Tag: Death
अभी नहीं
ठहरो अभी तुम्हारे मरने का वक़्त नहीं आया है
गले में फँसी हुई रस्सी को खोल दो
देखो, अभी भी खिड़की के बाहर
खुली हुई हवा है
इसमें...
मृत्युंजय
जीवन नहीं देखता
रंग-रूप, जात-पात
धरती के हृदय से
कई फूल खिलते हैं!
कुछ मुरझाए फूलों को भी
धरती दाना-पानी देती है,
हवा नहीं रुकती किसी पर
आक्रोशित होकर,
वर्षा होती ही...
घुँघरू परमार की कविताएँ
शीर्षासन
देश, जो कि हमारा ही है
इन दिनों
शीर्षासन में है।
इसे सीधा देखना है तो
आपको उल्टा होना होगा।
माथे में बारूद घुमड़ता रहता अक्सर
आधे हाथ नीचे धंसे...
मृत्यु-दर्शन
घुमक्कड़ की दुनिया में भय का नाम नहीं है, फिर मृत्यु की बात कहना यहाँ अप्रासंगिक-सा मालूम होगा। तो भी मृत्यु एक रहस्य है,...
क्षणिकाएँ : कैलाश वाजपेयी
स्पन्दन
कविता हर आदमी
अपनी
समझ-भर समझता है
ईश्वर एक कविता है!
मोमिन
पूजाघर पहले भी होते थे,
हत्याघर भी
पहले होते थे
हमने यही प्रगति की है
दोनों को एक में मिला दिया।
आदिम...
कुमार मंगलम की कविताएँ
रात के आठ बजे
मैं सो रहा था उस वक़्त
बहुत बेहिसाब आदमी हूँ
सोने-जगने-खाने-पीने
का कोई नियत वक़्त नहीं है
ना ही वक़्त के अनुशासन में रहा हूँ कभी
मैं सो...
‘जीवन के दिन’ से कविताएँ
कविता संग्रह: 'जीवन के दिन' - प्रभात
चयन व प्रस्तुति: अमर दलपुरा
याद
मैं ज़मीन पर लेटा हुआ हूँ
पर बबूल का पेड़ नहीं है यहाँ
मुझे उसकी याद...
कितने दिन और बचे हैं?
कोई नहीं जानता कि
कितने दिन और बचे हैं?
चोंच में दाने दबाए
अपने घोंसले की ओर
उड़ती चिड़िया कब सुस्ताने बैठ जाएगी
बिजली के एक तार पर और
आल्हाद...
मृत्युदण्ड
1)
यदि आप कटिबद्ध हैं
या मजबूर हो चुके हैं
एक इंसान को बग़ैर कोई सुबूत छोड़े
मारने के लिए
तो
आप ज़्यादा कुछ न करें
बस ...उसकी जड़ें हिलाते चले जाएँ
देखना!
ऐसा...
मौत का ताण्डव
1985 में देहरादून में काम करते समय ओमप्रकाश वाल्मीकि के आँखों के सामने कुछ मज़दूरों की मौत हो गयी थी, जिसके बाद फ़ैक्ट्री, इंजीनियर...
मौत कभी ख़त्म नहीं होती
'Maut Kabhi Khatm Nahi Hoti', a poem by Pratima Singh
मौत ज़िन्दा रहती है हमेशा
मोर्चरी के बाहर पहरा देते
दढ़ियल की आँखों में,
उसे फ़र्क़ नहीं पड़ता
कौन आया है...
वहम
'Weham', a poem by Vijay Rahi
मैंने जब-जब मृत्यु के बारे में सोचा
कुछ चेहरे मेरे सामने आ गये
जिन्हें मुझसे बेहद मुहब्बत है।
हालाँकि यह मेरा एक...










