लो आज समुंदर के किनारे पे खड़ा हूँ

लो आज समुंदर के किनारे पे खड़ा हूँ ग़र्क़ाब सफ़ीनों के सिसकने की सदा हूँ इक ख़ाक-ब-सर बर्ग हूँ, टहनी से जुदा हूँ जोड़ेगा मुझे कौन कि...

कभी आधा, कभी पूरा

छतों की दूरियाँ लाँघता मैं छतों से गिरा खिड़कियों से झाँकता हुआ गलियों में गिरा कभी आधा, कभी पूरा! मैं निकाला गया जिनमें झाड़ू दी लीपा पोता उन घरों से धक्‍के...

चम्पई धूप

सब कुछ अपनी अनुकूलता संग प्रतिकूलता में भी गतिमान रहे। कोई हाथ पकड़कर रोकने की विवशता के आयाम नहीं गढ़ सकता, जिस प्रवाह में तुम आते हो तुम्हारे लौटने...

साँप जो अपनी पूँछ खा गया [किताब अंश: ‘ठाकरे भाऊ’]

धवल कुलकर्णी की किताब 'ठाकरे भाऊ : उद्धव, राज और उनकी सेनाओं की छाया', राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुई है। महाराष्ट्र के सियासी परिदृश्य पर...

कविताएँ: फ़रवरी 2021

अक्षर शब्द और अर्थ पद और वाक्य तुम और मैं शब्द जो पृथक हो गए काश! अक्षर ना होते। वर्ण कुछ शब्द जीवन में ऐसे गूँजते हैं जो निराशा से भर देते हैं कुछ वाक्य जिनमें...

नदी और स्त्री

स्त्री होना या होना नदी! क्या फ़र्क़ पड़ता है? दोनों ही उठतीं, गिरतीं बहतीं, रुकतीं एक बदलती धारा एक बदलती नियति। एक सोच एक धार मिल जाती है किसी न किसी सागर से और हो जाती है एकाकार सागर में अपने...

सच्ची कविता के लिए

वह जो अपने ही माँस की टोकरी सिर पर उठाए जा रही है और वह जो पिटने के बाद ही खुल पाती है अन्धकार की तरफ़ एक दरवाज़े-सी जैसे...

रुक गया आँख से बहता हुआ दरिया कैसे

रुक गया आँख से बहता हुआ दरिया कैसे ग़म का तूफ़ाँ तो बहुत तेज़ था, ठहरा कैसे हर घड़ी तेरे ख़यालों में घिरा रहता हूँ मिलना चाहूँ...

कविताएँ: फ़रवरी 2021

तुम्हारे साथ थोड़ा और मनुष्य हुआ मैं तुम्हारे साथ तुम्हारा शहर अपना-सा लगा तुम्हारे साथ मैंने जाना— कि शहर को जानना हो तो शहर में बहती नदी को जानना चाहिए नदी की...

सीनियर सिटिज़न उर्फ़ सिक्सटी प्लसजी

अब तो करवा लो बीमा। महँगा नहीं है। टीवी पर इंश्योरेंस वाले भाईसाहब दिन-भर अपनत्व भरा उलाहना देते रहते हैं। ड्राइंगरूम के काउच पर...

बड़ी बात नहीं होती

बड़ी बात नहीं होती दाल या सब्ज़ी में नमक भूल जाना चाय में दो बार चीनी डालना, अदरक कूटकर भी डालना भूल जाना बड़ी बात नहीं होती...

निकानोर पार्रा की कविताएँ

निकानोर पार्रा चिलियन कवि हैं। प्रस्तुत कविताओं का हिन्दी में अनुवाद देवेश पथ सारिया ने किया है। कविताएँ लोगोज़ जर्नल पर उपलब्ध लिज़ वर्नर...
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