टिप्पणी: ‘उसने गांधी को क्यों मारा’ – अशोक कुमार पांडेय
किताब: 'उसने गांधी को क्यों मारा' — अशोक कुमार पांडेय
टिप्पणी: नरेंद्र सहरावत
बुद्ध के बारे में एक दंतकथा है कि बुद्ध ने एक सभा में सुबह...
मनीषा कुलश्रेष्ठा की किताब ‘होना अतिथि कैलाश का’
सर्द प्रकृति के मौन विज्ञान में ख़ुद को खोने, खोजने की यात्रा
समीक्षा: देवेश पथ सारिया
पुस्तक: 'होना अतिथि कैलाश का'
लेखिका: मनीषा कुलश्रेष्ठ
मनीषा कुलश्रेष्ठ जी का...
प्रमोद रंजन की किताब ‘शिमला डायरी’ [समीक्षा: देविना अक्षयवर]
जिसे आज 'पहाड़ों की रानी' कहा जाता है, वह कभी उत्तरी भारत के इस हिमालयी राज्य का एक छोटा-सा गाँव हुआ करता था। अँग्रेज़ों...
प्रामाणिक अनुभूति (‘हरी घास पर क्षण भर’ : अज्ञेय)
'हरी घास पर क्षण भर' : अज्ञेय
गेटे ने एक जगह लिखा है कि "आजकल के कवि अपनी स्याही में बहुत-सा पानी डाल देते हैं।"
और...
पंखुरी सिन्हा की किताब ‘प्रत्यंचा’
'कविता एक निर्णय है'
किताब समीक्षा: पूनम सिन्हा
किताब: 'प्रत्यंचा' (कविता संग्रह)
कवयित्री: पंखुरी सिन्हा
प्रकाशन: बोधि प्रकाशन
"कविता न होगी साहस न होगा
एक और ही युग होगा जिसमें...
‘लाल टीन की छत’ – निर्मल वर्मा
किताब: 'लाल टीन की छत' - निर्मल वर्मा
रिव्यू: यशस्वी पाठक
'लेखक की आस्था' में निर्मल वर्मा ने लिखा-
"कला मनुष्य के उन स्मृतिखण्डों को नष्ट होने...
प्रभात की किताब ‘जीवन के दिन’ पर एक टिप्पणी
कविता संग्रह: 'जीवन के दिन' - प्रभात
टिप्पणी: अमर दलपुरा
मनुष्य के पास न कोई दिशासूचक यन्त्र था अपने जीवन के प्रारम्भ में, न भूगोलवेत्ता था, न...
‘कितने पाकिस्तान’ – कमलेश्वर
किताब: 'कितने पाकिस्तान' - कमलेश्वर
रिव्यू: पूजा भाटिया
कमलेश्वर दारा लिखित, राजपाल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित, इतिहास के गर्भ से खंगालकर निकाली गयी तमाम घटनाओं/तथ्यों को समय...
‘ए मिरर्ड लाइफ़’ – रविसंकर बाल
किताब: 'ए मिरर्ड लाइफ़' - रविसंकर बाल
रिव्यू: तसनीफ़ हैदर
'ए मिरर्ड लाइफ़' रविसंकर बाल की लिखी हुई मौलाना रोम की एक ख़ूबसूरत और छोटी-सी बायोग्राफ़ी...
‘अवर मून हैज़ ब्लड क्लॉट्स’ – राहुल पंडिता
किताब: 'अवर मून हैज़ ब्लड क्लॉट्स' - राहुल पंडिता
रिव्यू: तसनीफ़ हैदर
कश्मीरी पंडितों के बारे में लिखी गयी किताबों में ये एक अहम किताब है।...
‘मैं बनूँगा गुलमोहर’ – सुशोभित सक्तावत
कविता संग्रह: 'मैं बनूँगा गुलमोहर' (प्रेम कविताएँ व गद्य गीत)
कवि: सुशोभित सक्तावत
प्रकाशन: लोकोदय प्रकाशन
लाल रंग प्रेम का रंग है। इसलिए लाल रंग उत्सव का भी...
‘मैंने अपनी माँ को जन्म दिया है’ को पढ़ते हुए
कविता संग्रह: 'मैंने अपनी माँ को जन्म दिया है' - रश्मि भारद्वाज
प्रकाशन: सेतु प्रकाशन (setuprakashan.com)
कविताएँ पढ़ते वक़्त सोचा एक पाठक के तौर पर मैं...








![प्रमोद रंजन की किताब ‘शिमला डायरी’ [समीक्षा: देविना अक्षयवर] Shimla Diary - Pramod Ranjan](https://poshampa.org/wp-content/uploads/2020/09/Shimla-Diary1-300x194.jpg)








