वो सुब्ह कभी तो आएगी

वो सुब्ह कभी तो आएगी इन काली सदियों के सर से जब रात का आँचल ढलकेगा जब दुःख के बादल पिघलेंगे, जब सुख का सागर छलकेगा जब...

एक लड़की

काव्य-संकलन: 'शहर से गाँव' लिप्यंतरण: आमिर विद्यार्थी वह फूल-फूल बदन साँवली-सी एक लड़की जो रोज़ मेरी गली से गुज़र के जाती है सुना है वह किसी लड़के से प्यार करती है बहार...

तजज़िया

मैं तुझे चाहता नहीं लेकिन फिर भी जब पास तू नहीं होती ख़ुद को कितना उदास पाता हूँ गुम-से अपने हवास पाता हूँ जाने क्या धुन समायी रहती है इक...

अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो

मेरी बिटिया तुझे भी मैंने जन्मा था उसी दुःख से कि जिस दुःख से तेरे भाई को जन्मा तुझे भी मैंने अपने तन से वाबस्ता रखा उतनी ही मुद्दत...

रिमोट

दमकते चेहरे, घनेरी ज़ुल्फ़ें ये सरसराते हवाओं जैसे लिबास, जिस्मों का बाँकपन, दिलरुबा अदाएँ ये झिलमिलाते मकान, रंगीन शहर, चमकीली कारें ये सब मनाज़िर जो राहतों के...

कच्ची बस्ती

गलियाँ और गलियों में गलियाँ छोटे घर नीचे दरवाज़े टाट के पर्दे मैली, बद-रंगी दीवारें दीवारों से सर टकराती कोई गाली गलियों के सीने पर बहती गन्दी नाली गलियों के माथे पर बहता आवाज़ों का...

मगर मैं ख़ुदा से कहूँगा

मगर मैं ख़ुदा से कहूँगा ख़ुदा-वंद! मेरी सज़ा तू किसी और को दे कि मैंने यहाँ इस ज़मीं पर सज़ाएँ क़ुबूलीं हैं उनकी कि जिनसे मुझे सिर्फ़ इतना तअल्लुक़...

लो गर्द और किताबें

सुलगते दिन हैं, तवील तन्हाइयाँ मिरे साथ लेटे-लेटे फ़ज़ा से आँखें लड़ा रही हैं मिरे दरीचे के पास सुनसान रहगुज़र है अभी-अभी एक रेला आया था गर्द का जो...

ऊट-पटाँग

कानों की इक नगरी देखी, जिसमें सारे काने देखे एक तरफ़ से अहमक़ सारे, एक तरफ़ से सियाने थे कानों की इस नगरी के सब रीत...

बगिया लहूलुहान

हरियाली को आँखें तरसें, बगिया लहूलुहान! प्यार के गीत सुनाऊँ किस को शहर हुए वीरान! बगिया लहूलुहान! डसती हैं सूरज की किरनें, चाँद जलाए जान पग-पग मौत के...

एक लड़की

कैसा सख़्त तूफ़ाँ था कितनी तेज़ बारिश थी और मैं ऐसे मौसम में जाने क्यूँ भटकती थी वो सड़क के उस जानिब रौशनी के खम्भे से सर लगाए इस्तादा आने वाले...

हाथ खोल दिए जाएँ

मेरे हाथ खोल दिए जाएँ तो मैं इस दुनिया की दीवारों को अपने ख़्वाबों की लकीरों से सियाह कर दूँ और क़हर की बारिश बरसाऊँ और इस दुनिया को अपनी...
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