‘कैवल्य’ – आत्मावलोकन की कविताएँ
आत्मावलोकन और प्रेम आखरों का संग्रह है - कैवल्य
किताब - कैवल्य (कविता संग्रह)
रचनाकार - अंजना टंडन
'कैवल्य' अंजना टंडन का पहला कविता संग्रह है जो...
‘देस’ – विनोद पदरज
सबसे पहले मेरे कहने के साहस को आलोचक दृष्टि से न देखकर बल्कि पाठकीय दृष्टिकोण से देखने का अनुरोध है। हमारा सारा इतिहास स्मृतियों...
मंटो और ग़ालिब की दोज़ख
जिस किताब की बात आज मैं करने जा रहा हूँ उसे रबिशंकर बल ने मूल रूप से बंगला में लिखा है और इसका अनुवाद...
निषिद्ध – एक प्रहार लैंगिक विषमता के विरुद्ध
निषिद्ध — एक आवाज़ …लैंगिक विषमता के विरुद्ध
जैसा कि सर्वविदित है तसलीमा नसरीन ने हमेशा ही समाज में औरतों को समानता का अधिकार दिलाने,...
सियाह औ सुफ़ैद से कहीं अधिक है यह ‘सियाहत’
किताब समीक्षा: डॉ. श्रीश पाठक - आलोक रंजन की किताब 'सियाहत'
आज की दुनिया, आज का समाज उतने में ही उठक-बैठक कर रहा जितनी मोहलत उसे...
‘गगन दमामा बाज्यो’ और इंकलाब शुरू!
किताब: 'गगन दमामा बाज्यो'
लेखक: पीयूष मिश्रा
प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन समूह
मूल्य: ₹125 मात्र
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भगत सिंह - कैसी छवि बनती है यह नाम सुनकर ? टोपी पहने हुए...
यशपाल का ‘झूठा सच’
भारतीय स्वाधीनता संग्राम के एक क्रांतिकारी होने से लेकर हिन्दी लेखक बनने तक का सफर तय करने वाले यशपाल का उपन्यास 'झूठा सच' भारत...
गवाचीयाँ गल्लां – अनवर अली
"हिंदू मुसलामानों की तमाम बातें सुनाते हुए अनवर ख़ुद कहीं भी मज़हबी या कट्टर नहीं नज़र आते। अपनी जवानी की हिमाक़तें, बचपन की बेवकूफ़ियाँ आप क़ुबूल करते चलते हैं। इसलिए किताब किसी मक़ाम पर भी किसी एक ज़ात के ख़िलाफ़ या किसी एक के हक़ में खड़ी होती ही नहीं है, बल्कि इस तरह की हर अपरिपक्वता की खिल्ली उड़ाती अपनी राह चलती जाती है।"
मॉरी से मुलाक़ात
अमेरिकी लेखक और स्तम्भकार मिच एलबॉम की किताब 'ट्यूज़डेज़ विद मॉरी' (Tuesdays with Morrie) एक मशहूर और प्रशंसित किताब है। इस किताब में मिच...
उम्मीदों का अफ़साना – ‘बाहिर’
उम्मीदों का अफ़साना - 'बाहिर'
(समीक्षा: प्रदुम्न आर. चौरे)
"आते हैं राहों में मसाइब कई,
यूँ ही नहीं होता करिश्मा कोई।"
यह शेर मैंने पॉल ए कॉफ़मेन द्वारा...
‘पांच एब्सर्ड उपन्यास’ – नरेन्द्र कोहली
'पांच एब्सर्ड उपन्यास' - नरेन्द्र कोहली
नरेन्द्र कोहली की किताब 'पाँच एब्सर्ड उपन्यास' पर आदित्य भूषण मिश्रा की टिप्पणी!
मैंने जब किताब के ऊपर यह नाम...
नरेन्द्र कोहली की ‘क्षमा करना जीजी’
'क्षमा करना जीजी' - नरेन्द्र कोहली
आज सुबह "क्षमा करना जीजी" पढ़ना शुरू किया. यह नरेन्द्र कोहली लिखित सामाजिक उपन्यास है. यह अपने आप में...

















