems by Ruchi
1
कुछ घनिष्ठ सम्बन्धों में अनायास उतर आती है
शनैः शनैः अस्थायी उदासीनता,
सम्बन्धों की नीरवता चीख़ उठती है कभी-कभी,
ऊहापोह में गुज़रते हैं,...
यदि मैं कहूँ
'Yadi Main Kahoon', a poem by Shailendra
यदि मैं कहूँ कि तुम बिन मानिनि
व्यर्थ ज़िन्दगी होगी मेरी,
नहीं हँसेगा चाँद हमेशा
बनी रहेगी घनी अंधेरी,
बोलो, तुम विश्वास करोगी?
यदि...
रंगपथ से परे रंग
'Rangpath Se Pare Rang', a poem by Dharmpal Mahendra Jain
बंद आँखों के भीतर
घने अंधेरे में
जब तुम आती हो
बहुत सारे रंग आते हैं तुम्हारे साथ
ख़ुशमिज़ाज
इंद्रधनुष...
आप उसे फ़ोन करें
'Aap Use Phone Karein', a poem by Badrinarayan
आप उसे फ़ोन करें
तो कोई ज़रूरी नहीं कि
उसका फ़ोन ख़ाली हो
हो सकता है उस वक़्त
वह चाँद से...
निषेध है वामांगिनी का प्रेयसी होना
'Nishedh Hai Vamangini Ka Preyasi Hona', by Nidhi Agarwal
अनपढ़
तुमने क्या लिखा
और मैंने
क्या पढ़ लिया
अनपढ़ दिल ने
चिर वेदना से...
आँचल ये भर लिया।
शंका
तुम्हें खोने के डर...









