Read here the best Hindi Love Poems and Stories
Tag: प्रेम
अगर वह प्रेम था
अगर,
प्रेम के अभिलाषी न होकर
कालांश को भी प्रेमिल हुए थे
तब उस क्षण.. ईश्वर तुम्हें स्पर्श कर रहा था।
अगर,
प्रेम आकर गुज़र भी गया
तुम्हें भान तक...
जब आप प्रेम में होते हैं
'Jab Aap Prem Mein Hote Hain', a poem by Ankit Kumar Bhagat
सूरज भी करता है प्रेम
अपनी किरणों से,
यद्यपि वह गोला है 'आग' का।
जबकि वो...
प्रेम
मुझे याद नहीं पहली बार मैंने प्रेम शब्द कब सुना, कब पढ़ा या कब लिखा। बचपन में मैं जिन अंकल के यहाँ दूध लेने...
प्रेम में
प्रेम में चढ़ना नहीं होता पहाड़
न ही होता है किसी खाई में कूदना
यह कोई प्रतियोगिता नहीं है
जिसमें अव्वल आने की ज़िद हो
प्रेम में सबसे बेहतर का...
अभिसार
'Abhisaar', a poem by Akhileshwar Pandey
काजल की पतली रेखा घटाटोप बारिश चाहती है
उसकी पनीली आँखों में तैर रहे सुनहरे सपने
मैं बूँद-बूँद पी रहा हूँ
उसके होंठों...
भ्रमित रहना चाहती हूँ
'Bhramit Rehna Chahti Hoon', a poem by Pallavi Vinod
कोई ख़ुद पर मोहित कैसे हो सकता है?
क्यों नहीं! प्रकृति भी तो ख़ुद पर मोहित है,
अपने...
प्रेम
वो नहीं जानती
किसी गुलज़ार या अमृता को,
ना ही सुने-पढ़ें हैं उसने
ग़ालिब या मीर के शेर,
नहीं जानती वो बयाँ करना
मुहब्बत को अल्फ़ाज़ में
वो बस चाहती...
प्रेम अपनी जगह रहेगा
1
सवाल प्रेम है या नहीं
ये कभी था ही नहीं,
फूल कभी पूछकर खिलते हैं क्या?
बस प्रेम को बरतना नहीं आया
दो स्वंतत्रचेता प्रेमी
प्रेम को अपने अनुकूल...
ऐसी जगह
तुम्हारे छतनार जूड़े में टाँकना चाहता हूँ
टहकार पलास का ऐसा फूल
जो मुरझाये नहीं कभी
हमारे प्यार की तरह
महुए सी मादक तुम्हारी आँखों में
लगाना चाहता हूँ रात का काजल
मैं...
उदास शहर की बातें
ख़्वाब ज़्यादा हों तो नींद कम होने लगती है और ख़्वाबों के बोझ का दबाव आँख के नीचे गहरा रंग छोड़ता जाता है। आईना...
हार-जीत से परे
तुम्हें दुःख पहुँचाया तो
होगी वह मेरी ही हार
कहा था तुमने
किन्हीं आकुल पलों में,
और
झट से अपने दुःखों का हलाहल
पी गई मैं
तुम सदा गौरवान्वित रहें
अपनी जीत के...
वृत्त, प्रतीक्षा, अल्पविराम
Poems: Gaurav Bharti
वृत्त
बहुत आसान है
ढलती हुई इस उम्र में भी
बच्चा हो जाना
सौंपकर ख़ुद को
तुम्हारी बाँहों के वृत्त में
मैं बच्चा हो जाता हूँ...
प्रतीक्षा
तुमसे मिलकर
जब हुई घण्टों लफ़्ज़ों की...










