न किसी की आँख का नूर हूँ
न किसी की आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ
जो किसी के काम न आ सके मैं वह एक मुश्तेग़ुबार...
हिंदू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िए
हिंदू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िए
अपनी कुरसी के लिए जज़्बात को मत छेड़िए
हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है
दफ़्न है जो...
उसी की देखी हुकूमत भी हुक्मरानों पर
'Usi Ki Dekhi Hukumat Bhi',
a ghazal by Chitransh Khare
उसी की देखी हुकूमत भी हुक्मरानों पर
वही ख़ुदा है जो बैठा है आसमानों पर
इन हादसों पे...
वो बात जिस से ये डर था खुली तो जाँ लेगी
वो बात जिस से ये डर था खुली तो जाँ लेगी
सो अब ये देखिए जा के वो दम कहाँ लेगी
मिलेगी जलने से फ़ुर्सत हमें...
मज़े इश्क़ के कुछ वही जानते हैं
मज़े इश्क़ के कुछ वही जानते हैं
कि जो मौत को ज़िंदगी जानते हैं
शब-ए-वस्ल लीं उन की इतनी बलाएँ
कि हमदम मिरे हाथ ही जानते हैं
न...
हम सोचते हैं रात में तारों को देखकर
हम सोचते हैं रात में तारों को देखकर
शमएँ ज़मीन की हैं जो दाग़ आसमाँ के हैं
जन्नत में ख़ाक बादा-परस्तों का दिल लगे
नक़्शे नज़र में...
यूँही वाबस्तगी नहीं होती
यूँही वाबस्तगी नहीं होती
दूर से दोस्ती नहीं होती
जब दिलों में ग़ुबार होता है
ढंग से बात भी नहीं होती
चाँद का हुस्न भी ज़मीन से है
चाँद...
दिल की मेरी बेक़रारी
दिल की मेरी बेक़रारी मुझ से कुछ पूछो नहीं
शब की मेरी आह-ओ-ज़ारी मुझ से कुछ पूछो नहीं
बार-ए-ग़म से मुझ पे रोज़-ए-हिज्र में इक-इक घड़ी
क्या...
दर्द-ए-दिल में कमी न हो जाए
दर्द-ए-दिल में कमी न हो जाए
दोस्ती दुश्मनी न हो जाए
तुम मिरी दोस्ती का दम न भरो
आसमाँ मुद्दई न हो जाए
बैठता है हमेशा रिंदों में
कहीं...
ये दाढ़ियाँ, ये तिलक-धारियाँ नहीं चलतीं
ये दाढ़ियाँ, ये तिलक धारियाँ नहीं चलतीं
हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं
क़बीले वालों के दिल जोड़िए मेरे सरदार
सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं
बुरा...
सूफ़ियों में हूँ न रिन्दों में, न मयख़्वारों में हूँ
सूफ़ियों में हूँ न रिन्दों में, न मयख़्वारों में हूँ,
ऐ बुतो, बन्दा ख़ुदा का हूँ, गुनहगारों में हूँ!
मेरी मिल्लत है मुहब्बत, मेरा मज़हब इश्क़...
इन्क़िलाब आया, नई दुन्या, नया हंगामा है
इन्क़िलाब आया, नई दुन्या, नया हंगामा है
इन्क़िलाब आया, नई दुन्या, नया हंगामा है
शाहनामा हो चुका, अब दौरे गांधीनामा है।
दीद के क़ाबिल अब उस उल्लू...















