Read here the best Hindi Love Poems and Stories
Tag: प्रेम
भली-सी एक शक्ल थी
भले दिनों की बात है
भली-सी एक शक्ल थी
न ये कि हुस्न-ए-ताम हो
न देखने में आम-सी
न ये कि वो चले तो कहकशाँ सी रहगुज़र लगे
मगर...
काग़ज़ पर लिखी गई कविताओं में
काग़ज़ पर लिखी गई कविताओं में
पेड़ों की त्वचा का दर्द लिखा जाता है
चुप्पी दो होंठों के बीच का शब्द नहीं
दो आँखों के मध्य निरन्तर सम्वाद है
प्रिये,...
प्यार की भाषाएँ
'Pyar Ki Bhashaein', a poem by Kunwar Narayan
मैंने कई भाषाओं में प्यार किया है
पहला प्यार
ममत्व की तुतलाती मातृभाषा में,
कुछ ही वर्ष रही वह जीवन में
दूसरा...
प्रेमिल क्षणिकाएँ
Poems: Mukesh Kumar Sinha
1
लिखकर
रेत पर
नाम तुम्हारा
बहा दिया उछलती लहरों में
और बस
हो गया
पूरा समुद्र
सिर्फ़ तुम्हारे नाम
कहो, दे पायेगा
कोई ऐसा उपहार!
2
दीवार से चिपकी
थरथरा रही थीं उम्मीदें
सपनों की रंगीनियों...
तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिले
वो अक्सर मुझसे पूछती थी
तुम पहले क्यों नहीं मिले?
इस मझधार में जब मेरे अंदर का समस्त लावण्य
हीन हो चुका है
जब मेरी कोमलता को समय...
बुद्ध की प्रतीक्षा, अप्राप्य का सुख
Poems: Santwana Shrikant
बुद्ध की प्रतीक्षा
तुम्हारा-
कानों के पीछे चूमना
आत्मा को छूना है जैसे,
होठों को चूमना
सूर्य की रश्मियों को
रास्ता देना था।
मेरी देह में
उतर रहे हो तुम
रक्त...
प्रेम कवि
'Prem Kavi', a poem by Pratima Singh
सुबह-सुबह
वक़्त के ज़ख़्मी कंधों पर बैठे
उस कवि को
सबने कोसा
जो लिख रहा था पत्र
अपनी प्रेमिका को,
जंग पर जाते सिपाही ने उसके...
मैं अलग तरह का प्रेम चाहती हूँ
'Main Alag Tarah Ka Prem Chahti Hoon', a poem by Nidhi Gupta
नहीं बनना राधा मुझे
रुक्मिणी की भूमिका में भी सहमति नहीं है मेरी
मीरा बनकर...
प्रेम है या कल्पना
रोज़-रोज़ तेरा सपने में देना दस्तक
ज़ुल्फ़ों से लुढ़कना शबनमी क़तरों का
मेरी उनींदी आँखों पर,
वो उगते सूरज-सा पहला चुम्बन पेशानी पर मेरी
लीपे हुए आँगन में
तुलसी के चौबारे...
स्त्री और प्रेम
प्राणिमात्र को जीवित रहने के लिए
रोटी, कपड़ा और मकान के साथ-साथ
प्रेम भी चाहिए
किन्तु स्त्री को तो मात्र
प्रेम ही चाहिए
स्त्रियाँ प्रेम ही खाना, पहनना, ओढ़ना...
होना तो यूँ था
'Hona Toh Yun Tha', a poem by Rag Ranjan
होना तो यूँ था
कि मैं अपनी तमाम उदासियों को
तुम्हारे भूले हुए प्रेम गीतों की तरह गुनगुनाता
किसी...
लाओ अपना हाथ
लाओ अपना हाथ मेरे हाथ में दो
नये क्षितिजों तक चलेंगे
हाथ में हाथ डालकर
सूरज से मिलेंगे।
इसके पहले भी
चला हूँ लेकर हाथ में हाथ
मगर वे हाथ
किरनों के...










