Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Book, Flower, Heart, Love

प्रेम का रोग

'Prem Ka Rog', a poem by Mukesh Kumar Sinha उसने हाई ब्लडप्रेशर की गोली एम्लो-डीपीन खाकर की कोशिश कि इंट्रावीनस रक्त का संचार हो पाए सामान्य ताकि बस कर पाए प्रपोज़ निकाल...
Akhtar ul Iman

डासना स्टेशन का मुसाफ़िर

'Dasna Station Ka Musafir', a nazm by Akhtar ul Iman कौन सा स्टेशन है? डासना है साहिब-जी आप को उतरना है? "जी नहीं, नहीं", लेकिन डासना तो था ही...
Girl, Dupatta, Sun

इश्क़-ए-अमृता, ध्येय

Poems: Preeti Karn इश्क़-ए-अमृता मैं चखती हूँ इश्क़ की चाशनी बिना किसी परहेज या बंदिशों की दख़ल के बग़ैर मुझे इश्क़ हो जाता है सुबह की चाय जब खौलती है अदरक की सौंधी...
Girl sitting on grass

प्रेम में मिलना मत

'Prem Mein Milna Mat', a poem by Vandana Kapil उन जगहों ने अपना अस्तित्व खो दिया जिन्हें गवाह होना था उन मौन पलों का जहाँ निःशब्द बन वो पहरों शब्द...
Harshita Panchariya

भ्रम

स्मृतियों में सहेजने के तौर पर दिए गए सभी चुम्बन पीड़ा में ऐसे भ्रम बनाए रखते हैं, मानो आँख खुलते ही ईश्वर सामने नज़र आ जाएगा। यूँ बंद आँखों के...
Pallavi Vinod

जीना चाहती हूँ

'Jeena Chahti Hoon', a poem by Pallavi Vinod प्रेम के सबसे एकांत पलों में जब मेरे तुम्हारे बीच किसी की भी गुंजाइश नहीं होती मैं जीना चाहती...
Caged Bird, Freedom

तानाशाही

'Tanashahi', a poem by Niki Pushkar प्रकटतः जो सहज आकर्षण दिख रहा था वस्तुतः कलात्मक चतुराई थी। हृदय के रिक्त स्थान को समय-असमय अपनी उपस्थिति से भरा गया और फिर बड़ी...
Harshita Panchariya

मेरे प्रेम

'Mere Prem', a poem by Harshita Panchariya ब्रह्माण्ड में विचरते अनन्त तारे भागे हुए वे प्रेमी हैं जिन्हें पृथ्वी पर पनाह नहीं मिली। सो रात होते ही प्रकाशित...
Girl smiling

स्त्री और प्रेम

'Stree Aur Prem', a poem by Nidhi Agarwal जब देना चाहो किसी स्त्री को प्रेम एक पिता बनकर जाना चूमना उसके माथे को बालों को सहलाना आगोश में भर...
Woman with red scarf, Girl

प्रेम करना चौखट लाँघना है

'Prem Karna Chaukhat Laanghna Hai', a poem by Rashmi Malviya बहुत सी स्त्रियाँ हैं जो प्रेम करती हैं ठीक मरने के पहले जो जानती हैं अब जीना सम्भव...
Two Women on the Shore, Abstract

भ्रम

पौराणिक कथाओं में प्रेम पढ़-पढ़कर मैं सम्मोहित थी प्रेम के ख़ूबसूरत और श्रेष्ठ आयामों पर मैं रीझ बैठी थी अब मैं प्रेम बुन रही थी! अपनी प्रेम कहानी का...
Girl, Tree, Silhouette, Dark, Woman

सिवा प्रेम के

'Siwa Prem Ke', a poem by Sunita Daga तुमने कहा था समझाकर मन को छोटा नहीं करते हैं उठो, मत बैठो उदास कितना कुछ है जीवन में केवल प्रेम ही...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)