आँसू और हँसी

'The Wanderer: Tears and Laughter' : : Kahlil Gibran अंग्रेज़ी से अनुवाद: गौरव अदीब शाम के वक़्त नील नदी के किनारे एक लकड़बग्घे की मुलाक़ात घड़ियाल...

आदमी कब पैदा हुआ

"तुमको यह भी मालूम होगा कि ऊँचे दरजे के जानवरों को अपने बच्चों से थोड़ा-बहुत प्रेम होता है। आदमी सबसे ऊँचे दरजे का जानवर है, इसलिए माँ और बाप अपने बच्चों को बहुत प्यार करते और उनकी हिफाजत करते हैं।"

लिबास

'The Wanderer: Garments' : : Kahlil Gibran अंग्रेज़ी से अनुवाद: गौरव अदीब एक रोज़ समन्दर के किनारे ख़ूबसूरती की मुलाक़ात बदसूरती से हुई। उन्होंने एक दूसरे...

गिरगिट

एक कुत्ता किस तरह एक दारोगा को गिरगिट बना देता है और उसकी नैतिकता की रंगोली सजाता है, यह पढ़िए अंतोन चेखव की इस उत्कृष्ट कहानी में! :)

साथ होने के लिए हमेशा पास खड़े होने की ज़रूरत नहीं...

'The Prophet: Marriage' : : Kahlil Gibran अंग्रेज़ी से अनुवाद: गौरव अदीब और तब अलमित्रा ने दोबारा पूछा, "शादी के बारे में आप क्या कहेंगे?" उन्होंने जवाब...

जानवर कब पैदा हुए

"वे अपने को उसी तरह का बना लेते हैं जैसे उनके आसपास की चीजें हों। उनका रंग इसलिए बदल जाता है कि वे अपने को दुश्मनों से बचा सकें, क्योंकि अगर उनका रंग आस-पास की चीजों से मिल जाए तो वे आसानी से दिखाई न देंगे। सर्द मुल्कों में उनकी खाल पर बाल निकल आते हैं जिससे वे गर्म रह सकें। इसीलिए चीते का रंग पीला और धारीदार होता है, उस धूप की तरह, जो दरख्तों से हो कर जंगल में आती है। वह घने जंगल में मुश्किल से दिखाई देता है।"

जानदार चीजें कैसे पैदा हुईं

"तुम पूछोगी कि जमीन पर जानदार चीजों का आना कब शुरू हुआ और पहले कौन-कौन सी चीजें आईं। यह बड़े मजे का सवाल है, पर इसका जवाब देना आसान नहीं है। पहले यह देखो कि जान है क्या चीज। शायद तुम कहोगी कि आदमी और जानवर जानदार हैं। लेकिन दरख्तों और झाड़ियों, फूलों और तरकारियों को क्या कहोगी? यह मानना पड़ेगा कि वे सब भी जानदार हैं। वे पैदा होते हैं, पानी पीते हैं, हवा में साँस लेते हैं और मर जाते हैं। दरख्त और जानवर में खास फर्क यह है कि जानवर चलता-फिरता है, और दरख्त हिल नहीं सकते।"

जमीन कैसे बनी

अनुवाद: प्रेमचंद तुम जानती हो कि जमीन सूरज के चारों तरफ घूमती है और चाँद जमीन के चारों तरफ घूमता है। शायद तुम्हें यह भी...

जीवन-नृत्य

'Lifedance', a poem by Charles Bukowski अनुवाद: सुमित जो हिस्सा मस्तिष्क और आत्मा को विभाजित करता है वो कई कारणों से अनुभवों से प्रभावित होता है ― जो...

कान

अनुवाद: साउथ कोरियाई कवि 'को उन' की कविता 'इअर' (Ear) आ रहा है कोई, दूजे संसार से। रात्रि-वर्षा की फुसफुसाहट अब उधर जा रहा है कोई उन दोनों का...

राह पूछते हुए

अनुवाद: साउथ कोरियाई शायर जनाब 'को उन' की नज़्म 'आस्किंग द वे' तुम सब जाहिल, पूछते हो कि ख़ुदा क्या है बल्कि पूछना चाहिए कि ज़िन्दगी...

नेरूदा के सवालों से बातें – III

अनुवाद: पुनीत कुसुम मैं बताती हूँ, न ही गुलाब नग्न है, न पहने हैं कपड़े गुलाब ने लेकिन केवल इंसान का दिल ही कर सकता है...
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