जुमलों की डकार

बातों और जुमलों का भोजन करो तो कई दिनों तक डकार आती है। मियां - "क्या बात है भई मशगूल, आज बड़ी डकार आ रही...

आ तारीख़

आ तारीख़ गले लगा लूँ धड़कन की तड़पन समझा दूँ प्यार का पारा बारह पर है दो डिग्री और पार करा दूँ प्रेम विनय व प्रणय प्रतिज्ञा वचन कथन...

ठिठुरता हुआ गणतंत्र

"रेडियो टिप्पणीकार कहता है - 'घोर करतल-ध्वनि हो रही है।' मैं देख रहा हूँ, नहीं हो रही है। हम सब तो कोट में हाथ डाले बैठे हैं। बाहर निकालने का जी नहीं हो रहा है। हाथ अकड़ जाएँगे। लेकिन हम नहीं बजा रहे हैं, फिर भी तालियाँ बज रहीं हैं।"

अच्छी हिन्दी

"एक तो हमारा व्‍याकरण ही कुछ गलत है। अब यह कोई बात हुई कि 'घड़ी' का पुल्लिंग 'घड़ा' होता है और 'संतरी' का 'संतरा'। यूँ कभी-कभी संतरी भी पु‍ल्लिंग होता है पर कुछ कम। छोटी-सी 'शंका' हो तो जान-बूझकर भी आप उसे 'लघुशंका' नहीं कह सकते।" "वह जब भी किसी कन्या से अपनी ‘टंग’ दिखाने को कहता था तो कुछ इस अंदाज से कहता था कि लड़की जो होती थी वह जीभ के स्‍थान पर शरमाते-शरमाते अपनी ‘टाँग’ दिखाती थी। थोड़े अनुभव के बाद स्थिति यह हो गयी कि टाँगों का विशेषज्ञ वह खूबसूरत और नौजवान डॉक्टर अपनी गलती समझ गया और अब वह उन बालिकाओं से ‘जुबान’ दिखाने को कहने लगा। मगर यहाँ फिर वही हादसा हो गया। वह लड़की की ठुड्डी पकड़ता, उसकी चितवन से चितवन मिलाता और बहुत धीमे से कहता कि ‘हम तुम्हारा जोबोन (जुबान) देखना माँगता।’ एकाध लड़की ने अपना जोबोन (जोबन) उसे दिखा भी दिया जिसके फलस्वरूप वह गरीब उस इलाके से कहीं दूर चला गया। उसके चले जाने से उस क्षेत्र की युवतियाँ काफी दु:खी रहीं।"

लाख नाऊ नहीं, करोड़ नाऊ

"लखनऊ की निस्बत सुना है, पहले वहाँ नाई आबाद थे और उनकी एक लाख की बस्ती थी, लाख नाई से लाख नाऊ हुआ और लाख नाऊ से लखनऊ बन गया।"

कुत्ते

"किसी बाईसकिल वाले ने घंटी बजाई तो लेटे-लेटे ही समझ गये कि बाईसकिल है। ऐसी छिछोरी चीज़ों के लिए वो रास्ता छोड़ देना फ़क़ीरी की शान के ख़िलाफ़ समझते हैं।"

अर्थ-विवशता

"अर्थव्यवस्था की अवस्था के अर्थों की अर्थी सज रही है।" "आने-पाई, चवन्नी-अठन्नी वाला ₹पया हज़ारी होकर भी डालर के कालर तक नहीं पहुँच पाया।"

हमने कुत्ता पाला

"एक अजीब बात जो इसमें देखी ये थी कि सारी रात न ख़ुद सोता और न हमें सोने देता। मुश्किल से आँख लगती कि वो ज़ोर-ज़ोर से बे-तहाशा भौंकने लगता! अब वो इसलिए भौंक रहा है कि हवा ज़रा तेज़ क्यों चल रही है या चाँद बादलों की ओट में क्यों छुप गया है, या हमारा हमसाया उठकर पानी क्यों पी रहा है..."

टब का समुंदर

"टिड्डा साहब टब के समुंद्र में जान दे रहे हैं। आरज़ू ये है कि मजनूँ और फ़रहाद के रजिस्टर में उनका नाम भी लिखा जाए। डूब कर मरने का सिला उनको ही मिले। हर्गिज़ नहीं, मैं तुझको मरने ही न दूँगा। ज़िंदा निकाल कर फेंक दूँगा। देखो क्योंकर तेरा नाम दफ़्तर-ए-इश्क़ में लिखा जाएगा।"

बच्चे

"ख़ुदा जाने आजकल के बच्चे किस क़िस्म के बच्चे हैं। हमें अच्छी तरह याद है कि हम बक़रईद को थोड़ा सा रो लिया करते थे और कभी-कभार कोई मेहमान आ निकला तो नमूने के तौर पर थोड़ी सी ज़िद कर ली, क्योंकि ऐसे मौक़े पर ज़िद कारआमद हुआ करती थी। लेकिन ये कि चौबीस घंटे मुतवातिर रोते रहें।"

लीडर-लाला

लीडर एक खास किस्‍म का समझदार जंतु होता है, जो हर मुल्‍क और मिल्‍लत में पाया जाता है। उसे कौम के सर पर सवार...

मिस चिड़िया की कहानी

एक चिड़िया से उसका एक अंडा टूट जाने पर चिड़ा गुस्सा होकर चिड़िया को सुनाने लगता है.. लेकिन चिड़िया उस चिड़े को ऐसा जवाब देती है कि चिड़ा अवाक! और जब बचे हुए अंडे से मिस छोटी चिड़िया जन्म लेती हैं तो उसकी बातें सुनकर चिड़ा और चिड़िया दोनों अवाक! इस अवाक होने का कारण पढ़िए इस बेहतरीन हास्य-व्यंग्य में!
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