ख़्वाबों के ब्योपारी
हम ख़्वाबों के ब्योपारी थे
पर इसमें हुआ नुक़सान बड़ा
कुछ बख़्त में ढेरों कालक थी
कुछ अब के ग़ज़ब का काल पड़ा
हम राख लिए हैं झोली...
ज़िन्दगी से डरते हो
ज़िन्दगी से डरते हो!
ज़िन्दगी तो तुम भी हो, ज़िन्दगी तो हम भी हैं!
ज़िन्दगी से डरते हो?
आदमी से डरते हो
आदमी तो तुम भी हो, आदमी...
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है
ये महलों, ये तख़्तों, ये ताजों की दुनिया
ये इंसाँ के दुश्मन समाजों की दुनिया
ये दौलत के भूखे रिवाजों की दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाए...
ज़ुल्म के ख़िलाफ़ नज़्में
1
ये जो अंधे हुक्मरां का हुक्म है
आदमी के साथ कैसा ज़ुल्म है
अपने रिश्तों और ज़मीनों पर मुदाम
आदमी क्यों काग़ज़ों का हो ग़ुलाम
कौन सा काग़ज़...
तुम नहीं आए थे जब
तुम नहीं आए थे जब, तब भी तो मौजूद थे तुम
आँख में नूर की और दिल में लहू की सूरत
दर्द की लौ की तरह,...
औरत और नमक
इज़्ज़त की बहुत-सी क़िस्में हैं
घूँघट, थप्पड़, गन्दुम
इज़्ज़त के ताबूत में क़ैद की मेख़ें ठोंकी गई हैं
घर से लेकर फ़ुटपाथ तक हमारा नहीं
इज़्ज़त हमारे गुज़ारे...
साँझ भई परदेस
बे-किवाड़ दरवाज़े
राह देखते होंगे
ताक़, बे-चराग़ों के
इक किरन उजाले की
भीख माँगते होंगे
क्यों झिझक गए राही
क्यों ठिठक गए राही
ढूँढने किसे जाओ
इंतिज़ार किसका हो
रास्ते में कुछ साथी
रह बदल...
















