तक़्सीम

"इस सन्दूक के माल में से मुझे कितना मिलेगा।” सन्दूक पर पहली नज़र डालने वाले ने जवाब दिया, “एक चौथाई।” “बहुत कम है।” “कम बिल्कुल नहीं, ज़्यादा है.. इसलिए कि सबसे पहले मैंने ही इस पर हाथ डाला था।” “ठीक है, लेकिन यहाँ तक इस कमर तोड़ बोझ को उठा के लाया कौन है?” “आधे आधे पर राज़ी होते हो?” “ठीक है… खोलो सन्दूक।”

गली की तरफ खुलती खिड़की

"कोई भी व्यक्ति जो अकेला जीवन जीता है और फिर भी यदा-कदा कहीं जुड़े रहना चाहता है - वह अधिक समय तक एक ऐसी खिड़की के बगैर नहीं रह पाएगा जो बाहर गली में खुलती हो।"

भिखारी

मैं एक सड़क के किनारे जा रहा था। एक बूढ़े जर्जर भिखारी ने मुझे रोका। लाल सुर्ख और आँसुओं में तैरती–सी आँखें, नीले होंठ, गंदे...

तआवुन

विभाजन ऐसा दौर रहा है जिसमें हर तरह की लूट-खसूट हुई, इंसान ने ख़ुद को इंसान न कहलाए जाने के सारे कारण पैदा किए.. लेकिन साथ ही इस दौर में इंसानियत का वह चेहरा भी देखने को मिला जिसका अंदाज़ा शायद उन इंसानों को भी नहीं था जो उसका माध्यम बने! पढ़िए कहानी एक ऐसे आदमी की, जो एक घर की लूट के दौरान लोगों से यह अपील कर रहा है कि वे सब तआवुन से, सहयोग से काम लें.. और बिना तोड़-फोड़ इस घर को लूटें.. कौन था वह आदमी?

बुद्धिजीवियों का दायित्व

लोमड़ी ने कौवे से मार्क्सवाद पर भाषण देने के लिए कहा जिससे कौवे की मुँह की रोटी नीचे गिर जाए, लेकिन कौवे भैया ठहरे बुद्धिजीवी, ऐसे ही थोड़े ही जाने देते!!

सोने की बेल्ट

परिवार की चिंता और सुरक्षा वह शक्ति है जो इंसान को कुछ भी करने पर मज़बूर कर देती है.. चाहे वह साल भर की अथक मेहनत हो या वेग में बहती नदी को पार करना...

कस्रे-नफ्सी

एक तरफ तलवार और गोलियाँ, दूसरी तरफ दूध और हलवा.. लोगों की खिदमत करने के तरीके भी विभाजित हुए थे एक दौर में...

सोना-जागना

"मेरी जवानी को बरबाद करके तू अब अपने-आप को सँवारती, इठलाती घूमती है। काश! मैंने पैदा होते ही तुझे मार दिया होता।"

मुनासिब कार्रवाई

"हम दोनों अपना आप तुम्‍हारे हवाले करते हैं... हमें मार डालो।" "हमारे धरम में तो जीव-हत्‍या पाप है..।"

हलाल और झटका

"इसको हलाल क्यों किया?" "मजा आता है इस तरह..।"

दीवारों की पीठ पर

एक दीवार थी। थोड़ी झुककर खड़ी रहती थी। उसके खड़े रहने के पीछे किसी बंटवारे का उद्देश्य नहीं था। कोई गहरा नाला था, जो...

सबसे ख़राब बोहनी

रतन की दुकान से 10 कटोरे एक साथ बिके.. वह खुश था और मंदिर भगवान के दर्शन के लिए गया.. वहाँ उसे कुछ ऐसा दिखा जिससे उसे लगने लगा कि उस सुबह उसकी बोहनी उतनी अच्छी न हुई होती तो बेहतर था..
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