मैं कहानीकार नहीं, जेबकतरा हूँ

मेरी ज़िन्दगी में तीन बड़ी घटनाएँ घटी हैं। पहली मेरे जन्म की। दूसरी मेरी शादी की और तीसरी मेरे कहानीकार बन जाने की। लेखक के...

बलराज साहनी का असंतोष

भारतीय सिनेमा का शताब्दी वर्ष अभिनेता बलराज साहनी का भी जन्म शताब्दी वर्ष है। उनका जन्म 1 मई 1913 को हुआ था। बलराज साहनी...

दादा साहब फाल्के – भारतीय सिनेमा के पितामह

धुंडीराज गोविन्द फाल्के यानि दादा साहेब फाल्के को भारतीय फिल्मों का जनक माना जाता है। जब अमेरिका में डी. डब्ल्यू. ग्रिफिथ अपनी पहली फिल्म...

क्यों ज़रूरी है उर्दू को धार्मिक पहचान से बाहर निकालना?

इस वक़्त मेरे पास बहुत-सी किताबें नहीं हैं कि मैं अपना कहा सिद्ध करने के लिए मोटे-मोटे तर्क प्रस्तुत कर सकूं। यह ज़रूर है...

बाईस गज में सिमटे चौबीस वर्ष

"इंग्लैंड के दौरे से सचिन अपने पिता की शवयात्रा में भाग लेने लौटे और चिता के ठंडा होने के पहले शेष दौरा पूरा करने इंग्लैंड लौटे। अपने काम को इस तरह निभाने को जीवन का धर्म कहते हैं। सड़कों पर हुड़दंग करना धर्म नहीं है।"

अथातो घुम्मकड़ जिज्ञासा

अथातो घुम्मकड़ जिज्ञासा | Athato Ghumakkad Jigyasa संस्कृत से ग्रंथ को शुरू करने के लिए पाठकों को रोष नहीं होना चाहिए। आखिर हम शास्‍त्र लिखने...

मैं क्यों लिखता हूँ

मैं क्यों लिखता हूँ? यह एक ऐसा सवाल है कि मैं क्यों खाता हूँ.. मैं क्यों पीता हूँ.. लेकिन इस दृष्टि से मुख़्तलिफ़ है...

मैं नास्तिक क्यों हूँ

भगत सिंह का लेख 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' | 'Why I Am An Atheist', an article by Bhagat Singh एक नया प्रश्न उठ खड़ा हुआ...

मुराकामी में ऐसा क्या है?

मुराकामी में ऐसा क्या है? हारुकी मुराकामी जापान के मशहूर लेखक हैं, जिनके नॉवेल और कहानियां पढ़ने वालों का दुनिया भर में एक बहुत बड़ा...

तुम दिन भर करती क्या हो!

हमारे समाज में सदियों से एक स्त्री को लेकर आम जन की अवधारणाएं और अपेक्षाएं एक कुंठित सोच से घिरी रही हैं। पुरुष वर्ग...

कविता का कोई अर्थ नहीं है!

"अक्सर सब दूसरी कलाओं की तुलना में संगीत को बड़ा महत्त्व देते हैं। लेकिन ऐसा क्यों है? क्यों संगीत को ही शुद्ध कला माना गया? इसीलिए माना गया क्योंकि दूसरी कलाओं की तुलना में उसे किसी निश्चित अर्थ में रिड्यूस करना सबसे अधिक मुश्किल है। और मैं यह मानता हूँ कि कविता की असली चुनौती यह होती है कि वह संगीत के उस स्तर को कैसे छू सकती है!"

हरिवंशराय बच्चन की पहली और अन्तिम कविता

यह जानना एक आम जिज्ञासा है कि एक कविता लिखते समय किसी कवि के मन में क्या चल रहा होता है! इसके बावजूद कि...
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