फ़र्ज़ करो हम अहल-ए-वफ़ा हों
फ़र्ज़ करो हम अहल-ए-वफ़ा हों, फ़र्ज़ करो दीवाने हों
फ़र्ज़ करो ये दोनों बातें झूठी हों, अफ़्साने हों
फ़र्ज़ करो ये जी की बिपता, जी से...
घास तो मुझ जैसी है
घास भी मुझ जैसी है
पाँव-तले बिछकर ही ज़िन्दगी की मुराद पाती है
मगर ये भीगकर किस बात की गवाही बनती है
शर्मसारी की आँच की
कि जज़्बे की...
ख़ूबसूरत मोड़
'Khoobsurat Mod' - Sahir Ludhianvi
चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों
न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की
न तुम मेरी तरफ़...
मुझसे पूछो
'Mujhse Poochho', a nazm by Tasneef Haidar
मुझसे पूछो
मेरी सारी उम्र
दूसरे लोगों की तक़लीद में गुज़री है
हुक्म की इक गहरी तामील में गुज़री है
एक लकीर...
भली-सी एक शक्ल थी
भले दिनों की बात है
भली-सी एक शक्ल थी
न ये कि हुस्न-ए-ताम हो
न देखने में आम-सी
न ये कि वो चले तो कहकशाँ सी रहगुज़र लगे
मगर...
नया हुक्मनामा
'Naya Hukmnama', a nazm by Javed Akhtar
किसी का हुक्म है सारी हवाएँ
हमेशा चलने से पहले बताएँ
कि उन की सम्त क्या है
किधर जा रही हैं
हवाओं...
मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
ज़ालिम को जो न रोके वो शामिल है ज़ुल्म...
औरतो! रास्ता दिखाओ हमें
औरतो! रास्ता दिखाओ हमें
हम जिन्हें नफ़रतों के मौसम में
मौत की फ़स्ल बोना आती है
हम जिन्हें आँधियों के आँगन में
अपनी हर शम'अ खोना आती है
सरहदों,...
कोई ये कैसे बताए
'Koi Yeh Kaise Bataye', by Kaifi Azmi
कोई ये कैसे बताए कि वो तन्हा क्यूँ है
वो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ है
यही...














