प्रेम की होली

यह कहानी यहाँ सुनें: https://youtu.be/RAyDLimOq3k गंगी का सत्रहवाँ साल था, पर वह तीन साल से विधवा थी, और जानती थी कि मैं विधवा हूँ, मेरे लिए...

अदालत एक ढकोसला है : छह साथियों का एलान

'भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़' से कमिश्नर, विशेष ट्रिब्यूनल, लाहौर साज़िश केस, लाहौर जनाब, अपने छह साथियों की ओर से, जिनमें कि मैं भी शामिल हूँ,...

डॉ लोहिया पर दस्तावेज़ी किताब

किताब: 'डॉ लोहिया और उनका जीवन-दर्शन' लेखक: कुमार मुकुल प्रकाशक: प्रभात प्रकाशन टिप्पणी: देवेश पथ सारिया अपने शीर्षक के अनुरूप ही यह पुस्तक भारत में समाजवाद के अगुआ...

अभीष्ट

अकारण तो नहीं साउद्देश्य ही था व्यवस्था के पन्नों पर कुछ लिखित, कुछ अलिखित प्रथम-दृष्टया तो अबूझ रहा चेतना के उत्तरोत्तर क्रम के बाद जाना कि उछाले गए सिक्के के चित...

मौन करुणा

मैं तुम्हारी मौन करुणा का सहारा चाहता हूँ। जानता हूँ इस जगत में फूल की है आयु कितनी और यौवन की उभरती साँस में है वायु...

किताब अंश: ‘पाकिस्तान मेल’ – खुशवंत सिंह

'पाकिस्तान मेल' भारत-विभाजन की त्रासदी पर केंद्रित सुप्रसिद्ध अंग्रेज़ी उपन्यासकार खुशवंत सिंह का अत्यंत मूल्यवान उपन्यास है। सन् 1956 में अमेरिका के ‘ग्रोव प्रेस...

गाँव की खूँटी पर

मेरे गाँव के धनाराम मेघवाल को जिस उम्र में जाना चाहिए था स्कूल करने चाहिए थे बाबा साहब के सपने पूरे उस उम्र में उसने की थी...

दुःख

सपनों के डर से मैंने कई रातें दिन की तरह बितायीं और दिन में बेहोश होकर सोया बहुत बाद में मुझे मालूम हुआ नींद और बेहोशी में फ़र्क़ होता...

वे सब मेरी ही जाति से थीं

मुझे तुम न समझाओ अपनी जाति को चीन्हना श्रीमान बात हमारी है, हमें भी कहने दो तुम ये जो कूद-कूदकर अपनी सहूलियत से मर्दवाद का बहकाऊ...

‘देस’ : देशज सन्दर्भों का आख्यान

कविता संग्रह: 'देस' कवि: विनोद पदरज प्रकाशक: बोधि प्रकाशन टिप्पणी: देवेश पथ सारिया विनोद पदरज देशज कवि हैं। वे राजस्थान की खाँटी संस्कृति का हिन्दी कविता में सशक्त...

किताब अंश: ‘टोपी शुक्ला’ – राही मासूम रज़ा

किताब: 'टोपी शुक्ला' लेखक: राही मासूम रज़ा प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन संसार के तमाम छोटे-बड़े लोगों की तरह टोपी भी बेनाम पैदा हुआ था। नाम की ज़रूरत तो...

कुछ कह रही थी छोटी चिड़िया

सबेरे-सबेरे कुछ कह रही थी छोटी चिड़िया गली सूनी थी सूरज चढ़ा नहीं था कोई स्तवन था किसी देवता का जो भरपूर देता हो अन्न और भोज्य अपनी स्तुति से...
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