Tag: tree

Prakash

पता

मैंने उसे ख़त लिखा था और अब पते की ज़रूरत थी मैंने डायरियाँ खँगालीं किताबों के पुराने कबाड़ में खोजा फ़ोन पर कई हितैशियों से पूछा और हारकर बैठ...
Happy Girl Child

बचपन में दुपहरी थी, बरगद देखता है

बचपन में दुपहरी थी एक पेड़ था एक चिड़िया थी एक तालाब था तीनों गाँव में थे चिड़िया गाती थी चिड़िया पेड़ में थी पेड़ था तालाब में तालाब दुपहरी में था दुपहरी...
Panchtatv

पंचतत्व (चींटी, तितली, पानी, गिलहरी और दरख़्त)

मेरे दोस्त जब भी चलना तो बाघ की तरह नहीं चलनाचलना चींटियों की तरह सबके साथ बिना डरे, बिना थके, बिना रुके, एकदम शान्त—केवल अपने पथ परजब भी भरो...
Bird

कौतुक-कथा

धूप चाहती थी, बारिश चाहती थी, चाहते थे ठेकेदार कि यह बेशक़ीमती पेड़ सूख जाए चोर, अपराधी, तस्कर, हत्यारे, मंत्री के रिश्तेदार फ़िल्म ऐक्टर, पुरोहित, वे सब जो...
Neem Tree

तेरे वाला हरा

चकमक, जनवरी 2021 अंक से कविता: सुशील शुक्ल नीम तेरी डाल अनोखी है लहर-लहर लहराए शोखी हैनीम तेरे पत्ते बाँके हैं किसने तराशे किसने टाँके हैंनीम तेरे फूल बहुत झीने भीनी ख़ुशबू शक्ल से पश्मीनेनीम...
Phanishwarnath Renu

ईश्वर रे, मेरे बेचारे!

अपने सम्बन्ध में कुछ लिखने की बात मन में आते ही मन के पर्दे पर एक ही छवि 'फेड इन' हो जाया करती है...
Gyan Ranjan

अमरूद का पेड़

घर के सामने अपने आप ही उगते और फिर बढ़ते हुए एक अमरूद के पेड़ को मैं काफ़ी दिनों से देखता हूँ। केवल देखता...
Sharad Billore

भाषा

पृथ्वी के अन्दर के सार में से फूटकर निकलती हुई एक भाषा है बीज के अँकुराने की।तिनके बटोर-बटोरकर टहनियों के बीच घोंसला बुने जाने की भी एक भाषा है।तुम्हारे...
Woman Tree

मूल

अमावस-सी अंधियारी रात्रियों में टॉर्च की चुभती तीखी रोशनी में पत्थर की चोट सहता पत्थर जैसा ही आ गिरता है धरा पर वो मूक स्तब्ध अमराई का आम, बाट...
Tribe, Village, Adivasi, Labour, Tribal, Poor

गोबिन्द प्रसाद की कविताएँ

आने वाला दृश्य आदमी, पेड़ और कव्वे— यह हमारी सदी का एक पुराना दृश्य रहा है इसमें जो कुछ छूट गया है मसलन पुरानी इमारतें, खण्डहरनुमा बुर्जियाँ और किसी...
Tree Branch, No Leaf, Autumn, Sad, Dry, Dead

सिर्फ़ पेड़ ही नहीं कटते हैं

तुम परेशान हो कि गुलमोहर सूख रहे हैं पेड़ कट रहे हैं चिड़ियाँ मर रही हैं और इस शहर में बसन्त टिकता नहीं...इस्पात की धमनियों में जब तक आदमी अपने...
Pramod Tiwari

ख़ूब रोया एक सूखा पेड़

'Khoob Roya Ek Sookha Ped', a poem by Pramod Tiwariयाद कर अपनी सघन छाया, ख़ूब रोया एक सूखा पेड़पेड़ जिसकी छाँव से हारे-थके रिश्ते जुड़े, पेड़ जिसकी देह से होकर कई...

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Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
Manish Kumar Yadav

लगभग विशेषण हो चुका शासक

किसी अटपटी भाषा में दिए जा रहे हैं हत्याओं के लिए तर्क'एक अहिंसा है जिसका सिक्का लिए गांधीजी हर शहर में खड़े हैं लेकिन जब भी सिक्का उछालते...
Village, Farmer

किसान को कौन जानता है?

हवा को जितना जानता है पानी कोई नहीं जानतापानी को जितना जानती है आग कोई नहीं जानताआग को जितना जानते हैं पेड़ कोई नहीं जानतापेड़ को जितना...
premchand

सवा सेर गेहूँ

किसी गाँव में शंकर नाम का एक कुरमी किसान रहता था। सीधा-सादा ग़रीब आदमी था, अपने काम-से-काम, न किसी के लेने में, न किसी...
Unsocial Network - Dilip Mandal, Geeta Yadav

वे आपके बारे में बहुत ज़्यादा जानते हैं (किताब अंश: अनसोशल नेटवर्क)

'अनसोशल नेटवर्क' किताब भारत के विशिष्ट सन्दर्भों में सोशल मीडिया का सम्यक् आकलन प्रस्तुत करती है। जनसंचार का नया माध्यम होने के बावजूद, सोशल...
Prayers, Joined Hands

अनुत्तरित प्रार्थना

'परिवर्तन प्रकृति का नियम है' यह पढ़ते-पढ़ाते वक़्त मैंने पूरी शिद्दत के साथ अपने रिश्तों में की स्थिरता की कामनाप्रकृति हर असहज कार्य भी पूरी सहजता के...
Women sitting

अठन्नी, चवन्नी और क्रमशः

इस बार उन्हें नहीं था मोह स्वर्ण-मृग का फिर भी खींची गई थीं लक्ष्मण रेखाएँवे पढ़ीं, आगे बढ़ीं लक्ष्मण रेखाएँ लाँघकर रावण से जा भिड़ींगूँजते आए थे स्वर नेपथ्य...
Sharmishtha - Anushakti Singh

शर्मिष्ठा: पौराणिक अन्याय के विरुद्ध एक आवाज़

किताब: शर्मिष्ठा - कुरु वंश की आदि विद्रोहिणी लेखिका: अणुशक्ति सिंह प्रकाशक: वाणी प्रकाशनटिप्पणी: देवेश पथ सारियाइंटरनेट ने पढ़ने के नये विकल्प खोले हैं। मेरे जैसे...
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