वो सुब्ह कभी तो आएगी
वो सुब्ह कभी तो आएगी
इन काली सदियों के सर से जब रात का आँचल ढलकेगा
जब दुःख के बादल पिघलेंगे, जब सुख का सागर छलकेगा
जब...
अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो
मेरी बिटिया
तुझे भी मैंने जन्मा था उसी दुःख से
कि जिस दुःख से तेरे भाई को जन्मा
तुझे भी मैंने अपने तन से वाबस्ता रखा
उतनी ही मुद्दत...
कच्ची बस्ती
गलियाँ
और गलियों में गलियाँ
छोटे घर
नीचे दरवाज़े
टाट के पर्दे
मैली, बद-रंगी दीवारें
दीवारों से सर टकराती
कोई गाली
गलियों के सीने पर बहती
गन्दी नाली
गलियों के माथे पर बहता
आवाज़ों का...
मगर मैं ख़ुदा से कहूँगा
मगर मैं ख़ुदा से कहूँगा
ख़ुदा-वंद! मेरी सज़ा तू किसी और को दे
कि मैंने यहाँ
इस ज़मीं पर
सज़ाएँ क़ुबूलीं हैं उनकी
कि जिनसे मुझे सिर्फ़ इतना तअल्लुक़...
लो गर्द और किताबें
सुलगते दिन हैं,
तवील तन्हाइयाँ मिरे साथ लेटे-लेटे
फ़ज़ा से आँखें लड़ा रही हैं
मिरे दरीचे के पास सुनसान रहगुज़र है
अभी-अभी एक रेला आया था गर्द का
जो...
बगिया लहूलुहान
हरियाली को आँखें तरसें, बगिया लहूलुहान!
प्यार के गीत सुनाऊँ किस को शहर हुए वीरान!
बगिया लहूलुहान!
डसती हैं सूरज की किरनें, चाँद जलाए जान
पग-पग मौत के...
हाथ खोल दिए जाएँ
मेरे हाथ खोल दिए जाएँ
तो मैं
इस दुनिया की दीवारों को
अपने ख़्वाबों की लकीरों से
सियाह कर दूँ
और क़हर की बारिश बरसाऊँ
और इस दुनिया को अपनी...
















