Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Sarveshwar Dayal Saxena

एक छोटी-सी मुलाक़ात

'Ek Chhoti Si Mulaqat', a poem by Sarveshwar Dayal Saxena कुछ देर और बैठो अभी तो रोशनी की सिलवटें हैं हमारे बीच। शब्दों के जलते कोयलों की आँच अभी...
Amrita Pritam

दावत

रात-कुड़ी ने दावत दी सितारों के चावल फटककर यह देग किसने चढ़ा दी चाँद की सुराही कौन लाया चाँदनी की शराब पीकर आकाश की आँखें गहरा गईं धरती का दिल...
Rupam Mishra

काश, तुम युवा नहीं होते

'Kaash Tum Yuva Nahi Hote', a poem by Rupam Mishra प्रेम हमें कितनी श्रेष्ठतम आत्मिक अवस्था में पहुँचा देता है! इसकी थाह मुझे तब मिली जब तुम्हारी आँखों...
Night, Lonely, Alone, Road

कभी तुम मिलो तो बताऊँ मैं

'Kabhi Tum Milo Toh Bataun Main', a nazm by Tasneef Haidar कभी तुम मिलो तो बताऊँ मैं ग़म ए ज़िन्दगी की अमानतें हैं तुम्हारे नाम लिखी...
Rakhi Singh

दूरियों से कोई पीड़ा ख़त्म नहीं होती

'Dooriyon Se Koi Peeda Khatm Nahi Hoti', a poem by Rakhi Singh कई दिनों से कलाई के पास की नस में तीखा-सा दर्द रह रहा है डॉक्टर...
Buddha, Siddhartha Quotes

ज़रूरी है प्रेम में होना

'Zaroori Hai Prem Mein Hona', a poem by Amandeep Gujral सब कुछ छोड़कर चले जाना चुपचाप बुद्ध होने के लिए ज़रूरी है क्या? तुम एक काम करना तुम...
Paritosh Kumar Piyush

चूमना, प्रेम में हूँ, नाराज़गी

Poems: Paritosh Kumar Piyush चूमना (एक) उसे चूमते हुए मैंने जाना सचमुच इस ग्रह पर होठों से बेहतरीन जगह कहीं और नहीं होती... (दो) साल दो हज़ार सोलह के अगस्त की वह कोई अलसायी-सी शाम रही...
Girl sitting on grass

शैवाल मर रहे हैं

'Shaiwal Mar Rahe Hain', a poem by Nidhi Agarwal प्रथम प्रेम की स्मृतियाँ शैवालों-सी होती हैं जिनके उगने के लिए ज़रूरी होती है नमी। तब वह दीवार के किन्हीं अनचीन्हे...
Harivansh Rai Bachchan

इस पार, उस पार

'Is Paar Us Paar', a poem by Harivanshrai Bachchan इस पार, प्रिये, मधु है तुम हो, उस पार न जाने क्या होगा! यह चाँद उदित होकर नभ...
Fish Eyes, Boy, Girl, Abstract

स्वप्न में पूछा तुमने

'Swapn Mein Poochha Tumne', a poem by Rag Ranjan स्वप्न में पूछा तुमने क्या कहोगे मुझसे आख़िरी बार हो यही बस एक मुलाक़ात फिर ना मिलना हो यदि...

अनामिका चक्रवर्ती की कविताएँ

Poems: Anamika Chakraborty मन्नत का धागा तुम्हारे आलिंगन से अब तक मुक्त न हो पायी मैं। तुम्हारी देह की गंध अब तक बाँधे हुए है मुझको, तुम्हारा नमकीन स्पर्श ठहरा है अब तक नमी लिए...
Man, Sleep, Painting, Abstract, Closed Eyes, Face

तुम इतने ख़ूबसूरत हो

'Tum Itne Khoobsurat Ho', a poem by Rupam Mishra तुम इतने ख़ूबसूरत हो कि कविता लिखने बैठती हूँ तो शब्द हार जाते हैं तुम इतने ज़हीन हो ख़यालों में...
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