है ना?

एक इंजीनियर होकर लेखक / कवि होना होना कठिन है। आप साहित्य नहीं जानते (क्योंकि, निश्चित रूप से आपने इंजीनियरिंग को चुना था), आप...

मंटो पर सिनेमा के बाद का लेख

11 मई, 1912 को जन्मे सआदत हसन मंटो का साहित्यिक सफ़र अंग्रेज़ी फ्रेंच और रूसी लेखकों की रचनाओं के अनुवाद से आरंभ हुआ। शुरू के लेखन...

शिल्‍प और कला

"यूरोप में हरेक व्यक्ति कुछ-न-कुछ नाचना जानता है।" एक घुमक्कड़ के लिए नृत्य, संगीत और वाद्य यंत्र सीखना, ख़ास तौर से बाँसुरी सीखना कितना फायदेमंद हो सकता है, पढ़िए राहुल सांकृत्यायन के 'घुमक्कड़ शास्त्र' के इस लेख में!

स्वावलंबन

"बढ़िया-से-बढ़िया होटलों में ठहरने, बढ़िया-से-बढ़िया विमानों पर सैर करने वालों को घुमक्कड़ कहना इस महान शब्द के प्रति भारी अन्याय करना है।"

वसई का क़िला

"मेरा बचपन इस क़िले की खुरदुरी और सख़्त दीवारों पर चलते, इस की ढलवानों पर पांव जमाकर खड़ी हुई बकरीयों का दीदार करते और इस के पेट में मौजूद घास के हरे क़ालीनों पर लेटते, खेलते और दौड़ते गुज़रा है। वसई का क़िला आज भी अपनी तहज़ीब में उतनी ही झुर्रियों को जगह देने का क़ाइल है, जिससे उस का सोलहवीं सदी वाला मेक-अप ख़राब ना हो।"

विद्या और वय

"घुमक्कड़ को समाज पर भार बनकर नहीं रहना है। उसे आशा होगी कि समाज और विश्व के हरेक देश के लोग उसकी सहायता करेंगे, लेकिन उसका काम आराम से भिखमंगी करना नहीं है। उसे दुनिया से जितना लेना है, उससे सौ गुना अधिक देना है। जो इस दृष्टि से घर छोड़ता है, वही सफल और यशस्वी घुमक्कड़ बन सकता है।" घूमना अगर आपकी रूचि में है और आप यह निश्चित नहीं कर पा रहे हैं कि घूमने के लिए घर छोड़कर निकल जाने की सही उम्र क्या है और उससे पहले क्या-क्या ऐसे काम हैं जो आपको कर लेने चाहिए तो 'घुम्मकड़ शास्त्र' का यह लेख आपकी मदद कर सकता है! :)

मिथकों से रचनात्मक रिश्ता बनाना होगा!

मिथक को समझने और देखने के लिए बड़ी सलाहियत की ज़रूरत होती है। जब हम मिथक को यथार्थ की तरह देखते हैं तो हम...

प्रचलित हिन्दी की दुरूहता

"लगभग भारतवर्ष में बोली जानेवाली समस्त प्रधान भाषाओं का नमूना मैंने आपके सामने उपस्थित कर दिया, आप देखेंगे कि सभी भाषाओं में संस्कृत शब्दों का प्रयोग अधिकता से हो रहा है। जो तामिल, कनाड़ी और मलयालम् स्वतंत्र भाषाएँ हैं, अर्थात् आर्य भाषा से प्रसूत नहीं हैं, उनमें भी संस्कृत शब्दों की प्रचुरता है। उन भाषाओं को कोई स्पर्द्धा उर्दू से नहीं है, फिर वे क्यों संस्कृतगर्भित हैं?"

मेरे सपनों का भारत

"यदि भारत ने हिंसा को अपना धर्म स्वीकार कर लिया और यदि उस समय मैं जीवित रहा, तो मैं भारत में नहीं रहना चाहूँगा। तब वह मेरे मन में गर्व की भावना उत्पन्न नहीं करेगा। मैं भारत से उसी तरह बंधा हुआ हूँ, जिस तरह कोई बालक अपनी माँ की छाती से चिपटा रहता है; क्योंकि मैं महसूस करता हूँ कि वहाँ मुझे अपनी उच्चतम आकांक्षाओं की पुकार का उत्तर मिलता है। यदि किसी कारण मेरा यह विश्वास हिल जाए या चला जाए, तो मेरी दशा उस अनाथ के जैसी होगी जिसे अपना पालक पाने की आशा ही न रही हो।"

जंजाल तोड़ो

"घुमक्कड़ी का अंकुर क्या डंडे से पीटकर नष्ट किया जा सकता है?" अगर आप दुनिया घूमना चाहते हैं लेकिन घर से बाहर नहीं निकल पाते, क्योंकि आपकी माता आपको इमोशनल ब्लैकमेल करती हैं या आपके पिता डाँट-डपट कर आपको घर पर बैठा देते हैं तो यह लेख आपके और आपके माता-पिता के लिए बहुत ज़रूरी है.. बस, अपने माता-पिता को अपने रिस्क पर पढ़ाइएगा! ;)

हिन्दुस्तानी भाषा की उत्पत्ति

"भाषा जिस पथ से चल पड़ती है, व्याकरण उसका साक्षीमात्र है।"

ठेठ हिन्दी और बोलचाल की भाषा

अब प्रश्न यह होगा कि क्या ठेठ हिन्दी बोलचाल की भाषा कही जा सकती है? मेरा विचार है, नहीं, कारण बतलाता हूँ, सुनिये। जिन प्रान्तों...
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