ग़ज़ल – एक परिचय

ग़ज़ल ने पिछले तीन, साढ़े तीन सौ वर्षों में एक लम्बा सफ़र तय किया है। पहले ये क़सीदों का हिस्सा थी, जो बादशाहों की...

नई दिल्ली बुक फेयर में मिलिए ‘प्लूटो’ से

नई दिल्ली बुक फेयर जारी है। लोग पूरा-पूरा दिन घूमकर किताबें देख रहे हैं, खरीद रहे हैं और दोस्तों को बता भी रहे हैं।...

जब भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने लिखीं अंग्रेज़ों की प्रशंसा में कविताएँ

भारतेन्दु हरिश्चंद्र हिन्दी आधुनिक काल के प्रथम प्रमुख कवि माने जाते हैं। भारतेन्दु का कार्यकाल लगभग उसी समय का रहा जब 1857 की क्रांति...

दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2018 में खरीदें ये 15 हिन्दी किताबें

हिन्दी में नया क्या लिखा जा रहा है, यह इंटरनेट के युग में भी ढूंढ पाना इतना आसान नहीं नज़र आता। इतनी पर्याप्त जानकारी...

हरिवंशराय बच्चन: जन्मदिन पर विशेष

नोट: यह लेख मूल रूप से हिन्दी अखबार अमर उजाला के ऑनलाइन पोर्टल 'काव्य' के लिए लिखा गया था। यहाँ पुनः प्रस्तुत है। हरिवंशराय बच्चन...

दुविधा (मुक्तिबोध की कविता ‘मुझे कदम कदम पर’ से प्रेरित)

कविताएँ अपने पाठकों के भीतर बहुत कुछ जगा देती हैं और उन्हें बहुत जगह भी देती हैं जिसमें कुछ न कुछ चुपचाप बैठा रहता...

हिन्दी हाइकु

पिछले दिनों रोशनदान ग्रुप द्वारा आयोजित पोएट्री वर्कशॉप में लक्ष्मी शंकर वाजपेयी जी द्वारा हाइकु, माहिया और दोहे जैसे काव्य रूपों को संक्षेप में...

कुँवर नारायण: अबकी बार लौटा तो..

लेखक लक्ष्मण राव को एक वीडियो में कहते सुना था कि कोई कवि या लेखक पचास वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद जन्मता...

हिन्दी मुकरी

चार पंक्तियों की एक पहेली है जो एक लड़की अपनी किसी दोस्त से बूझती है। वो लड़की अपने प्रीतम यानि लवर को याद करते हुए तीन पंक्तियाँ कहती है और जब चौथी पंक्ति में उसकी दोस्त पूछती है कि क्या तुम अपने साजन की बात कर रही हो तो लड़की झट मुकर जाती है और किसी अन्य चीज़ का नाम ले लेती है, लेकिन एक ऐसी चीज़ का नाम जो पहली तीन पंक्तियों में उसके द्वारा किए गए उसके साजन के वर्णन से मिलती हो..।

बच्चन की त्रिवेणी – मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश

आलोचना अच्छी है, अगर करनी आती हो। और अगर लेनी आती हो तो और भी। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि न तो कोई...

संग-ए-मील

10 सितंबर 2017, रविवार के दिन जब आधी दिल्ली, शाम के मनोरंजन के प्लान बना रही थी, तब दिल्ली का एक कोना सुबह से...
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