साढ़े तीन आने
"मैंने क़त्ल क्यों किया। एक इंसान के ख़ून में अपने हाथ क्यों रंगे, यह एक लम्बी दास्तान है। जब तक मैं उसके तमाम अवाक़िब...
कविताएँ: जून 2021
सबक़
इस समय ने पढ़ाए हैं हमें
कई सबक़
मसलन यही कि
शब्दों से ज़्यादा स्पर्श में ताक़त होती है
मिलने के अवसर गँवाना
भूल नहीं, अपराध है
और जीवन से...
जीवन की बात
मैं
इस हृदय विदारक समय में केवल
जीवन के बारे में सोचता हूँ
और उसे मेरी मृत्यु की चिन्ता लगी रहती है
जबकि मैंने कई बार कहा भी
क्या...
साइकिल सवार
हम साइकिल सवार हैं
हम पहिए से राब्ता रखते हैं
उसके आविष्कार की मूल भावना के साथ
किसी ईंधन ने अभी नहीं लिया है
पहिए के उत्साह का...
पंचतत्व (चींटी, तितली, पानी, गिलहरी और दरख़्त)
मेरे दोस्त
जब भी चलना
तो बाघ की तरह नहीं चलना
चलना चींटियों की तरह
सबके साथ बिना डरे, बिना थके,
बिना रुके, एकदम शान्त—केवल
अपने पथ पर
जब भी भरो...
स्थगित नहीं होगा शब्द
स्थगित नहीं होगा शब्द—
घुप्प अंधेरे में
चकाचौंध में
बेतहाशा बारिश में
चलता रहेगा
प्रेम की तरह,
प्राचीन मन्दिर में
सदियों पहले की व्याप्त प्रार्थना की तरह—
स्थगित नहीं होगा शब्द—
मौन की...
मैं सरल होना चाहती हूँ
महत्त्वाकाँक्षाओ!
चली जाओ
जहाँ तुम्हारा मन करे
जहाँ तुम्हारे पाँव पड़ें
मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती
न अभी
न आगे कभी
मैं नहीं बाँटना चाहती तुमसे
अपने सपने
अपने सरोकार
तुम मुझे समेट...
केदार डायरी
रेगिस्तान की तरह सूखा हूँ
समुन्द्र-सा अकेला और
पहाड़ों की तरह उदास
मैं ही तो हूँ
क्या ही हूँ मैं।
तीर्थयात्राएँ पवित्र करती हैं शरीर और मन, कैथार्सिस (catharsis)...
तुम्हारी संतान सदैव सुखी रहें
लम्बी कविता 'तुम्हारी संतान सदैव सुखी रहें' से
सभ्यता और संस्कृति की समन्वित सड़क पर
निकल पड़ा हूँ शोध के लिए
झाड़ियों से छिल गयी है देह
थक...
















