Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Ahmad Faraz

भली-सी एक शक्ल थी

भले दिनों की बात है भली-सी एक शक्ल थी न ये कि हुस्न-ए-ताम हो न देखने में आम-सी न ये कि वो चले तो कहकशाँ सी रहगुज़र लगे मगर...
Girl Reflection Water

काग़ज़ पर लिखी गई कविताओं में

काग़ज़ पर लिखी गई कविताओं में पेड़ों की त्वचा का दर्द लिखा जाता है चुप्पी दो होंठों के बीच का शब्द नहीं दो आँखों के मध्य निरन्तर सम्वाद है प्रिये,...
Kunwar Narayan

प्यार की भाषाएँ

'Pyar Ki Bhashaein', a poem by Kunwar Narayan मैंने कई भाषाओं में प्यार किया है पहला प्यार ममत्व की तुतलाती मातृभाषा में, कुछ ही वर्ष रही वह जीवन में दूसरा...
Mukesh Kumar Sinha

प्रेमिल क्षणिकाएँ

Poems: Mukesh Kumar Sinha 1 लिखकर रेत पर नाम तुम्हारा बहा दिया उछलती लहरों में और बस हो गया पूरा समुद्र सिर्फ़ तुम्हारे नाम कहो, दे पायेगा कोई ऐसा उपहार! 2 दीवार से चिपकी थरथरा रही थीं उम्मीदें सपनों की रंगीनियों...
Pallavi Vinod

तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिले

वो अक्सर मुझसे पूछती थी तुम पहले क्यों नहीं मिले? इस मझधार में जब मेरे अंदर का समस्त लावण्य हीन हो चुका है जब मेरी कोमलता को समय...
Flowers in Hands, Love, Sex, Intimacy

बुद्ध की प्रतीक्षा, अप्राप्य का सुख

Poems: Santwana Shrikant बुद्ध की प्रतीक्षा तुम्हारा- कानों के पीछे चूमना आत्मा को छूना है जैसे, होठों को चूमना सूर्य की रश्मियों को रास्ता देना था। मेरी देह में उतर रहे हो तुम रक्त...
Flower, Peace, War, Love

प्रेम कवि

'Prem Kavi', a poem by Pratima Singh सुबह-सुबह वक़्त के ज़ख़्मी कंधों पर बैठे उस कवि को सबने कोसा जो लिख रहा था पत्र अपनी प्रेमिका को, जंग पर जाते सिपाही ने उसके...
Vayam Rakshamah, Girl

मैं अलग तरह का प्रेम चाहती हूँ

'Main Alag Tarah Ka Prem Chahti Hoon', a poem by Nidhi Gupta नहीं बनना राधा मुझे रुक्मिणी की भूमिका में भी सहमति नहीं है मेरी मीरा बनकर...
Girl sitting on swing beside tree

प्रेम है या कल्पना

रोज़-रोज़ तेरा सपने में देना दस्तक ज़ुल्फ़ों से लुढ़कना शबनमी क़तरों का मेरी उनींदी आँखों पर, वो उगते सूरज-सा पहला चुम्बन पेशानी पर मेरी लीपे हुए आँगन में तुलसी के चौबारे...
Sad Woman, Robotic eyes

स्त्री और प्रेम

प्राणिमात्र को जीवित रहने के लिए रोटी, कपड़ा और मकान के साथ-साथ प्रेम भी चाहिए किन्तु स्त्री को तो मात्र प्रेम ही चाहिए स्त्रियाँ प्रेम ही खाना, पहनना, ओढ़ना...

होना तो यूँ था

'Hona Toh Yun Tha', a poem by Rag Ranjan होना तो यूँ था कि मैं अपनी तमाम उदासियों को तुम्हारे भूले हुए प्रेम गीतों की तरह गुनगुनाता किसी...
Bhawani Prasad Mishra

लाओ अपना हाथ

लाओ अपना हाथ मेरे हाथ में दो नये क्षितिजों तक चलेंगे हाथ में हाथ डालकर सूरज से मिलेंगे। इसके पहले भी चला हूँ लेकर हाथ में हाथ मगर वे हाथ किरनों के...
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