हिज्र

ये लफ़्ज़ उसी मौसम का है जब तुम हम रोया करते थे अपने अपने आसमानों में जब तारे सोया करते थे और गर्दिश चन्दा मामा की कुछ ज़र्रे करते...

मीरा और ख़ुसरो की नज़र

कौन हो तुम और क्या हो मेरी जड़ हो जल हो गुल हो फल हो छाल तुम्हीं तुम ही जंगल हो छाँव औ आसरा गाँव तुम्हीं मैं भटका भूला भूखा बिसरा भीत भिक्षु बन बनवासी तेरे गलियारों से पगडण्डी मैं चले चला मेरा सिद्ध नाम तुम अर्थ सभी मिलना है...

रोटियों पर ख़ून के छींटें हैं

रोटियों पर ख़ून के छींटें हैं हम ने तस्वीर देखी है कटे हुए अंगों सर, पैर, हाथ, बीच से दो टुकड़े हुए शरीर पर हरी-हरी घास डाल दी गई है इन्हीं...

क़ब्र

शहज़ादा लिपटता है मुझसे और दूर कहीं चिड़िया को साँप निगलता है साँसों में घुलती हैं साँसें और ज़हर उतरता जाता है लम्हात के नीले क़तरों में कानों में...

औरत

उठ मिरी जान मिरे साथ ही चलना है तुझे क़ल्ब-ए-माहौल में लर्ज़ां शरर-ए-जंग हैं आज हौसले वक़्त के और ज़ीस्त के यक-रंग हैं आज आबगीनों में तपाँ...

मकान

आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है आज की रात न फ़ुटपाथ पे नींद आएगी सब उठो, मैं भी उठूँ, तुम भी उठो, तुम भी...

चंद रोज़ और मेरी जान

चंद रोज़ और मेरी जान फ़क़त चंद ही रोज़ ज़ुल्म की छाँव में दम लेने पे मजबूर हैं हम और कुछ देर सितम सह लें, तड़प...

किताबें

किताबें झाँकती हैं बन्द अलमारी के शीशों से बड़ी हसरत से तकती हैं महीनों अब मुलाक़ातें नहीं होतीं जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं, अब अक्सर गुज़र...

मेरे गीत तुम्हारे हैं

अब तक मेरे गीतों में उम्मीद भी थी, पसपाई भी मौत के क़दमों की आहट भी, जीवन की अंगड़ाई भी मुस्तक़बिल की किरनें भी थीं, हाल...

वो मर गई थी

उसके ज़हरी होंठ काले पड़ गए थे उसकी आँखों में अधूरी ख़्वाहिशों के देवताओं के जनाज़े गड़ गए थे उसके चेहरे की शफ़क़ का रंग घायल हो चुका था उसके जलते...

उनकी तस्वीर देखकर

आज क्या है जो मिला शोख़ निगाहों को क़रार? क्या हुआ हुस्न की मासूम हयाओं का वक़ार आज क्यूँ तुम मुझे देखे ही चले जाते हो? दफ़अतन...

सोने से पहले एक ख़याल

मुझे नवम्बर की धूप की तरह मत चाहो कि इसमें डूबो तो तमाज़त में नहा जाओ और इससे अलग हो तो ठण्डक को पोर-पोर में उतरता देखो मुझे...
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