‘पाकिस्तान का मतलब क्या’ – एक टिप्पणी

'पाकिस्तान का मतलब क्या' - एक टिप्पणी असग़र वजाहत की किताब 'पाकिस्तान का मतलब क्या' पर आदित्य भूषण मिश्रा की एक टिप्पणी मैं अभी पिछले दिनों,...

रंग तमाम भर चुकी सुब्ह ब-ख़ैर ज़िन्दगी..

जाने माने युवा शायर और युवा साहित्य अकादेमी विजेता अमीर इमाम की किताब 'सुब्ह ब-ख़ैर ज़िन्दगी' कुछ ही दिनों पहले रेख़्ता बुक्स से प्रकाशित...

‘आधे-अधूरे’: अपूर्ण महत्त्वाकांक्षाओं की कलह

'मोहन राकेश का नाटक आधे अधूरे' - यहाँ पढ़ें   मोहन राकेश का नाटक 'आधे-अधूरे' एक मध्यमवर्गीय परिवार की आंतरिक कलह और उलझते रिश्तों के साथ-साथ...

‘हीरा फेरी’ – सुरेन्द्र मोहन पाठक का इकसठ माल

जितना बड़ा नाम सुरेन्द्र मोहन पाठक हिन्दी के अपराध लेखन या पोपुलर साहित्य में रखते हैं, उस हिसाब से आज भी मुझे लगता है...

कॉरपोरेट कबूतर – कहानियों की मीठी गुटर-गूँ

अय्यारों से चलकर यथार्थवाद और फिर मनोविश्लेषणों तक आने वाली हिन्दी कहानी भी कभी केवल 'कहानी' ही रही होगी। जैसे हमारे बचपन में हमें...

विजय तेंडुलकर का मराठी नाटक ‘गिद्ध’ (गिधाड़े)

'गिद्ध' प्रसिद्ध मराठी नाटककार एवं लेखक विजय तेंडुलकर के एक मराठी नाटक 'गिधाड़े' का हिन्दी अनुवाद है। अनुवादक हैं वसंतदेव देसाई। विजय तेंडुलकर ने...

‘अपनी अपनी बीमारी’ – हरिशंकर परसाई की व्यंग्य चिकित्सा

तीन-चार पेजों की बीस-इक्कीस कहानियों में अपने समाज की लगभग सारी बुराईयों को पृष्ठ-दर-पृष्ठ उघाड़ देना हरिशंकर परसाई ही कर सकते हैं। और वह...

एक अतिरिक्त ‘अ’ – रश्मि भारद्वाज

भारतीय ज्ञानपीठ के जोरबाग़ वाले बुकस्टोर में एक किताब खरीदने गया था। खुले पैसे नहीं थे तो बिलिंग पर बैठे सज्जन ने सुझाया कि...

The Night Train at Deoli – Ruskin Bond

बहुत अच्छे लेखकों के बारे में यह एक आम धारणा है कि उन्हें उनकी मूल भाषा में ही पढ़ा जाना चाहिए। रस्किन बॉन्ड, जिन्होंने...

जगदीश चंद्र की ‘धरती धन न अपना’

Book Review: 'Dharti Dhan Na Apna' - Jagdish Chandra 'धरती धन न अपना' पंजाब के दोआबा क्षेत्र के दलितों की कहानी है जिसे लेखक ने...

‘आज़ादी मेरा ब्रांड’ – अनुराधा बेनीवाल

"आज़ादी बड़ी अनोखी-सी चिड़िया है, यह है तो आपकी, लेकिन समय-समय पर इसको दाना डालना होता है। अगर आपने दाना उधार लिया तो चिड़िया भी उधार की हो जाती है।"

नई हिन्दी की शोस्टॉपर – रवीश कुमार की ‘इश्क़ में शहर...

मैं आज स्माल टाउन-सा फ़ील कर रहा हूँ... और मैं मेट्रो-सी। पढ़ने में सामान्य लेकिन शिकायत और शरारत दोनों दिखाती इन पंक्तियों से शुरू होने वाली...
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