Tag: Metered Verses

Ameer Minai

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता आहिस्ता जवाँ होने लगे जब वो तो हमसे कर लिया पर्दा हया यकलख़्त...
Subhadra Kumari Chauhan

मेरा नया बचपन

बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी चिंता-रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद कैसे भूला जा...
Majaz Lakhnavi

एक दोस्त की ख़ुश-मज़ाक़ी पर

"क्या तिरी नज़रों में ये रंगीनियाँ भाती नहीं क्या हवा-ए-सर्द तेरे दिल को तड़पाती नहीं क्या नहीं होती तुझे महसूस मुझ को सच बता तेज़ झोंकों में हवा के गुनगुनाने की सदा..."
Bahadur Shah Zafar

ज़ुल्फ़ जो रुख़ पर तिरे ऐ मेहर-ए-तलअत खुल गई

ज़ुल्फ़ जो रुख़ पर तिरे ऐ मेहर-ए-तलअत खुल गई हम को अपनी तीरा-रोज़ी की हक़ीक़त खुल गई क्या तमाशा है रग-ए-लैला में डूबा नीश्तर फ़स्द-ए-मजनूँ बाइस-ए-जोश-ए-मोहब्बत खुल...
bhartendu harishchandra

फिर आई फ़स्ल-ए-गुल फिर ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैं

फिर आई फ़स्ल-ए-गुल फिर ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैं मगर दाग़-ए-जिगर पर सूरत-ए-लाला लहकते हैं नसीहत है अबस नासेह बयाँ नाहक़ ही बकते हैं जो बहके...
Nazeer Akbarabadi

बंजारानामा

टुक हिर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ मत देस बिदेस फिरे मारा क़ज़्ज़ाक़ अजल का लूटे है दिन रात बजा कर नक़्क़ारा क्या बधिया भैंसा बैल शुतुर क्या...
Shridhar Pathak

कोयल

कुहू-कुहू किलकार सुरीली कोयल कूक मचाती है, सिर और चोंच झुकाए डाल पर बैठी तान उड़ाती है। एक डाल पर बैठ एक पल झट हवा से...
Chitransh Khare

क्षितिज की ओढ़नी पर प्रीत का इतिहास लिखना था

क्षितिज की ओढ़नी पर प्रीत का इतिहास लिखना था मुझे श्री कृष्ण के संग गोपियों का रास लिखना था हृदय में जन्म लेती प्रीत का अहसास...
Altaf Hussain Hali

मिट्टी का दिया

झुटपुटे के वक़्त घर से एक मिट्टी का दिया एक बुढ़िया ने सर-ए-रह ला के रौशन कर दिया ताकि रह-गीर और परदेसी कहीं ठोकर न खाएँ राह...
Akhtar Sheerani

आँसू

मेरे पहलू में जो बह निकले तुम्हारे आँसू बन गए शाम-ए-मोहब्बत के सितारे आँसू देख सकता है भला कौन ये पारे आँसू मेरी आँखों में न आ...
Adam Gondvi

हिंदू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िए

हिंदू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िए अपनी कुरसी के लिए जज़्बात को मत छेड़िए हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है दफ़्न है जो...
Majaz Lakhnavi

मजबूरियाँ

मैं आहें भर नहीं सकता कि नग़्मे गा नहीं सकता सकूँ लेकिन मिरे दिल को मयस्सर आ नहीं सकता कोई नग़्मे तो क्या अब मुझसे मेरा...
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