Tag: Vijay Rahi
जेल
'Jail', a poem by Vijay Rahi
मैं जानता था
पर कितना कम जानता था
कि जेल सिर्फ़ एक कोठरी का नाम है।
बचपन में गाँव के
हमारे जैसे बच्चों...
चीलगाड़ी
'Cheelgaadi', a poem by Vijay Rahi
आंटे-सांटे में हुई थी उसकी सगाई
दूज वर के साथ
हालाँकि ख़ूब जोड़े थे उसने माँ-बाप के हाथ।
जब ब्याह नज़दीक आया
और...
किसी से इश्क़ करना चाहिए था
किसी से इश़्क करना चाहिए था
मुझे हद से गुज़रना चाहिए था
वो आँखों में उतरकर रह गया है
जिसे दिल में उतरना चाहिए था
मुहब्बत पाके भी...
जिस तरह आती हो तुम
'Jis Tarah Aati Ho Tum', a poem by Vijay Rahi
जिस तरह आती हो तुम
अपने इस पागल कवि से मिलने
रोज़-रोज़।
जब मिलती हो, ख़ूब मिलती हो,
बाथ...
बारिश के बाद
'Barish Ke Baad', a poem by Vijay Rahi
बारिश के बाद
बबूल के पेड़ के नीचे से
अपनी बकरियों को हाँक
वह मुझसे मिलने आई।
दूर नीम के पेड़...
प्रेम बहुत मासूम होता है
'Prem Bahut Masoom Hota Hai', a poem by Vijay Rahi
प्रेम बहुत मासूम होता है
यह होता है बिल्कुल उस बच्चे की तरह
टूटा है जिसका दूध...
आँधी
'Aandhi', Hindi Kavita by Vijay Rahi
बचपन में एक गीत सुना था
हमने काकी के मुँह से...
"आँधी आई मेह आयो,
बड़ी बुआ को जेठ आयो"
वास्तव में ये...
रोना
'Rona', a poem by Vijay Rahi
बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं
मर्द का रोना अच्छा नहीं
अस्ल वजह क्या है
मैं कभी नहीं जान पाया
मगर मैं ख़ूब रोने वाला आदमी...
एक-दूजे के हिस्से का प्यार
'Ek-Dooje Ke Hisse Ka Pyar', a poem by Vijay Rahi
एक समय था
जब दोनों का सब साझा था
सुख, दुःख,
हँसना, रोना,
नींद, सपने
या और कोई भी
ऐसी-वैसी बात।
कुछ...
बारिश और माँ
'Barish Aur Maa', Hindi Kavita by Vijay Rahi
जब बारिश होती है
सब कुछ रुक जाता है
सिर्फ़ बारिश होती है
रुक जाता है बच्चों का रोना
चले जाते हैं...





