आर. के. लक्ष्मण
आर. के. लक्ष्मण के उद्धरण | RK Laxman Quotes in Hindi
अनुवाद: पुनीत कुसुम
"एक बच्चे को वास्तविकता कल्पना से कहीं अधिक शानदार लगती है।"
"भारत का...
बौछार पे बौछार
अनुवाद: शमशेर बहादुर सिंह
बौछार पे बौछार
सनसनाते हुए सीसे की बारिश का ऐसा जोश
गुलाबों के तख्ते के तख्ते बिछ गए कदमों में
कायदे से अपना रंग...
भारती मुखर्जी
अनुवाद: पुनीत कुसुम
"हास्य का अनुवाद करना सबसे कठिन है।"
"दुनिया उन लोगों में विभाजित हैं, जो साथ रहते हैं और जो छोड़ जाते हैं।"
"सुस्ती भी...
आख़…थू
इंसान, इंसान को ही मार देता है, मूर्खतापूर्ण कारणों से और वीभत्स रूपों में, लेकिन फिर भी खुद को संवेदनशील दिखाने की कोशिश करता है..
इस बात का बोध इस कहानी के नायक को तब होता है जब वह मछली खाने बैठता है और देखता है कि उस मछली के मुँह के दूसरी तरफ एक पूरी दूसरी दुनिया है और उस दुनिया में प्रवेश भी कर जाता है! उस दुनिया में उसके साथ क्या-क्या होता है, पढ़िए प्रेमनाथ दर की कहानी 'आख़..थू' में..!
शिव कुमार बटालवी की कविताएँ
अनुवाद: तरकश प्रदीप
एक सफ़र
(कविता संग्रह 'बिरहा तू सुलतान' से)
वो भी शहर से आ रही थी
मैं भी शहर से आ रहा था
ताँगा चलता जा रहा...
औरत और मर्द
अनुवाद: बलराम अग्रवाल
एक बार मैंने एक औरत का चेहरा देखा। उसमें मुझे उसकी समस्त अजन्मी सन्तानें दिखाई दीं।
और एक औरत ने मेरे चेहरे को...
सवालों की किताब – I
अनुवाद: पुनीत कुसुम
बड़े-बड़े हवाई जहाज
क्यों नहीं उड़ते लिए साथ अपने बच्चों को?
कौन सी पीली चिड़िया
अपना घोंसला भर लेती है नींबूओं से?
वे हेलीकाप्टरों को क्यों...
सवालों की किताब
अनुवाद: पुनीत कुसुम
सवालों की किताब - I
सवालों की किताब - II
सवालों की किताब - III
सवालों की किताब - IV
झुम्पा लाहिड़ी
झुम्पा लाहिड़ी के उद्धरण | Quotes by Jhumpa Lahiri in Hindi
अनुवाद: अर्चना कंसल
"किसी किताब का पहला वाक्य हाथ मिलाने जैसा होता है, या शायद...
तक़सीम
"काका तू जहाँ मरजी है रह। तू मुसलमान हो गया है तो कोई बात नहीं, पर मान तो ले तू ही मेरा बेटा है, पिन्नी।"
तक़सीम यानी विभाजन में अनगिनत लोग अपने परिवारों से बिछड़ गए और वे परिवार उन लोगों का केवल इंतज़ार करते रहे.. अधिकतर लोगों के लिए यह इंतज़ार कभी न ख़त्म होने वाला इंतज़ार भी था और इतना भयावह कि इससे छुटकारा पाने के लिए इंसान एक झूठी तसल्ली का आसरा तक खोजने लगा था..
गुलज़ार को जब किसी ने बताया कि वो उनके बिछुड़े हुए बेटे हैं और गुलज़ार जब उनके घर गए तो क्या हुआ.. पढ़िए इस कहानी में!
ताकत और रोमांच
'ताकत और रोमांच' - खलील जिब्रान
(अनुवाद: बलराम अग्रवाल)
अगर कविता लिखने की ताकत और अनलिखी कविता के रोमांच के बीच किसी एक को चुनने...















