Tag: Sara Shagufta

Sara Shagufta

क़र्ज़

मेरा बाप नंगा था मैंने अपने कपड़े उतार उसे दे दिए ज़मीन भी नंगी थी मैंने उसे अपने मकान से दाग़ दिया शर्म भी नंगी थी, मैंने उसे अपनी...
Sara Shagufta

औरत और नमक

इज़्ज़त की बहुत-सी क़िस्में हैं घूँघट, थप्पड़, गन्दुम इज़्ज़त के ताबूत में क़ैद की मेख़ें ठोंकी गई हैं घर से लेकर फ़ुटपाथ तक हमारा नहीं इज़्ज़त हमारे गुज़ारे...
Sara Shagufta

मौत की तलाशी मत लो

बादलों में ही मेरी तो बारिश मर गई अभी-अभी बहुत ख़ुश-लिबास था वो मेरी ख़ता कर बैठा कोई जाए तो चली जाऊँ कोई आए तो रुख़्सत हो जाऊँ मेरे...
Sara Shagufta

परिंदे की आँख खुल जाती है

किसी परिंदे की रात पेड़ पर फड़फड़ाती है रात, पेड़ और परिंदा अँधेरे के ये तीनों राही एक सीध में आ खड़े होते हैं रात अँधेरे में फँस...
Sara Shagufta

शायद मिट्टी मुझे फिर पुकारे

सुन दरिया अपनी मुट्ठी खोल रहा है सुन कुछ पत्ते और पत्तों के साथ कुछ हवा उखड़ गई है जंगल के पेड़ इरादे ज़मीन को बोसा दे रहे हैं चाहते...
Sara Shagufta

साए की ख़ामोशी

साए की ख़ामोशी सिर्फ़ ज़मीन सहती है खोखला पेड़ नहीं या खोखली हँसी नहीं और फिर अंजान अपनी अनजानी हँसी में हँसा क़हक़हे का पत्थर संग-रेज़ों में...
Sara Shagufta

चाँद का क़र्ज़

हमारे आँसुओं की आँखें बनाई गईं हम ने अपने-अपने तलातुम से रस्सा-कशी की और अपना-अपना बैन हुए सितारों की पुकार आसमान से ज़ियादा ज़मीन सुनती है मैंने मौत...
Sara Shagufta

परिंदा कमरे में रह गया

रात ने जब घड़ियों से वक़्त उठा लिया घंटी की तेज़ आवाज़ ने सारे पर्दों का रंग उड़ा दिया कमरे में चार आदमियों ने अपनी-अपनी साँसें...
Sara Shagufta

कैसे टहलता है चाँद

कैसे टहलता है चाँद आसमान पे जैसे ज़ब्त की पहली मंज़िल आवाज़ के अलावा भी इंसान है आँखों को छू लेने की क़ीमत पे उदास मत हो क़ब्र...
Sara Shagufta

बदन से पूरी आँख है मेरी

'Badan Se Poori Aankh Hai Meri', a nazm by Sara Shaguftaजाओ जा-नमाज़ से अपनी पसंद की दुआ उठा लो हर रंग की दुआ मैं माँग...
Sara Shagufta

शैली बेटी के नाम

तुझे जब भी कोई दुःख दे इस दुःख का नाम बेटी रखना जब मेरे सफ़ेद बाल तेरे गालों पे आन हँसें, रो लेना मेरे ख़्वाब के दुःख पे सो लेना जिन खेतों...

STAY CONNECTED

38,332FansLike
19,561FollowersFollow
27,476FollowersFollow
1,620SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Upma Richa

या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
Manish Kumar Yadav

लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
premchand

सवा सेर गेहूँ

किसी गाँव में शंकर नाम का एक कुरमी किसान रहता था। सीधा-सादा ग़रीब आदमी था, अपने काम-से-काम, न किसी के लेने में, न किसी...
Unsocial Network - Dilip Mandal, Geeta Yadav

वे आपके बारे में बहुत ज़्यादा जानते हैं (किताब अंश: अनसोशल नेटवर्क)

'अनसोशल नेटवर्क' किताब भारत के विशिष्ट सन्दर्भों में सोशल मीडिया का सम्यक् आकलन प्रस्तुत करती है। जनसंचार का नया माध्यम होने के बावजूद, सोशल...
Prayers, Joined Hands

अनुत्तरित प्रार्थना

'परिवर्तन प्रकृति का नियम है' यह पढ़ते-पढ़ाते वक़्त मैंने पूरी शिद्दत के साथ अपने रिश्तों में की स्थिरता की कामनाप्रकृति हर असहज कार्य भी पूरी सहजता के...
Women sitting

अठन्नी, चवन्नी और क्रमशः

इस बार उन्हें नहीं था मोह स्वर्ण-मृग का फिर भी खींची गई थीं लक्ष्मण रेखाएँवे पढ़ीं, आगे बढ़ीं लक्ष्मण रेखाएँ लाँघकर रावण से जा भिड़ींगूँजते आए थे स्वर नेपथ्य...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)