Tag: World Literature

God, Abstract Human

सृष्टि कथा

दार्शनिक, प्रशिक्षित भौतिकविज्ञानी और धर्मशास्त्री विलियम बी. ड्रीस 2015 से तिलबुर्ग स्कूल ऑफ ह्यूमनिटिज़ में डीन और प्रोफ़ेसर के रूप में सेवाएँ दे रहे हैं।...

दूरियाँ

Excerpt from a poem 'To Duration' by Peter Handke अनुवाद: उपमा 'ऋचा' न जाने कब से मैं दूरियों के बारे में लिखना चाहता था। कोई निबन्ध नहीं कोई नाटक नहीं कोई...
Leopold Staff

लियोपोल्ड स्टाफ की कविताएँ

Poems by Leopold Staff, a Polish poet अनुवाद: आदर्श भूषण क्या तुम? तुम मुझे बुलबुल, गुलाबों और चाँद की प्रशंसा करने से मना करते हो, ये शायद लगते हों...
Maya Angelou

मुझे मत दिखाना अपनी दया

'On Aging', a poem by Maya Angelou, from 'And Still I Rise' अनुवाद: अनुराग तिवारी जब तुम मुझे ऐसे शांत बैठे देखोगे जैसे अलमारी में छूटा कोई...
Woman Standing near River, making Love sign

मैं

'I Am A Fountain, You Are my Water' - Zeynep Hatun अनुवाद: उपमा 'ऋचा' मैं झरना हूँ, तुम पानी हो मेरा, मैं बहता हूँ तुम से तुम...
The Country of the Blind, Face

अंधेर नगरी

एक पर्वतारोही एक दुर्घटना के बाद एक ऐसे नगरी में पहुँच जाता है जहाँ सभी लोग अंधे हैं और आँख और दृश्य जैसी कोई चीज़ होती है, नहीं जानते। वहाँ रहने के बाद वह निश्चय करता है कि वह उन लोगों को 'दृष्टि' से अवगत कराएगा। लेकिन क्या वह ऐसा कर पाता है? पढ़िए एच. जी. वेल्स की इस उम्दा कहानी में! अनुवाद उपमा 'ऋचा' द्वारा!
elvis died at the florida barber college

एल्विस फ़्लोरिडा बार्बर कॉलेज के पास मरा था

"दस बरस की उम्र में, मैं यह समझ नहीं पाता था कि एल्विस प्रेस्ली में ऐसा क्या था, जो हम बाक़ी लड़कों में नहीं! मेरा मतलब, उसके पास भी हम सबकी तरह एक सिर, दो हाथ और दो पैर थे। फिर उसमें ऐसा क्या छिपा था कि अनाथालय की तमाम हमउम्र लड़कियाँ उसकी उंगलियों पर नाचने को तैयार रहती थीं!"
Abdulla Pashew

ऐब-बीनों से

अब्दुल्ला पाशा मौजूदा दौर के विख्यात कुर्दी कवियों में से एक हैं। इनका जन्म 1946 में दक्षिणी कुर्दिस्तान में हुआ था। इन्होंने 'सोवियत संघ'...
Abdulla Pashew

इक़रारनामा

'The Contract' - Abdulla Pashew अँग्रेज़ी से अनुवाद: कुशाग्र अद्वैत अब्दुल्ला पाशा मौजूदा दौर के विख्यात कुर्दी कवियों में से एक हैं। इनका जन्म 1946 में...
Erich Fried

यह जो है

Poem: 'What It Is' - Erich Fried अनुवाद: पुनीत कुसुम यह बकवास है तर्क कहता है जो है, सो है कहता है प्रेम यह आपदा है आकलन कहता है यह दर्द के सिवा...
Ricardo Aleixo

मैं तुम्हें तुम्हारी गन्ध से जानता हूँ

रिकार्डो अलैक्जो का जन्म 1960 में मिनास गेराइस के बेलो होरीज़ोंटे में हुआ था। रिकार्डो अपनी समाज और दृश्यपरक कविताओं के लिए विख्यात हैं...
Tadeusz Rozewicz

गवाह

'Witness', a poem by Tadeusz Różewicz अनुवाद: पुनीत कुसुम मेरे दोस्त, तुम जानते हो मैं अन्दर हूँ लेकिन यूँ अचानक मत घुस आओ मेरे कमरे में सम्भव है...

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Suresh Jinagal

सुरेश जिनागल की कविताएँ: अक्टूबर 2020

ललेश्वरी बर्फ़ का सीना चीरकर उगे चिनार के नीचे बैठकर आग का कोई गीत गाती स्त्री सदियों की बर्फ़ को पिघला रही है उसकी ज़िद, उसका साहस...
Ganesh Shankar Vidyarthi

धर्म की आड़

इस समय, देश में धर्म की धूम है। उत्‍पात किये जाते हैं, तो धर्म और ईमान के नाम पर और ज़िद की जाती है,...
Ibne Insha

सब माया है

सब माया है, सब ढलती-फिरती छाया है इस इश्क़ में हमने जो खोया, जो पाया है जो तुमने कहा है, 'फ़ैज़' ने जो फ़रमाया है सब माया...
Sandeep Nirbhay

चिलम में चिंगारी और चरखे पर सूत

मेरे बच्चो! अपना ख़याल रखना आधुनिकता की कुल्हाड़ी काट न दे तुम्हारी जड़ें जैसे मोबाइलों ने लोक-कथाओं और बातों के पीछे लगने वाले हँकारों को काट दिया है जड़ों सहित वर्तमान...
Kunwar Narayan

अबकी अगर लौटा तो

अबकी अगर लौटा तो बृहत्तर लौटूँगा चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं कमर में बाँधे लोहे की पूँछें नहीं जगह दूँगा साथ चल रहे लोगों को तरेरकर न देखूँगा...
Poonachi - Perumal Murugan

पेरुमल मुरुगन – ‘पूनाची’

पेरुमल मुरुगन के उपन्यास 'पूनाची' से उद्धरण | Quotes by Perumal Murugan from 'Poonachi'   "मैं इंसानों के बारे में लिखने के प्रति आशंकित रहता हूँ;...
Leeladhar Jagudi

अपने अन्दर से बाहर आ जाओ

हर चीज़ यहाँ किसी न किसी के अन्दर है हर भीतर जैसे बाहर के अन्दर है फैलकर भी सारा का सारा बाहर ब्रह्माण्ड के अन्दर है बाहर सुन्दर...
Dhoomil

पटकथा

जब मैं बाहर आया मेरे हाथों में एक कविता थी और दिमाग़ में आँतों का एक्स-रे। वह काला धब्बा कल तक एक शब्द था; ख़ून के अँधेर में दवा का ट्रेडमार्क बन गया...
Venu Gopal

मेरा वर्तमान

मैं फूल नहीं हो सका। बग़ीचों से घिरे रहने के बावजूद। उनकी हक़ीक़त जान लेने के बाद यह मुमकिन भी नहीं था। यों अनगिन फूल हैं वहाँ। लेकिन मुस्कुराता हुआ...
Kedarnath Agarwal

हमारी ज़िन्दगी

हमारी ज़िन्दगी के दिन, बड़े संघर्ष के दिन हैं। हमेशा काम करते हैं, मगर कम दाम मिलते हैं। प्रतिक्षण हम बुरे शासन, बुरे शोषण से पिसते हैं। अपढ़, अज्ञान, अधिकारों से वंचित...
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