Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Sensual Hands, Intimate

किसी ठहरी हुई साँझ की क़लम से

जब कई साँझ जला और स्याह कर कई सवेरे, मैं मान लेती हूँ ख़ुद से हार और अनजाने में पुकार उठती हूँ एक बार फिर तुम्हारा नाम, तब तुम्हारा यह...
Sahir Ludhianvi

ख़ूबसूरत मोड़

'Khoobsurat Mod' - Sahir Ludhianvi चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की न तुम मेरी तरफ़...
Hands, Touch

अवहेलना

सृष्टि की अनछुई देह पर पहला प्रेम स्पर्श 'मौन' का था जो भाषा से असहमत था फिर भी आदम और हव्वा- जिन्हें शाब्दिक स्पर्श की कोई अनुभूति नहीं...
Couple

अभिलाषा – प्रणय निवेदन

'Abhilasha', a poem by Vikas Sharma तुम हो शीतल पवन बसन्ती सुबह-सुबह अंगड़ाई लेता, साँस खींचकर तुमको भर लेता हूँ बदन में नाक को छूकर भीतर तक इक ठण्डा-सा अहसास दिला तुम प्राण फूँक देती हो मुझमें। गंगा...
Night Jasmine, Parijat, Harsingar

पीड़ा के फूल

अगर जानना चाहते हो पीड़ा क्या है, तो मेरे वक्षस्थल पर अपना सर रख देना, कुछ देर के लिए निस्तेज हो जाना, जैसे मर जाते हैं लोग प्रेम की पीड़ा में प्यासे... तुम्हें...
Couple, Sun, Moon, Tattoo

देह से परे भी है प्रेम

प्रेम दर्शाने के तमाम अनुभावों में से मैंने चुना था सूक्ष्म प्रेम-चिह्नों पर स्वयं का चिह्नित हो जाना अगणित स्पर्शों की इच्छाओं को हराकर मैंने चुना था इच्छाओं के...
Buddha, Siddhartha Quotes

मुक्ति

'Mukti', a poem by Deepak Singh स्वयं से मिलने की यात्रा मुक्ति की यात्रा है! मैं मुक्त होना चाहता हूँ किन्तु तुम्हें भूलना नहीं चाहता याद है तुम्हें? तुम मुझे यात्री...
Ekta Nahar

पकने के वक़्त में बहुत कुछ बदल जाता है

Poems: Ekta Nahar सब कुछ सलीक़े से करने वाली उस लड़की ने तय कर रखी थी अपने जाने की तारीख़ भी शादी के इक रोज़ पहले तक मैं बस...
Love, Couple

चलते हैं, चलो

'Chalte Hain Chalo', a poem by Prem Mishra जहाँ रातों में होती है सितारों की बरसात, आसमानी रोशनी से जगमगाता है सारा आकाश, वहाँ तुम और मैं चलते हैं, चलो! जहाँ सूर्य निकलता सबसे पहले, पर्वतों...
Couple, Silhouette

तुम मेरे अपराधी हो

'Tum Mere Apradhi Ho', a poem by Rupam Mishra मैंने अपराधी के सीने से लगकर उसके अपराध कहे और हृदय से सुना हृदय का अपराधबोध और जाना...
Mukesh Kumar Sinha

इश्क़िया

'Ishqiya', a poem by Mukesh Kumar Sinha बारिश होने वाली हो और न हो ऐसे ही थे तुम...! बस भिगो देते थे, उम्मीद जताकर! याद है, कैसे गच्चा...
Woman with daughter, Mother

विरासत

'Virasat', a poem by Kajal Khatri मैंने देखा है अक्सर अपनी दादी, चाची, बुआ, माँ सभी को दालों के डिब्बों में तकिए के ग़िलाफ़ों में साड़ी की तहों के बीच रामायण के पन्नों...
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