Ignou MA Hindi Study Material, Ignou MA Hindi, Ignou Hindi, Ignou Upanyaas evam Kahani. Read here the literature pieces from the syllabus of Ignou MA Hindi.
Tag: IGNOU MA Hindi Study Material (MHD)
चुनौती
तुमने चुरा लिए
हमारे विकास के रास्ते
शिक्षा पर लगा दिए प्रतिबंध
आखर पर आज रख दी है तुमने
हमारी भागीदारी के लिए
योग्यता की शर्त
पर कब तक फेकोगे...
मैं नीर भरी दु:ख की बदली
विरह में भी आनन्द और ऐसा कि पग-पग में भी संगीत बज उठे, महादेवी वर्मा की कविताओं में ही मिल सकता है! :)
माँ! मैं भला कि मेरा भाई?
अनुवादः साहिल परमार तथा फूलचंद गुप्ता
तुम्हारी चमर कौं-कौं से मैं तंग आ गई
तुमने तो राग बिना ही नौटंकी कर रखी है
तुम्हारे बाबा क्या गए
तुमने...
मैं अकेला
मैं अकेला;
देखता हूँ, आ रही
मेरे दिवस की सान्ध्य बेला।
पके आधे बाल मेरे
हुए निष्प्रभ गाल मेरे,
चाल मेरी मन्द होती आ रही,
हट रहा मेला।
जानता हूँ, नदी-झरने
जो...
यह दीप अकेला
यह दीप अकेला स्नेह भरा
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो।
यह जन है : गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गायेगा?
पनडुब्बा : ये...
एक जीता-जागता व्यक्ति
एक चिड़िया रास्ते में तारकोल की कीचड़ में फँसी हुई है और छूटने का भरसक प्रयास कर रही है.. क्या आप उसे उस कीचड़ में से छुड़ाएँगे या उसके खुद छूट जाने की प्रतीक्षा करेंगे?
घृणा तुम्हें मार सकती है
चाहे संकीर्ण कहो या पूर्वाग्रही
मैं जिस टीस को बरसों-बरस
सहता रहा हूँ
अपनी त्वचा पर
सुई की चुभन जैसे,
उसका स्वाद एक बार चखकर देखो
हिल जाएगा पाँव तले...
बायोडाटा
"एक ओर तो संतान किसी अदृश्य नली से माँ का खून पी रही थी और दूसरी ओर पिता के हाथ में एक संतरा था, जिसमें बड़ा रस था!"
पढ़िए अखिलेश की कहानी 'बायोडाटा', जिसमें राजनीती केवल एक रोजगार है और सम्बन्ध, प्रेम, दुःख.. सभी बायोडाटा में होने वाले कुछ एडिशन्स भर!
भटका मेघ
भटक गया हूँ—
मैं असाढ़ का पहला बादल!
श्वेत फूल-सी अलका की
मैं पंखुरियों तक छू न सका हूँ!
किसी शाप से शप्त हुआ
दिग्भ्रमित हुआ हूँ।
शताब्दियों के अंतराल...
तलाश
यह धर्म का कौन सा गुण है जो हमारे किरायदार तक के यहाँ काम करने वालों या खाना बनाने वालों की जाति से भी भंग हो जाता है?
सच यही है
'Sach Yahi Hai', a poem by Mohandas Naimishrai
सच यही है
मंदिर में आरती गाते हुए भी
नज़दीक की
मस्जिद तोड़ने की लालसा
हमारे भीतर जागती रहती है
और मस्जिद में...
कालिदास
कालिदास, सच-सच बतलाना!
इन्दुमती के मृत्युशोक से
अज रोया या तुम रोये थे?
कालिदास, सच-सच बतलाना!
शिवजी की तीसरी आँख से
निकली हुई महाज्वाला में
घृत-मिश्रित सूखी समिधा-सम
कामदेव जब भस्म...









