लिखने के तीन प्रश्न
लिखने की कला मानव इतिहास में एक धूमकेतु की तरह उपजी थी। मनुष्यता की यात्रा में, ध्वनियों और आवाज़ों का लिखा जाना, एक अप्रतिम...
शादी: एक ग़ैर-ज़रूरी सोशल एग्रीमेंट
हालांकि मैं ये तहरीर लिखते वक़्त जानता हूँ कि मुझे भी कभी न कभी इस फन्दे में पाँव रखना पड़ सकता है और वो...
मैं अफ़साना क्योंकर लिखता हूँ
मुअज़्ज़िज़ ख़्वातीन व हज़रात!
मुझसे कहा गया है कि मैं यह बताऊँ कि मैं अफ़साना क्योंकर लिखता हूँ। यह 'क्योंकर' मेरी समझ में नहीं आया—...
मृत्यु-दर्शन
घुमक्कड़ की दुनिया में भय का नाम नहीं है, फिर मृत्यु की बात कहना यहाँ अप्रासंगिक-सा मालूम होगा। तो भी मृत्यु एक रहस्य है,...
कलाकार जन्मजात होता है या बनता है?
हम में से किसी कलाकार को यह दावा करने का हक़ नहीं है कि वह एक अद्वितीय व्यक्ति है और ईश्वर ने उसे विशेष...
होना/सोना एक ख़ूबसूरत दुश्मन के साथ
(परम पावन पूज्यपाद नामवराचार्य के श्री चरणों में)
इन औरतों ने तो मार मुसीबत खड़ी कर रखी है। प्राण ले लिए। न जाने कहाँ-कहाँ से...
सवा लाख का ग़ालिब
ये बात तो तय है कि ग़ालिब ख़ुद चाहे क़र्ज़ और ग़रीबी की ज़िन्दगी गुज़ारकर मरा हो, मगर उसने अपने मरने के बाद बहुत...
23 मार्च, एक जज़्बाती याद : कवि पाश
23 मार्च! शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की शहादत की तिथि। यह गज़ब का इत्तेफ़ाक़ है कि शहादत की यही तारीख़ उसकी भी है, जिसने भगत...
विद्यार्थी और राजनीती
इस महत्त्वपूर्ण राजनीतिक मसले पर यह लेख जुलाई, 1928 में 'किरती' में छपा था। उन दिनों अनेक नेता, विद्यार्थियों को राजनीति में हिस्सा न...
















