Tag: राजनीति

Gaurav Bharti

कविताएँ: जुलाई 2020 (द्वितीय)

पिता इस साल जनवरी में नहीं रहे मेरे पिता के पिताउनके जाने के बाद इन दिनों पिता के चेहरे को देखकर समझ रहा हूँ पिता के जाने का दुःखदुःख,...
Vijaydev Narayan Sahi

सवाल है कि असली सवाल क्या है

असली सवाल है कि मुख्यमन्त्री कौन होगा? नहीं नहीं, असली सवाल है कि ठाकुरों को इस बार कितने टिकट मिले? नहीं नहीं, असली सवाल है कि ज़िले से...
Keshav Sharan

कविताएँ: अगस्त 2020

व्यापार और प्यार: एक गणित यह जो हम लेते हैं यह जो हम देते हैं व्यापार है इसमें से घटा दो अगर लाभ-हानि का जो विचार है तो बाक़ी बचा प्यार है!फिर प्यार में जोड़...
Shrikant Verma

हस्तक्षेप

कोई छींकता तक नहीं इस डर से कि मगध की शांति भंग न हो जाए, मगध को बनाए रखना है तो मगध में शांति रहनी ही चाहिएमगध है, तो शांति...
Manjula Bist

सिर्फ़ व सिर्फ़ अपने बारे में

पागल स्त्री की चीख़ पर कोई कान नहीं दे रहा है भटकते लोगों की बड़बड़ाहट का कोई अर्थ नहीं है संततियाँ पालकों से अधिक ऐप में...
Adarsh Bhushan

अमलदारी

इससे पहले कि अक्षुण्णताओं के रेखाचित्र ढोते अभिलेखागारों के दस्तावेज़ों में उलटफेर कर दी जाए, उन सारी जगहों की शिनाख़्त होनी चाहिए जहाँ बैठकर एक कुशल और समृद्ध समाज की कल्पनाओं के...
Shail Chaturvedi

मूल अधिकार?

क्या कहा—चुनाव आ रहा है? तो खड़े हो जाइए देश थोड़ा बहुत बचा है उसे आप खाइए। देखिए न, लोग किस तरह खा रहे हैं सड़के, पुल और फ़ैक्ट्रियों तक को पचा...
Gorakh Pandey

संसद का गीत

सावधान! संसद है, बहस चल रही है!भीतर कुछ कुर्सियाँ मँगाओ बाहर जेलें नयी बनाओ बाँधो लपटें झोपड़ियों की महलों की रौनक़ें बचाओ खलबली मची है जंगल में आग जल रही है...
Pandey Bechan Sharma Ugra

उसकी माँ

दोपहर को ज़रा आराम करके उठा था। अपने पढ़ने-लिखने के कमरे में खड़ा-खड़ा धीरे-धीरे सिगार पी रहा था और बड़ी-बड़ी अलमारियों में सजे पुस्तकालय...

मदारी का लोकतन्त्र

वो किसी धूर्त मदारी की तरह वादों की डुगडुगी बजाते हुए पीटते हैं ताली, टटोलते हैं हमारी जेबें, तोड़ते हैं आज़ाद क़लमें, जाँचते हैं हमारे शब्द, सूँघते हैं हमारी थालियाँ, बाँटते हैं हमारे त्यौहार, बदल देते हैं इतिहास की किताब, गिनते हैं...
Rahul Boyal

अन्तर्विरोधों का हल

तुम्हारे हाथों में थमे हुए ये धर्म-ध्वज तुम्हारे होंठों पर चीख़ते हुए ये नारे तुम्हारी चेतना में बैठे हुए भय के प्रतीक हैं मैं प्रेम में तुम्हें...
Nirmal Gupt

चुप रहो

चुप रहो चुपचाप सहोसमझ जाओ जो चुप रहेंगे वे बचेंगे बोलने वालों को सिर में गोली के ज़रिये सुराख़ बनाकर मार डाला जाएगा ख़ामोश रहने वालों को क़रीने...

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Man lying on footpath, Homeless

तीन चित्र : स्वप्न, इनकार और फ़ुटपाथ पर लेटी दुनिया

1 हम मृत्यु-शैय्या पर लेटे-लेटे स्वप्न में ख़ुद को दौड़ता हुआ देख रहे हैंऔर हमें लगता है हम जी रहे हैं हम अपनी लकड़ियों में आग के...
Fair, Horse Ride, Toy

मेला

1 हर बार उस बड़ी चरखी पर जाता हूँ जो पेट में छुपी हुई मुस्कान चेहरे तक लाती है कई लोग साल-भर में इतना नहीं हँसते जितना खिलखिला लेते हैं...
Man holding train handle

आधुनिकता

मैं इक्कीसवीं सदी की आधुनिक सभ्यता का आदमी हूँ जो बर्बरता और जंगल पीछे छोड़ आया हैमैं सभ्य समाज में बेचता हूँ अपना सस्ता श्रम और दो वक़्त की...
Justyna Bargielska

यूस्टीना बारगिल्स्का की कविताएँ

1977 में जन्मीं, पोलिश कवयित्री व उपन्यासकार यूस्टीना बारगिल्स्का (Justyna Bargielska) के अब तक सात कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्हें दो...
Saadat Hasan Manto

ख़ुशिया

ख़ुशिया सोच रहा था।बनवारी से काले तम्बाकूवाला पान लेकर वह उसकी दुकान के साथ लगे उस संगीन चबूतरे पर बैठा था जो दिन के...
Naresh Mehta

घर की ओर

वह— जिसकी पीठ हमारी ओर है अपने घर की ओर मुँह किये जा रहा है जाने दो उसे अपने घर।हमारी ओर उसकी पीठ— ठीक ही तो है मुँह यदि होता तो...
Upma Richa

या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
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