Tag: Metered Verses
सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता
सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता
निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता आहिस्ता
जवाँ होने लगे जब वो तो हमसे कर लिया पर्दा
हया यकलख़्त...
मेरा नया बचपन
बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी
गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी
चिंता-रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद
कैसे भूला जा...
एक दोस्त की ख़ुश-मज़ाक़ी पर
"क्या तिरी नज़रों में ये रंगीनियाँ भाती नहीं
क्या हवा-ए-सर्द तेरे दिल को तड़पाती नहीं
क्या नहीं होती तुझे महसूस मुझ को सच बता
तेज़ झोंकों में हवा के गुनगुनाने की सदा..."
ज़ुल्फ़ जो रुख़ पर तिरे ऐ मेहर-ए-तलअत खुल गई
ज़ुल्फ़ जो रुख़ पर तिरे ऐ मेहर-ए-तलअत खुल गई
हम को अपनी तीरा-रोज़ी की हक़ीक़त खुल गई
क्या तमाशा है रग-ए-लैला में डूबा नीश्तर
फ़स्द-ए-मजनूँ बाइस-ए-जोश-ए-मोहब्बत खुल...
फिर आई फ़स्ल-ए-गुल फिर ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैं
फिर आई फ़स्ल-ए-गुल फिर ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैं
मगर दाग़-ए-जिगर पर सूरत-ए-लाला लहकते हैं
नसीहत है अबस नासेह बयाँ नाहक़ ही बकते हैं
जो बहके...
बंजारानामा
टुक हिर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा
क़ज़्ज़ाक़ अजल का लूटे है दिन रात बजा कर नक़्क़ारा
क्या बधिया भैंसा बैल शुतुर क्या...
कोयल
कुहू-कुहू किलकार सुरीली कोयल कूक मचाती है,
सिर और चोंच झुकाए डाल पर बैठी तान उड़ाती है।
एक डाल पर बैठ एक पल झट हवा से...
क्षितिज की ओढ़नी पर प्रीत का इतिहास लिखना था
क्षितिज की ओढ़नी पर प्रीत का इतिहास लिखना था
मुझे श्री कृष्ण के संग गोपियों का रास लिखना था
हृदय में जन्म लेती प्रीत का अहसास...
मिट्टी का दिया
झुटपुटे के वक़्त घर से एक मिट्टी का दिया
एक बुढ़िया ने सर-ए-रह ला के रौशन कर दिया
ताकि रह-गीर और परदेसी कहीं ठोकर न खाएँ
राह...
आँसू
मेरे पहलू में जो बह निकले तुम्हारे आँसू
बन गए शाम-ए-मोहब्बत के सितारे आँसू
देख सकता है भला कौन ये पारे आँसू
मेरी आँखों में न आ...
हिंदू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िए
हिंदू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िए
अपनी कुरसी के लिए जज़्बात को मत छेड़िए
हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है
दफ़्न है जो...
मजबूरियाँ
मैं आहें भर नहीं सकता कि नग़्मे गा नहीं सकता
सकूँ लेकिन मिरे दिल को मयस्सर आ नहीं सकता
कोई नग़्मे तो क्या अब मुझसे मेरा...










