ब्रह्माण्ड होना चाहिए
हमें ताम्बा होना चाहिए और जस्ता
लोहा और एल्यूमीनियम
पीतल और चान्दी
सोना और प्लेटिनम
हीरा और प्ल्यूटोनियम
हममें से किसी-किसी को
मोती भी होना चाहिए या खनिज तेल
डीज़ल या...
कविताएँ: मई 2021
महामारी में जीवन
कोई ग़म नहीं
मैं मारा जाऊँ अगर
सड़क पर चलते-चलते
ट्रक के नीचे आकर
कोई ग़म नहीं
गोहरा खा जाए मुझे
खेत में रात को
ख़ुशी की बात है
अस्पताल...
ऐड्रियाटिक जेस की कविताएँ
एड्रिआटिक जेस विश्व पटल पर उभरते युवा अल्बेनियन कवि और ब्लॉगर हैं। उनका जन्म परमेट अल्बानिया में 1971 में हुआ, जहाँ अपनी स्कूली शिक्षा...
‘सूरज को अँगूठा’ : अभिव्यक्ति के विविध रंग
कविता संग्रह: 'सूरज को अँगूठा'
कवि: जितेन्द्र श्रीवास्तव
टिप्पणी: देवेश पथ सारिया
सन 2012 में प्रकाशित 'कायांतरण' के बाद 'सूरज को अँगूठा' वरिष्ठ कवि जितेंद्र श्रीवास्तव का...
कविताई काम नहीं आती
अब कविताई अपनी कुछ काम नहीं आती
मन की पीड़ा,
झर-झर शब्दों में झरती थी
है याद मुझे
जब पंक्ति एक
हलचल अशान्ति सब हरती थी
यह क्या से क्या...
किताब अंश: ‘ख़ानज़ादा’ – भगवानदास मोरवाल
'हलाला', 'बाबल तेरा देस में', 'रेत', 'नरक मसीहा', 'सुर बंजारन', 'वंचना', 'शकुंतिका', 'काला पहाड़' के लिए चर्चित कथाकार भगवानदास मोरवाल ने हिन्दी साहित्य में...
तुम्हारे भगवान की क्षय
लड़का माँ के पेट से ईश्वर का ख़याल लेकर नहीं निकलता। भूत, प्रेत तथा दूसरे संस्कारों की तरह ईश्वर का ख़याल भी लड़के को...
तब वे कवि हो जाते हैं
जब बच्चे लम्बी साँस लेकर
मारते हैं किलकारियाँ
तब गौरैया की तरह उड़ता है माँ का मन
जब बच्चों की कोमल हथेलियाँ
छूती हैं मिट्टी
तब बन जाते हैं...
समय से मत लड़ो
लड़ो
लड़ो वापस जाते हुए सुख से
अड़ जाओ उसके रास्ते में ज़िद करते
पैर पटककर—
बाप की पतलून खींचकर मेले में कुछ देर और ठहर
पसन्द का खिलौना...

















