कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों की सहते

कहाँ तक जफ़ा हुस्न वालों की सहते जवानी जो रहती तो फिर हम न रहते लहू था तमन्ना का आँसू नहीं थे बहाए न जाते तो हरगिज़...

तू शब्दों का दास रे जोगी

तू शब्दों का दास रे जोगी तेरा कहाँ विश्वास रे जोगी इक दिन विष का प्याला पी जा फिर न लगेगी प्यास रे जोगी ये साँसों का बन्दी...

टूटी है कस्ती पर किनारे तक आई है

टूटी है कस्ती पर किनारे तक आई है तुझसे जुदा उसने अपनी क़सम निभाई है सब की ज़बान पे नारे हैं, कैसा माहौल है दरख़्तों ने फूल...

बिरजू भैया

ईश्वर के अवतार हुए हैं, बिरजू भैया, पर कितने लाचार हुए हैं, बिरजू भैया। होरी के सिरहाने कोरी रात बिताई, फिर चाहे बीमार हुए हैं, बिरजू भैया। धनिया...

चीर चुराने वाला चीर बढ़ावे है

चीर चुराने वाला चीर बढ़ावे है ऐसी लीलाओं से जी घबरावे है जितनी बार बुहारूँ हूँ अपने घर को उतनी ही साँसों में धूल समावे है कैसी बेचैनी...

मैंने पूछा पहला पत्थर मुझ पर कौन उठाएगा

'Maine Poochha Pehla Patthar Mujh Par Kaun Uthaaega', a ghazal by Qateel Shifai मैंने पूछा पहला पत्थर मुझ पर कौन उठाएगा आई इक आवाज़ कि तू...

उसकी वफाएँ

ख़याल उसका ही जहन में आना लाज़मी था ज़िक्र दिखावे की महोब्बत का जो हो रहा था, ज़िक्र उसका ही तन्हाई में होना लाज़मी था ख़याल मेरी...

चले कू-ए-यार से हम

चले कू-ए-यार से हम, अरसे हुए ठिकाना नहीं मिला भटकते हुए दरिया को समंदर का साहिल नहीं मिला अरमां था हमारा मिलकर करेंगे सफर पूरा ज़िंदगी...

मैं इंसान-ए-नौअ हूँ

'Main Insaan-e-Nau hoon' a ghazal by Atif Khan मैं इंसान-ए-नौअ हूँ, मैं ईसा-नफ़स हूँ ज़मीं से तुम्हारी मैं फिर कल उठूँगा मैं आदम हूँ बे-जाँ सा पत्थर नहीं...

मेरे रोने पर हँसी अच्छी नहीं

मेरे रोने पर हँसी अच्छी नहीं बस जी बस, ये दिल-लगी अच्छी नहीं दिल लगी का भी न रोना हो कहीं हर घड़ी की ये हँसी अच्छी...

इक मरुस्थल इक समुंदर

इक मरुस्थल, इक समंदर। पा रहा हूँ अपने अंदर। यूँ तुम्हारे दिल से निकला जैसे लौटा था सिकंदर। फिर उड़ेंगे खग नए कल हमसे सुंदर, तुमसे सुंदर। थकके लौटे ज्वार...

पल-पल काँटा-सा चुभता था

पल-पल काँटा-सा चुभता था ये मिलना भी क्या मिलना था ये काँटे और तेरा दामन मैं अपना दुःख भूल गया था कितनी बातें की थीं लेकिन एक बात से...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)