Read here the best Hindi Love Poems and Stories
Tag: प्रेम
किसी ठहरी हुई साँझ की क़लम से
जब कई साँझ जला और
स्याह कर कई सवेरे,
मैं मान लेती हूँ ख़ुद से हार
और अनजाने में पुकार उठती हूँ
एक बार फिर तुम्हारा नाम,
तब तुम्हारा यह...
ख़ूबसूरत मोड़
'Khoobsurat Mod' - Sahir Ludhianvi
चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों
न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की
न तुम मेरी तरफ़...
अवहेलना
सृष्टि की अनछुई देह पर
पहला प्रेम स्पर्श 'मौन' का था
जो भाषा से असहमत था
फिर भी आदम और हव्वा-
जिन्हें शाब्दिक स्पर्श की कोई अनुभूति नहीं...
अभिलाषा – प्रणय निवेदन
'Abhilasha', a poem by Vikas Sharma
तुम हो शीतल पवन बसन्ती
सुबह-सुबह अंगड़ाई लेता,
साँस खींचकर
तुमको भर लेता हूँ बदन में
नाक को छूकर भीतर तक
इक ठण्डा-सा अहसास दिला
तुम प्राण फूँक देती
हो मुझमें।
गंगा...
पीड़ा के फूल
अगर जानना चाहते हो
पीड़ा क्या है,
तो मेरे वक्षस्थल
पर अपना सर रख देना,
कुछ देर के लिए निस्तेज
हो जाना,
जैसे मर जाते हैं लोग
प्रेम की पीड़ा में
प्यासे...
तुम्हें...
देह से परे भी है प्रेम
प्रेम दर्शाने के तमाम अनुभावों में से
मैंने चुना था
सूक्ष्म प्रेम-चिह्नों पर स्वयं का चिह्नित हो जाना
अगणित स्पर्शों की इच्छाओं को हराकर
मैंने चुना था
इच्छाओं के...
मुक्ति
'Mukti', a poem by Deepak Singh
स्वयं से मिलने की यात्रा
मुक्ति की यात्रा है!
मैं मुक्त होना चाहता हूँ
किन्तु
तुम्हें भूलना नहीं चाहता
याद है तुम्हें?
तुम मुझे यात्री...
पकने के वक़्त में बहुत कुछ बदल जाता है
Poems: Ekta Nahar
सब कुछ सलीक़े से करने वाली उस लड़की ने
तय कर रखी थी अपने जाने की तारीख़ भी
शादी के इक रोज़ पहले तक मैं बस...
चलते हैं, चलो
'Chalte Hain Chalo', a poem by Prem Mishra
जहाँ रातों में
होती है
सितारों की बरसात,
आसमानी रोशनी से
जगमगाता है
सारा आकाश,
वहाँ तुम और मैं
चलते हैं, चलो!
जहाँ सूर्य निकलता
सबसे पहले,
पर्वतों...
तुम मेरे अपराधी हो
'Tum Mere Apradhi Ho', a poem by Rupam Mishra
मैंने अपराधी के सीने से लगकर उसके अपराध कहे
और हृदय से सुना हृदय का अपराधबोध
और जाना...
इश्क़िया
'Ishqiya', a poem by Mukesh Kumar Sinha
बारिश होने वाली हो और न हो
ऐसे ही थे तुम...!
बस भिगो देते थे, उम्मीद जताकर!
याद है, कैसे गच्चा...
विरासत
'Virasat', a poem by Kajal Khatri
मैंने देखा है
अक्सर
अपनी दादी, चाची, बुआ, माँ
सभी को
दालों के डिब्बों में
तकिए के ग़िलाफ़ों में
साड़ी की तहों के बीच
रामायण के पन्नों...











