Tag: World Literature

Heinrich Heine

हेनरिक हाइन

हेनरिक हाइन के उद्धरण | Heinrich Heine Quotes in Hindi अनुवाद: पुनीत कुसुम   "निस्संदेह भगवान मुझे माफ़ कर देगा। यह उसका काम है।"   "अनुभव एक अच्छा स्कूल है, पर...
My Name Is Red - Quotes in Hindi - Orhan Pamuk

ओरहान पामुक – ‘My Name Is Red’

"मैं पेड़ नहीं बनना चाहता, मैं पेड़ का मतलब होना चाहता हूँ।"   "बताओ तो फिर, प्रेम में इंसान मूर्ख हो जाता है या केवल मूर्ख...
Rainer Maria Rilke

निष्ठा

अनुवाद: धर्मवीर भारती मेरी आँखें निकाल दो फिर भी मैं तुम्हें देख लूँगा मेरे कानों में सीसा उड़ेल दो पर तुम्हारी आवाज़ मुझ तक पहुँचेगी पगहीन मैं तुम तक...

मैं तुम्हें प्यार करता हूँ

मैं तुम्हें प्यार करता हूँ इसलिए नहीं कि तुम ऐसी हो अपितु इसलिए कि मैं ऐसा बन जाता हूँ जब मैं तुम्हारे साथ होता हूँ मैं तुम्हें प्यार...
Ruskin Bond

रस्किन बॉण्ड

रस्किन बॉण्ड के उद्धरण | Ruskin Bond Quotes in Hindi अनुवाद: पुनीत कुसुम "युवा प्रेमियों के लिए लाल गुलाब। पुराने रिश्तों के लिए फ़्रेंच बीन्स।"   "प्रेम जो मृत्यु...
Gabriel García Márquez

दुनिया के सबसे ख़ूबसूरत आदमी का डूबना

"उन्होंने उस जितना लंबा, शक्तिशाली, साहसी, और सुंदर आदमी कभी नहीं देखा था, हालाँकि वे उसे देख रहे थे, वे उसके बारे में कल्पना नहीं कर पा रहे थे।"

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Gaurav Bharti

कविताएँ: अक्टूबर 2020

किसी रोज़ किसी रोज़ हाँ, किसी रोज़ मैं वापस आऊँगा ज़रूर अपने मौसम के साथ तुम देखना मुझ पर खिले होंगे फूल उगी होंगी हरी पत्तियाँ लदे होंगे फल मैं सीखकर आऊँगा चिड़ियों की...
Asangghosh

‘अब मैं साँस ले रहा हूँ’ से कविताएँ

'अब मैं साँस ले रहा हूँ' से कविताएँ स्वानुभूति मैं लिखता हूँ आपबीती पर कविता जिसे पढ़ते ही तुम तपाक से कह देते हो कि कविता में कल्पनाओं को कवि ने...
Meena Kumari

चाँद तन्हा है, आसमाँ तन्हा

चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा दिल मिला है कहाँ-कहाँ तन्हा बुझ गई आस, छुप गया तारा थरथराता रहा धुआँ तन्हा ज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं जिस्म तन्हा है...
Bolna Hi Hai - Ravish Kumar

प्रेम की कोई जगह

रवीश कुमार की किताब 'बोलना ही है' से हर कोई इश्क़ में नहीं होता है और न हर किसी में इश्क़ करने का साहस होता...
Woman walking on street

माँ के हिस्से की आधी नींद

माँ भोर में उठती है कि माँ के उठने से भोर होती है ये हम कभी नहीं जान पाए बरामदे के घोंसले में बच्चों संग चहचहाती गौरैया माँ को...
Leaf, Autumn, Plant

अक्टूबर

यह अक्टूबर फिर से बीतने को है साल-दर-साल इस महीने के साथ तुम बीत जाती हो एक बार पूरा बीतकर भी फिर वहीं से शुरू हो जाता है...
Dagh Dehalvi

ले चला जान मेरी

ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा अपने दिल को भी बताऊँ न ठिकाना तेरा सब ने...
Woman doing home chores

एक इन्टरव्यू

मैंने बच्चे को नहलाती खाना पकाती कपड़े धोती औरत से पूछा— 'सुना तुमने पैंतीस साल हो गए देश को आज़ाद हुए?' उसने कहा 'अच्छा'... फिर 'पैंतीस साल' दोहराकर आँगन बुहारने लगी दफ़्तर जाती...
Kailash Gautam

कल से डोरे डाल रहा है

कल से डोरे डाल रहा है फागुन बीच सिवान में, रहना मुश्किल हो जाएगा प्यारे बंद मकान में। भीतर से खिड़कियाँ खुलेंगी बौर आम के महकेंगे, आँच पलाशों पर आएगी सुलगेंगे...
Suresh Jinagal

सुरेश जिनागल की कविताएँ: अक्टूबर 2020

ललेश्वरी बर्फ़ का सीना चीरकर उगे चिनार के नीचे बैठकर आग का कोई गीत गाती स्त्री सदियों की बर्फ़ को पिघला रही है उसकी ज़िद, उसका साहस...
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