घुमक्कड़

वह मुझे चौराहे पर मिला। एक व्यक्ति जिसके पास केवल एक लबादा और एक छड़ी थी, और जिसके चेहरे पर दर्द का एक आवरण...

ग़लती का सुधार

"कौन हो तुम?" "तुम कौन हो?" "हर-हर महादेव… हर-हर महादेव!" "हर-हर महादेव!" "सुबूत क्या है?" "सुबूत…? मेरा नाम धरमचंद है।" "यह कोई सुबूत नहीं।" "चार वेदों में से कोई भी बात...

राष्ट्र का सेवक

राष्ट्र के सेवक ने कहा— "देश की मुक्ति का एक ही उपाय है और वह है नीचों के साथ भाईचारे का सुलूक, पतितों के...

ताकत और रोमांच

'ताकत और रोमांच' - खलील जिब्रान (अनुवाद: बलराम अग्रवाल) अगर कविता लिखने की ताकत और अनलिखी कविता के रोमांच के बीच किसी एक को चुनने...

मतलब की बात

एक पंडित जी अपने लड़के को पढ़ा रहे थे.. 'मातृवत् परदारेषु' - "पर स्त्री को अपनी माँ के बराबर समझें।" लड़का मूर्ख था कहने लगा- "तो क्या पिता जी, आप मेरी स्त्री को माता के तुल्य समझते हैं?"

अन्धेर नगरी

अनुवाद - बलराम अग्रवाल राजमहल में एक रात भोज दिया गया। एक आदमी वहाँ आया और राजा के आगे दण्डवत लेट गया। सब लोग उसे देखने...

एक छोटी दंतकथा

"आह!", चूहे ने कहा, "पूरी दुनिया प्रतिदिन छोटी होती जा रही है। शुरुआत में यह इतनी बड़ी थी कि मैं डर गया था।

करामात

'करामात' - सआदत हसन मंटो लूटा हुआ माल बरामद करने के लिए पुलिस ने छापे मारने शुरू किए। लोग डर के मारे लूटा हुआ माल रात...

चतुर कुत्ता

अनुवाद: बलराम अग्रवाल एक चतुर कुत्ता एक दिन बिल्लियों के एक झुण्ड के पास से गुज़रा। कुछ और निकट जाने पर उसने देखा कि वे कोई...

प्रेम

"प्रेम मृत्यु और मृत्यु के डर से कहीं अधिक शक्तिशाली है। केवल प्रेम पर ही जीवन टिका हुआ है और आगे बढ़ रहा है।"

कविता

"जितना बोल चुका हूँ उससे ज्यादा कविता मेरे हृदय में हैं और जितना लिख चुका हूँ उससे कहीं ज्यादा मेरे खयालों में है..."

विजय ‘गुंजन’ की लघु कथाएँ

विजय 'गुंजन' की लघु कथाएँ 'खांसी और खामोशी' रात के ग्यारह बजे थे। रेल के स्लीपर क्लास के डिब्बे में एक बूढ़े व्यक्ति की खाँसी से...
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