Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Kid playing violin, Music

प्यार से प्रश्न

प्यार तुम, अनुभूति तुम, आयाम बन कर क्या करोगे? तुम हृदय के भाव हो, आवाज़ बन कर क्या करोगे? ज़िन्दगी की तुम महक, तुम जीवन की...
Flowers on Woman's Stole

ओढ़नी के फूल

'Odhani Ke Phool', a poem by Amar Dalpura साँस में साँस थी उसकी इसी ऊर्जा से जीवन चलता रहा वो नींद और रात को मुलायम बनाकर बेतरतीब सपनों की...
Sitting Crossed Legs, Book

‘तुम्हारे लिए’ – इंस्टा डायरी (चौथी किश्त)

जब वह कमरे से बाहर निकला तो कई रास्ते उसे दिख रहे थे। उसे नहीं पता, कौन-से रास्ते उसे मंज़िल तक ले जाएँगे। अगर...
Parveen Shakir

नहीं मेरा आँचल मैला है

'Nahi Mera Aanchal Maila Hai', poetry by Parveen Shakir नहीं मेरा आँचल मेला है और तेरी दस्तार के सारे पेच अभी तक तीखे हैं किसी हवा ने...
Man holding a flower in mouth, Sensual

पेरिस्कोप

ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन पर भी मोहन को लगा कि उसे उतर जाना चाहिए और वापस हो लेना चाहिए। पिछले दो स्टेशनों से जब...
Leaf on hand

प्रेम जब तक देह 

प्रेम जब तक देह तब तक स्थूल जब सूक्ष्म तब आत्मा और इस आत्मा के साथ अनुभूति की सांद्रता यही वो सिरा है जहाँ से उठकर मैं तुम तक...
Hand, Sun, Tree, Far, Away, Seek

तुम्हारा जाना

'Tumhara Jana', a poem by Santwana Shrikant समाज के अपरिभाषित तानों से लहूलुहान होकर, जब झटक दोगे तुम हाथ मेरा, छुअन भी- जो वर्षों संजोयी है मैंने, हथेली की लकीरों...
Rahul Boyal

तुम्हारी पीठ का लाल तिल

चूँकि तुम ब्राह्मण समुदाय से अभिन्न नहीं हो इसलिए सम्भव है विचारों में भी छिन्न भिन्न नहीं हो। तुम्हारा ईश्वर में विश्वास पुष्ट है तुम्हारी दृष्टि में भाग्य...

प्रेम में स्त्री

प्रेम में एक स्त्री छूटने लगती है अपने आप से प्रेम में एक स्त्री हल्की हो जाती है पंख की तरह इतनी हल्की कि... पाँव की पायल भी उसके कानों से नहीं टकराती स्त्री सीढ़ियाँ लाँघ जाती है कुछ इस तरह जैसे...
Pallavi Mukherjee

लौट आया प्रेम

'Laut Aaya Prem', a poem by Pallavi Mukherjee एक लम्बे समय के बाद वे दोनों पास-पास थे डूब रहे थे एक दूसरे की आँखों में जैसे अथाह समुद्र में डूब रहे...
Woman Standing near River, making Love sign

मैं

'I Am A Fountain, You Are my Water' - Zeynep Hatun अनुवाद: उपमा 'ऋचा' मैं झरना हूँ, तुम पानी हो मेरा, मैं बहता हूँ तुम से तुम...
Sarveshwar Dayal Saxena

चलो घूम आएँ

यह कविता यहाँ सुनें: https://youtu.be/Ji6Xm0Inkus उठो, कब तक बैठी रहोगी इस तरह अनमनी चलो घूम आएँ। तुम अपनी बरसाती डाल लो मैं छाता खोल लेता हूँ बादल— वह तो भीतर बरस रहे...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)